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सिपाही चंद्र प्रकाश का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
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पुंछ। मिजोरम में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से जान गंवाने वाले बीएसएफ के सिपाही चंद्र प्रकाश (41) का सोमवार को पांच दिन बाद पुंछ नगर में पार्थिव शरीर पहुंचाया गया। पुलस्त नदी किनारे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सात साल के बेटे मानवेश शर्मा ने पिता को मुखागनी दी। बीएसएफ जवान को अंतिम विदाई देने बड़ी संख्या में सभी समुदायों के लोग पहुंचे।
चंद्र प्रकाश पुत्र देसराज के देहांत की खबर पांच दिन पहले ही पहुंच गई थी। इसके बाद उनके घर पर रिश्तेदारों, पड़ोस और जान-पहचान वालों का आना-जाना शुरू हो गया था। उनके देहांत की खबर सुनकर घर में मातम छा गया। सैनिक के पार्थिव शरीर को पहले पूर्वोत्तर से हवाई जहाज से दिल्ली और फिर दिल्ली से जम्मू स्थित बीएसएफ कैंप पलौड़ा लाया गया, जहां से रविवार देर रात सड़क मार्ग से बीएसएफ के जवान पार्थिव शरीर लेकर पुंछ नगर में चंद्र प्रकाश के घर पहुंचे। सोमवार सुबह 10 बजे घर से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रिश्तेदार राजेश कुमार, एडवोकेट राजिंद्र सिंह, रमेश बाली आदि ने बताया कि चंद्र प्रकाश ने कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी है। पूर्वोत्तर में ड्यूटी पर दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया। इससे परिवार को बड़ी क्षति पहुंची है।
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चंद्र प्रकाश पुत्र देसराज के देहांत की खबर पांच दिन पहले ही पहुंच गई थी। इसके बाद उनके घर पर रिश्तेदारों, पड़ोस और जान-पहचान वालों का आना-जाना शुरू हो गया था। उनके देहांत की खबर सुनकर घर में मातम छा गया। सैनिक के पार्थिव शरीर को पहले पूर्वोत्तर से हवाई जहाज से दिल्ली और फिर दिल्ली से जम्मू स्थित बीएसएफ कैंप पलौड़ा लाया गया, जहां से रविवार देर रात सड़क मार्ग से बीएसएफ के जवान पार्थिव शरीर लेकर पुंछ नगर में चंद्र प्रकाश के घर पहुंचे। सोमवार सुबह 10 बजे घर से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रिश्तेदार राजेश कुमार, एडवोकेट राजिंद्र सिंह, रमेश बाली आदि ने बताया कि चंद्र प्रकाश ने कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी है। पूर्वोत्तर में ड्यूटी पर दिल का दौरा पड़ने से उनका देहांत हो गया। इससे परिवार को बड़ी क्षति पहुंची है।
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