पाकिस्तान के इशारे पर घाटी को अशांत करने की साजिश
- वार्ता रद्द करने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने की चाल
- अलगाववादियों के साथ ही आतंकियों के मददगारों की ली मदद
विस्तार
पाकिस्तान के इशारे पर घाटी में माहौल खराब करने की साजिश रची गई है। हंदवाड़ा को इसलिए चुना गया क्योंकि यह अलगाववादियों का गढ़ रहा है। रियासती सरकार में मंत्री सज्जाद गनी लोन भी यहीं से विधायक हैं और पूर्व में अलगाववादी नेता रहे हैं।
इस बात के इनपुट हैं कि पठानकोट हमले के बाद अपने को घिरता देख बातचीत से भाग रहे पाकिस्तान ने कश्मीर मामले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकृष्ट करने के लिए यह साजिश रची। इसके लिए अलगाववादियों के साथ ही घाटी में सक्रिय आतंकियों के मददगारों की भी मदद ली गई।
रियासत के डिप्टी सीएम डॉ. निर्मल कुमार सिंह भी मानते हैं कि पाकिस्तान रियासत में शांति प्रक्रिया को सिरे नहीं चढ़ना देना चाहता है। इस वजह से वह अलगाववादियों को हवा दे रहा है। हालांकि, राज्य सरकार पूरे मामले पर गंभीर है और पैनी नजर रखे हुए है।
कश्मीर में भड़की हिंसा के गहरे निहितार्थ हैं
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से वार्ता रद्द करने के बाद ही कश्मीर में भड़की हिंसा के गहरे निहितार्थ हैं। पाकिस्तान ने कश्मीर मसले के बिना बातचीत करने से इनकार किया था। इस वजह से हिंसा के लिए सेना को निशाना बनाया गया।
लंबे समय से घाटी से सेना को हटाने की मांग की जाती रही है। ताजा मामले में यह दिखाने की कोशिश की गई कि सेना के रहते घाटी में कश्मीरी सुरक्षित नहीं हैं। सुरक्षा बलों पर सोची समझी साजिश के तहत ही आक्रामक तरीके से हमला किया गया ताकि जवाबी कार्रवाई में मामला और बिगड़े।
पीडीपी नेता वहीद पारा का भी मानना है कि कश्मीर में पर्यटन के पीक सीजन में घाटी को अस्थिर करने की सोची समझी कोशिश की गई है। इसके पीछे कुछ लोगों का निहित स्वार्थ हो सकता है।
पत्थरबाज चिह्नित किए जा रहे
रियासती सरकार ने हाल की घटनाओं में शामिल युवाओं को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए इलाकेवार सूची तैयार करने को कहा गया है। सरकार किसी भी स्थिति से निबटने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। डिप्टी सीएम का कहना है कि माहौल बिगाड़ने वालों से सख्ती से निबटा जाएगा।