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कोख में पल रहे बारूद से ‘बंजर’ हो रही धरती
राघवेंद्र नारायण मिश्र
Updated Sat, 08 Jun 2013 12:40 AM IST
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जम्मू के बॉर्डर इलाके में धरती के कोख में बारूद पल रहा है। हजारों एकड़ जमीन के नीचे लैंड माइंस बिछे हैं जो अक्सर हादसे का कारण बनते रहते हैं।
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किसानों की जमीन परती है और बदले में उन्हें न तो किराया मिल रहा है और न ही मुआवजा। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों का प्रवेश रोकने के लिए बिछाए गए इन लैंड माइंस को अब तक हटाया नहीं गया है।
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उपमुख्यमंत्री ताराचंद ने उन बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री सुशील श़िदे से गुहार लगाई और अब विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल ने भी ऐसी ही गुजारिश की है। उधर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने इस बाबत संयुक्त राष्ट्र को रिपोर्ट सौंपी है।
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विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव क्षेत्र ईदगाह में लगभग 3540 एकड़ खेती की जमीन के नीचे बारूदी सुरंग बिछे हैं। इसी तरह उपमुख्यमंत्री ताराचंद के चुनाव क्षेत्र छंब में भी सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन इस दायरे में है। इन बारूदी सुरंगों की वजह से अब तक 800 लोग प्रभावित हुए।
इनमें से से कई लोगों की जानें गईं और कुछ घायल होकर विकलांग हो गए। लैंड माइन एंड क्लस्टर मुनीशन मोनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक इन बारूदी सुरंगों की संख्या चार से पांच लाख के बीच हो सकती है।
दुश्मन के कदम रोकने के लिए बिछाई गई बारूदी सुरंगें अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी के सबब बन गए हैं। युद्ध के दौरान तो इसकी जरूरत थी लेकिन अब इन्हें हटाने की मांगें जोर पकड़ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान बार्डर पर उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर 2880 किलोमीटर क्षेत्र में बिछी बारूदी सुरंगों से लगभग 6 हजार से अधिक परिवार और दर्जनों गांव प्रभावित हैं। जीवन यापन के लिए लकड़ियां जमा करने, भेड़ों को चराने और खेती के क्रम में अक्सर बारूदी सुरंगों के फटने की घटनाएं होती रहती हैं।
बारूदी सुरंगें प्रत्यक्ष तौर पर विस्फोट से घायल करती हैं और अप्रत्यक्ष तौर पर खेतों के बंजर होने से फसल का नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है। जम्मू संभाग में 160 वर्ग किलोमीटर और कश्मीर संभाग में 1730 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल बारूदी सुरंगों से प्रभावित है।
कब-कब बारूदी सुरंगों में विस्फोट
बारूदी सुरंगों में विस्फोट से 2007 में दक्षिणी कश्मीर के खुंदरू में छह लोगों की मौत हुई थी और 25 घायल हुए। उस साल बारूदी सुरंगों के विस्फोट ने 41 जानें लीं और 129 लोग घायल हुए।
मृतकों और घायलों में 81 सेना जवान और 89 सिविलियन शामिल थे। आठ बच्चे भी इनमें शुमार थे। इसी तरह 2006 में 41 लोगों की मौत हुई और 66 घायल हुए।
भेड़-बकरियों जैसे पालतू जानवर भी बारूदी सुरंगों के शिकार होते रहे हैं। रिपोर्ट कहती है कि 2008 में इन बारूदी सुरंगों में विस्फोट से 10 लोगों की जानें गईं और 18 घायल हुए।