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जिले में इस वर्ष पी ओ से नियंत्रण रेखा पार कर आए आदा दर्जन से अधिक नाबालिग दो को छोड़ बाकी वतन लोटाए गए
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पुंछ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद को जिंदा रखने अब पीओके के नाबालिगों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। जो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। क्योंकि अगर नियंत्रण रेखा के उस पार से कोई नाबालिग घुसपैठ करने के बाद सुरक्षा बलों द्वारा पकड़ा जाता है तो वह भूल कर इस पार आने की बात करता है।
नाबालिग होने के कारण सुरक्षा बलों द्वारा उसके साथ ज्यादा सख्ती नहीं की जाती और उसे एक दो दिन के बाद तोहफे देकर इंसानियत के नाते उसके घर वापस भेजने के लिए नियंत्रण रेखा पर तैनात पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार नियंत्रण रेखा के उस पार से भारतीय क्षेत्र में आने वाले नाबालिगों के मामलों में एक दो प्रतिशत नाबालिग ऐसे होते हैं जो भूलवश इस पार आ जाते हैं। जबकि अधिकतर नाबालिगों को जानबूझ कर इस पार भेजा जाता है। इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की मंशा यह रहती है कि इस बात को सुनिश्चित करना यह नाबालिग कहां तक सुरक्षित पहुंच सकते हैं और किस रास्ते पर उन्हें किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हो रही है। उसी रास्ते से आतंकियों को घुसपैठ कराने का भविष्य में प्रयास किया जाता है।
हालांकि नियंत्रण रेखा पर तैनात सुरक्षा बलों की तरफ से पाक सेना और आईएसआई के नापाक इरादों को अकसर नाकाम बना दिया जाता है। अगर हम पुंछ में इस वर्ष में अभी तक पाकिस्तानी कब्जे वाले क्षेत्र से इस पार आने वाले नाबालिगों के मामलों की बात करें तो दस माह में अभी तक जिले में आधा दर्जन से अधिक नाबालिग भारतीय क्षेत्र में घुसने के बाद सुरक्षा बलों द्वारा पकड़े गए हैं। इनमें से दो को छोड़ कर अन्य सभी को एक या दो दिन के बाद सम्मान के साथ तोहफे देकर लोटाया जा चुका है। पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी के पीओके के नाबालिगों का प्रयोग किए जाने की सूत्रों से जानकारी मिल रही है।
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शुक्रवार को मेंढर की मनकोट तहसील के बलनोई क्षेत्र में सेना के जवानों ने घुसपैठ के बाद दबोचे गए नाबालिग अली हैदर के मामले से भी कहीं न कहीं इस बात की पुष्टि होती है कि पाक सेना और आईएसआई नाबालिगों का इस तरफ घुसपैठ के लिए प्रयोग कर रही है। क्योंकि अली हैदर गत वर्ष 31 दिसंबर को पुंछ नगर के बाहर बहने वाली बेतार नदी के किनारे से एसओजी ने पकड़ा था। उसे इसी वर्ष दो जनवरी को मासूम समझते हुए तोहफे दे कर चक्कां दा बाग के रास्ते पीओके लौटाया गया था।
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नाबालिग होने के कारण सुरक्षा बलों द्वारा उसके साथ ज्यादा सख्ती नहीं की जाती और उसे एक दो दिन के बाद तोहफे देकर इंसानियत के नाते उसके घर वापस भेजने के लिए नियंत्रण रेखा पर तैनात पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार नियंत्रण रेखा के उस पार से भारतीय क्षेत्र में आने वाले नाबालिगों के मामलों में एक दो प्रतिशत नाबालिग ऐसे होते हैं जो भूलवश इस पार आ जाते हैं। जबकि अधिकतर नाबालिगों को जानबूझ कर इस पार भेजा जाता है। इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की मंशा यह रहती है कि इस बात को सुनिश्चित करना यह नाबालिग कहां तक सुरक्षित पहुंच सकते हैं और किस रास्ते पर उन्हें किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हो रही है। उसी रास्ते से आतंकियों को घुसपैठ कराने का भविष्य में प्रयास किया जाता है।
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हालांकि नियंत्रण रेखा पर तैनात सुरक्षा बलों की तरफ से पाक सेना और आईएसआई के नापाक इरादों को अकसर नाकाम बना दिया जाता है। अगर हम पुंछ में इस वर्ष में अभी तक पाकिस्तानी कब्जे वाले क्षेत्र से इस पार आने वाले नाबालिगों के मामलों की बात करें तो दस माह में अभी तक जिले में आधा दर्जन से अधिक नाबालिग भारतीय क्षेत्र में घुसने के बाद सुरक्षा बलों द्वारा पकड़े गए हैं। इनमें से दो को छोड़ कर अन्य सभी को एक या दो दिन के बाद सम्मान के साथ तोहफे देकर लोटाया जा चुका है। पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी के पीओके के नाबालिगों का प्रयोग किए जाने की सूत्रों से जानकारी मिल रही है।
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शुक्रवार को मेंढर की मनकोट तहसील के बलनोई क्षेत्र में सेना के जवानों ने घुसपैठ के बाद दबोचे गए नाबालिग अली हैदर के मामले से भी कहीं न कहीं इस बात की पुष्टि होती है कि पाक सेना और आईएसआई नाबालिगों का इस तरफ घुसपैठ के लिए प्रयोग कर रही है। क्योंकि अली हैदर गत वर्ष 31 दिसंबर को पुंछ नगर के बाहर बहने वाली बेतार नदी के किनारे से एसओजी ने पकड़ा था। उसे इसी वर्ष दो जनवरी को मासूम समझते हुए तोहफे दे कर चक्कां दा बाग के रास्ते पीओके लौटाया गया था।