पुंछ: जवान अब्दुल माजिद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, पिता और बच्चों ने किया आखिरी सलाम
हवलदार अब्दुल माजिद का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पार्थिव शरीर को लेकर काफिला गांव में दाखिल हुआ तो उनके घर पर चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में संवेदना के लिए उनके घर पहुंचे लोगों ने भारत माता की जय, अब्दुल माजिद अमर रहे आदि नारे लगाकर बहादुर जवान को श्रद्धांजलि दी।
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राजोरी मुठभेड़ में पुंछ के गांव अजोट के रहने वाले हवलदार अब्दुल माजिद भी आतंकियों से लोहा लेते हुए बलिदान हुए। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जैसे ही उनके पार्थिव शरीर को लेकर काफिला गांव में दाखिल हुआ तो उनके घर पर चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में संवेदना के लिए उनके घर पहुंचे लोगों ने भारत माता की जय, अब्दुल माजिद अमर रहे आदि नारे लगाकर बहादुर जवान को श्रद्धांजलि दी।
अब्दुल माजिद के पार्थिव शरीर को पुलिस और सेना के उच्च अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही उनके पिता और बच्चों ने भी उन्हें आखिरी सलामी दी। नन्हें बच्चों की तरफ से जब अपने पिता को इस तरह सलामी देते हुए जिसने भी देखा उसकी आंखों में पानी उतर आया। उनके घर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना समेत बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए हैं। उन्हें उनके गांव में ही शुक्रवार को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
#WATCH | Army personnel and locals in J&K's Poonch pay last respects to Havildar Abdul Majid who lost his life fighting terrorists during the Rajouri encounter pic.twitter.com/J2Mpzu3tjX
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 24, 2023
राजोरी में कालाकोट क्षेत्र के बाजीमाल में बुधवार को हुई मुठभेड़ में दो खूंखार आतंकियों को मार गिराया गया है। इस गोलीबारी में दो कैप्टटन सहित पांच जवान बलिदान हो गए। इनमें 63 राष्ट्रीय राइफल्स के कैप्टन एमवी प्रांजल (मंगलोर, कर्नाटक), 9 पैरा के कैप्टन शुभम गुप्ता (आगरा), 9 पैरा के हवलदार कमांडो अब्दुल माजिद (अजोट, पुंछ), लांसनायक संजय बिष्ट (हल्ली पादली, नैनीताल उत्तराखंड) व पैराट्रूपर सचिन लौर (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश) बलिदान हुए। कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम गुप्ता, लांसनायक संजय बिष्ट व पैराट्रूपर सचिन लौर के पार्थिव शरीर को जम्मू में अंतिम स्लामी दी। यहां पढ़ें पूरी खबर...
पुंछ के गांव अजोट के हवलदार अब्दुल मजीद अपने पीछे तीन नन्हे बच्चे छोड़ गए। इन बच्चों को इस बात का पता तक नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया सदा के लिए उठ गया। घटना से अनजान बड़ा बेटा अब भी सेना में भर्ती होने की बात कहता है।
सुबह से घर में लगी भीड़ और जमा महिलाओं को रोते देख बलिदानी का बड़ा बेटा साहिल (8) बड़ों को देख कभी रोने लगता है, फिर अन्य बच्चों के साथ बातें करने लगता है। लेकिन, छोटे बेटे राहिल (6) और बेटी महिरा (4) को पता ही नहीं कि उनके परिवार पर किस प्रकार का कहर टूटा है।
बेटा ने कहा- मैं भी सेना की वर्दी पहनूंगा
ये दोनों घर में आए रिश्तेदारों के बच्चों के साथ उछल-कूद करते नजर आए। हालांकि, शहीद के बड़े बेटे को भी पूरी तरह पिता की शहादत का पता नहीं है। लेकिन, यह पूछे जाने पर कि पढ़-लिख कर क्या करने वाला है, तो वह कहता है कि वह सेना में जाएगा। वो भी बड़े होकर सेना की वर्दी पहनेगा। पिता का फोटो थमे साहिल बताता है कि तीन-चार दिन पहले पापा से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने अच्छे से पढ़ाई करने को कहा है।
...अगर पता होता तो मैं उसे वापस जाने ही न देती
मुझे क्या पता था कि मेरा मजीद अंतिम छुट्टी पर आया है। अगर पता होता तो मैं उसे वापस जाने ही न देती। यह बात बलिदानी अब्दुल मजीद की मां परवीन अख्तर ने कही। वह सुबह से भूखी-प्यासी अपने बेटे की शहादत पर आंसू बहा-बहा कर थक चुकी हैं। उनका कहना है कि नौकरी पर जा रहे मजीद ने कहा था कि जल्द ही वापस आऊंगा। जब भी फोन पर बात करता तो मैं खाने की पूछती थी। वह कहता था कि अम्मा तुम भी बस एक ही बात पूछती हो।