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Kathua News: संतान की लंबी के साथ महिलाओं ने नदियों, तालाबों और बावलियों के किनारे की आराधना
Wed, 20 Aug 2025 02:02 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 20 Aug 2025 02:02 AM IST
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कठुआ में वत्सद्वादशी के अवसर पर पूजा करती महिलाएंसंवाद
कठुआ। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को संतान प्राप्ति एवं संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाने वाला वत्स द्वादशी का पर्व जिले में पूर्ण आस्था से मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने जलस्रोतों के सामने पर्व की पारंपरिक पूजा की। इसके चलते वहां दिन भर मेले जैसे माहौल देखने को मिला।
मंगलवार को शहर के मध्य बहने वाली नहर और प्राचीन बावलियों पर जुटी व्रती महिलाओं ने पारंपरिक पूजा की, और सामूहिक रूप से एकत्र होकर व्रत की कथा सुनी। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ यह क्रम शाम चार बजे तक जारी रहा। भारी संख्या में महिलाएं बैंड-बाजे के साथ पूरे परिवार को लेकर नहर के किनारे पहुंची हुई थीं। पूजन के उपरांत उन्होंने बच्चों को प्रसाद व खिलौने देकर अपनी खुशी का इजहार किया।
शहर की प्राचीन बावलियों पर पूजन की पंरपरा पूरी करने पहुंची महिलाओं में शामिल सीमा गुप्ता ने पर्व के संबंध में बताया कि वत्स द्वादशी व्रत एवं पूजन पुत्रवती महिलाएं अपने बेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ करती हैं। कुछ महिलाएं यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों का पर्व होता है। इस दिन बछड़े वाली गाय की पूजा कर कथा सुनी जाती है।
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इसी तरह से नगरी में महिलाओं ने वजूह नाले, लखनपुर में रावी दरिया के किनारे व आसपास के गावों में तालाबों पर जाकर पूजा की। वहीं, कुछ महिलाओं ने बेडियां पत्तन स्थित गौशाला में जाकर गाय और बछड़े का भी पूजन किया।
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मंगलवार को शहर के मध्य बहने वाली नहर और प्राचीन बावलियों पर जुटी व्रती महिलाओं ने पारंपरिक पूजा की, और सामूहिक रूप से एकत्र होकर व्रत की कथा सुनी। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ यह क्रम शाम चार बजे तक जारी रहा। भारी संख्या में महिलाएं बैंड-बाजे के साथ पूरे परिवार को लेकर नहर के किनारे पहुंची हुई थीं। पूजन के उपरांत उन्होंने बच्चों को प्रसाद व खिलौने देकर अपनी खुशी का इजहार किया।
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शहर की प्राचीन बावलियों पर पूजन की पंरपरा पूरी करने पहुंची महिलाओं में शामिल सीमा गुप्ता ने पर्व के संबंध में बताया कि वत्स द्वादशी व्रत एवं पूजन पुत्रवती महिलाएं अपने बेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ करती हैं। कुछ महिलाएं यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों का पर्व होता है। इस दिन बछड़े वाली गाय की पूजा कर कथा सुनी जाती है।
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इसी तरह से नगरी में महिलाओं ने वजूह नाले, लखनपुर में रावी दरिया के किनारे व आसपास के गावों में तालाबों पर जाकर पूजा की। वहीं, कुछ महिलाओं ने बेडियां पत्तन स्थित गौशाला में जाकर गाय और बछड़े का भी पूजन किया।