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नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल
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पुंछ। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने से जिले की नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के किसानों और आम लोगों में खुशी का माहौल है। इन लोगों का कहना है कि पहले उन्हें इस बात से डराया जाता था कि 370 हटने के बाद बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन, इन दो सालों में मुश्किलें कम हुई हैं।
स्थानीय लोगों ने कहा, जहां पहले गोलाबारी के कारण हम लोग खेतीबाड़ी नहीं कर पाते थे, वहीं अब हम लोग तारबंदी के आगे के खेतों में भी फसलें उगा पा रहे हैं। तारबंदी के आगे दो वर्षों से पहले सड़क निर्माण होने की हमें उम्मीद ही नहीं थी। अब सरकार तारबंदी के आगे बसे कस्बा, मंधार, नूरकोट, नक्कर कोट, बगयालदरा जैसे गांवों में भी सड़कों का निर्माण करा रही है। बंकरों के निर्माण का कार्य लगभग पूरा होने को है। इतना ही नहीं, नियंत्रण रेखा पर स्थित दिगवार मलदेयालां और दिगवार तेड़वां सहित एक दर्जन गांवों को आपस में जोड़ने वाले बेतार नदी पर बने झूला पुल की जगह अब पक्के पुल का निर्माण कराया जा रहा है। झूला पुल वर्ष 2014 में आई बाढ़ में बह गया था। उसके बदले दोबारा झूला पुल तक नहीं बनाया गया था। यह सब अनुच्छेद 370 हटने के बाद संभव हो सका है।
जिले के अधिकतर लोगों का कहना है कि उन लोगों को राजनैतिक स्वार्थ के लिए ही हमेशा अनुच्छेद 370 के पक्ष में खड़ा होने को उकसाया जाता था। कहा जाता था कि 370 के हटने से लोगों की जमीनें छिन जाएंगी। यहां बाहर के लोग जमीनें कब्जा लेंगे। लेकिन, दो वर्ष बीत जाने पर लोगों की जमीनें किसी ने नहीं छीनीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ, बल्कि उन्हें कई तरह के लाभ ही हो रहे हैं।
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स्थानीय लोगों ने कहा, जहां पहले गोलाबारी के कारण हम लोग खेतीबाड़ी नहीं कर पाते थे, वहीं अब हम लोग तारबंदी के आगे के खेतों में भी फसलें उगा पा रहे हैं। तारबंदी के आगे दो वर्षों से पहले सड़क निर्माण होने की हमें उम्मीद ही नहीं थी। अब सरकार तारबंदी के आगे बसे कस्बा, मंधार, नूरकोट, नक्कर कोट, बगयालदरा जैसे गांवों में भी सड़कों का निर्माण करा रही है। बंकरों के निर्माण का कार्य लगभग पूरा होने को है। इतना ही नहीं, नियंत्रण रेखा पर स्थित दिगवार मलदेयालां और दिगवार तेड़वां सहित एक दर्जन गांवों को आपस में जोड़ने वाले बेतार नदी पर बने झूला पुल की जगह अब पक्के पुल का निर्माण कराया जा रहा है। झूला पुल वर्ष 2014 में आई बाढ़ में बह गया था। उसके बदले दोबारा झूला पुल तक नहीं बनाया गया था। यह सब अनुच्छेद 370 हटने के बाद संभव हो सका है।
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जिले के अधिकतर लोगों का कहना है कि उन लोगों को राजनैतिक स्वार्थ के लिए ही हमेशा अनुच्छेद 370 के पक्ष में खड़ा होने को उकसाया जाता था। कहा जाता था कि 370 के हटने से लोगों की जमीनें छिन जाएंगी। यहां बाहर के लोग जमीनें कब्जा लेंगे। लेकिन, दो वर्ष बीत जाने पर लोगों की जमीनें किसी ने नहीं छीनीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ, बल्कि उन्हें कई तरह के लाभ ही हो रहे हैं।
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