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Chenab Railway Bridge: दुनिया के सबसे ऊंचा चिनाब रेलवे ब्रिज की ओवरआर्क का काम पूरा
Sat, 13 Aug 2022 04:55 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, रियासी
अमर उजाला नेटवर्क, रियासी
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sat, 13 Aug 2022 04:55 PM IST
सार
जम्मू संभाग के रियासी जिले में चिनाब दरिया पर ये आर्क ब्रिज बन रहा है, जो एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा है। इसके आर्क की चिनाब नदी के जलस्तर से ऊंचाई 359 मीटर की है।
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Chenab Railway Bridge
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा सिंगल-आर्क रेलवे पुल बनाया जा रहा है। शनिवार को पुल के ओवरआर्क डेक की लांचिंग की गई। इस दौरान आजादी के अमृत महोत्सव के तहत पुल पर तिरंगा ध्वज भी फहराया गया। पुल के बनने के बाद श्रीनगर शेष भारत से रेल नेटवर्क के माध्यम से जुड़ने जा रहा है। यह रेल के माध्यम से कश्मीर पहुंचने की तरफ एक और कदम है।
एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा है ब्रिज
जम्मू संभाग के रियासी जिले में चिनाब दरिया पर ये आर्क ब्रिज बन रहा है, जो एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा है। इसके आर्क की चिनाब नदी के जलस्तर से ऊंचाई 359 मीटर की है। चिनाब पुल का ओवरआर्क डेक लांच होने से सलाल-ए और दुग्गा रेलवे स्टेशन दोनों ओर से जुड़ गए हैं। अब रेल पटरी बिछाने का कार्य दिसंबर माह तक पूरा करने का लक्ष्य भी रखा गया है। 1.315 किलोमीटर लंबा चिनाब रेलवे ब्रिज सलाल-ए और डुगा रेलवे स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा।
पुल भूकंप रोधी बनाया जा रहा है। पुल में 93 डेक भाग हैं। इसमें प्रत्येक का वजन 85 टन है। कटड़ा से काजीगुंड तक रेलखंड के पांच हिस्सों पर काम चल रहा है। यह उधमपुर से बारामुला तक 272 किलोमीटर लंबे रेलवे प्रोजेक्ट का हिस्सा है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक देश की महत्वाकांक्षी परियोजना है।
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क्यों खास है यह पुल
17 स्तंभों वाले पुल की लंबाई 1315 मीटर है। इसके निर्माण में 1,486 करोड़ रुपये की लागत से 28,660 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया गया है। स्थापित आर्च का वजन 10,619 मीट्रिक टन है। संरचना में प्रयुक्त स्टील माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान के लिए उपयुक्त है। पुल का न्यूनतम जीवनकाल 120 वर्ष है। इसे 100 किमी की गति से ट्रेनों के चलने के लिए बनाया जा रहा है।
119 किलोमीटर की 38 सुरंगें
एफकान इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी इसका निर्माण कर रही है। कंपनी के उप प्रबंध निदेशक गिरिधर राजागोपालन ने बताया कि उधमपुर से बारामुला तक 272 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन पर 38 सुरंगें होंगी। सुरंगों की लंबाई 119 किलोमीटर बनती है। देश की सबसे लंबी रेल सुरंग 12.75 किलोमीटर भी इसमें शामिल है। इस हिस्से में 927 बड़े व छोटे पुल होंगे। उधमपुर से कटड़ा तक 25 किलोमीटर तक ट्रैक पहले से सुचारु है। बनिहाल से बारामुला तक भी रेल यातायात चालू है। सिर्फ कटड़ा से बनिहाल के बीच ट्रैक बनना बाकी है। जिसका निर्माण मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।
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एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा है ब्रिज
जम्मू संभाग के रियासी जिले में चिनाब दरिया पर ये आर्क ब्रिज बन रहा है, जो एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा है। इसके आर्क की चिनाब नदी के जलस्तर से ऊंचाई 359 मीटर की है। चिनाब पुल का ओवरआर्क डेक लांच होने से सलाल-ए और दुग्गा रेलवे स्टेशन दोनों ओर से जुड़ गए हैं। अब रेल पटरी बिछाने का कार्य दिसंबर माह तक पूरा करने का लक्ष्य भी रखा गया है। 1.315 किलोमीटर लंबा चिनाब रेलवे ब्रिज सलाल-ए और डुगा रेलवे स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा।
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पुल भूकंप रोधी बनाया जा रहा है। पुल में 93 डेक भाग हैं। इसमें प्रत्येक का वजन 85 टन है। कटड़ा से काजीगुंड तक रेलखंड के पांच हिस्सों पर काम चल रहा है। यह उधमपुर से बारामुला तक 272 किलोमीटर लंबे रेलवे प्रोजेक्ट का हिस्सा है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक देश की महत्वाकांक्षी परियोजना है।
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क्यों खास है यह पुल
17 स्तंभों वाले पुल की लंबाई 1315 मीटर है। इसके निर्माण में 1,486 करोड़ रुपये की लागत से 28,660 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया गया है। स्थापित आर्च का वजन 10,619 मीट्रिक टन है। संरचना में प्रयुक्त स्टील माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान के लिए उपयुक्त है। पुल का न्यूनतम जीवनकाल 120 वर्ष है। इसे 100 किमी की गति से ट्रेनों के चलने के लिए बनाया जा रहा है।
119 किलोमीटर की 38 सुरंगें
एफकान इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी इसका निर्माण कर रही है। कंपनी के उप प्रबंध निदेशक गिरिधर राजागोपालन ने बताया कि उधमपुर से बारामुला तक 272 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन पर 38 सुरंगें होंगी। सुरंगों की लंबाई 119 किलोमीटर बनती है। देश की सबसे लंबी रेल सुरंग 12.75 किलोमीटर भी इसमें शामिल है। इस हिस्से में 927 बड़े व छोटे पुल होंगे। उधमपुर से कटड़ा तक 25 किलोमीटर तक ट्रैक पहले से सुचारु है। बनिहाल से बारामुला तक भी रेल यातायात चालू है। सिर्फ कटड़ा से बनिहाल के बीच ट्रैक बनना बाकी है। जिसका निर्माण मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।