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विद्यार्थियों ने दो घंटे तक जाम रखा लखनपुर-बसोहली मार्ग
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अपनी मांगों को लेकर सड़क जाम कर प्रदर्शन करते विद्यार्थी। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। हायर सेकेंडरी का दर्जा मिलने के बाद भी तीन कमरों में चल रही कक्षाओं और कभी स्कूल आने, न आने के बीच विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। शिक्षा विभाग को उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का जिम्मेदार ठहराते हुए बसंतपुर हायर सेकेंडरी स्कूल के सैकड़ों विद्यार्थी वीरवार सुबह साढ़े सात बजे सड़क पर उतर आए। हायर सेकेंडरी स्कूल के लिए इमारत सहित अन्य आवश्यक व्यवस्था तत्काल किए जाने की मांग की गई। लगभग दो घंटे तक लखनपुर-बसोहली मार्ग को जाम रखा गया। इस दौरान मौके पर मुख्य शिक्षा अधिकारी के पहुंचने पर विद्यार्थी सड़क से उठने को तैयार हुए।
वीरवार सुबह साढ़े सात बजे के लगभग हायर सेकेंडरी स्कूल बसंतपुर के विद्यार्थी कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए सड़क पर उतर आए। स्कूल के सामने ही सड़क पर बैठे विद्यार्थियों ने जहां लखनपुर-बसोहली मार्ग को जाम कर दिया। वहीं, अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी भी की। शिक्षकों के समझाए जाने के बाद भी विद्यार्थी मुख्य शिक्षा अधिकारी के मौके पर पहुंचने की मांग पर अड़े रहे। मौके पर पहुंचीं डीडीसी सदस्य डॉ. श्वेता सिंह और स्थानीय सरपंच के आश्वासन पर भी विद्यार्थी धरना खत्म करने को तैयार नहीं हुए। इस दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
विद्यार्थियों ने दो टूक कहा कि चार साल पहले हायर सेकेंडरी स्कूल का दर्जा दिए जाने के बाद भी सुविधाएं नहीं दी गई हैं। हालात यह हैं कि 400 विद्यार्थियों की इनरोलमेंट वाले इस स्कूल में कक्षाएं तीन कमरों में चल रही हैं तो वहीं उन्हें बारिश के दौरान खुले में बैठने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में बारिश होने पर विद्यार्थी स्कूल नहीं आते। पाठ्यक्रम पिछड़ चुका है और रोटेशन के आधार पर कक्षाएं लगाकर खानापूर्ति की जा रही है। कभी-कभी स्कूल प्रबंधन 11वीं और 12वीं की कक्षाएं एक ही कमरें में लगा देता है। विद्यार्थियों ने दो टूक कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।
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मौके पर पहुंचे सीईओ कठुआ प्रकाश लाल थापा ने बताया कि नई इमारत के लिए प्रक्रिया जारी है। मामला संज्ञान में था कि यह नया अपग्रेड हायर सेकेंडरी है और यहां कमरों की समस्या है। दो बार पहले भी यहां दौरा किया और नौ कनाल 14 मरले जमीन चिह्नित की जा चुकी है।जमीन अधिग्रहीत कर ली गई है। सप्ताह भर में टेंडर लगवाए जा रहे हैं। दस कमरों की इमारत तैयार कराई जाएगी। डीडीसी सदस्य और सरपंच से बात कर अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। रेंट पर इमारत मिलने के बाद व्यवस्था करने के संबंध में विद्यार्थियों से बात की जा रही है। लेकिन इसमें लोगों के सहयोग की जरूरत रहेगी। नई इमारत बनने में समय लगता है तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कक्षाएं लगाई जाएंगी। स्कूल में 385 विद्यार्थियों की अबतक कॉरिडोर में कक्षाएं लगाई जाती हैं।
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श्रेया देवी ने बताया कि वे दो साल से इस स्कूल में पढ़ रही हैं। नौंवी में दाखिला लिया था। और पहले शिक्षा जहां कोरोना काल के चलते प्रभावित रही वहीं अब इमारत न होने से कक्षाएं नहीं लग पाती हैं। कभी बड़ी कक्षाओं के साथ विद्यार्थियों को बैठा दिया जाता है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
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सेजल चौधरी ने बताया कि उन्हें सड़क पर उतरने को मजबूर किया गया है। बरसात के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं आते क्योंकि उन्हें पता है कि कक्षा लगेगी ही नहीं। बीते दिन भी बारिश के बीच बच्चे मैदान में छाता लेकर दिन भर खड़ रहे और कोई व्यवस्था नहीं थी। धूप हो तो भी हालात खराब होते हैं। उच्च अधिकारियों को स्कूल को अपग्रेड करने से पहले सोचना चाहिए था।
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विशाल सिंह ने कहा कि चार साल से इमारत निर्माण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। कई बार डीसी कार्यालय से लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी के पास भी गुहार लगाई जा चुकी है। 15 अगस्त से पहले स्कूल में पहुंचे अधिकारियों ने सप्ताह भर के भीतर काम शुरू होने का आश्वासन दिया था। अभी कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
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पल्लवी शर्मा ने कहा कि स्कूल की इमारत भी खस्ताहाल होती जा रही है। एक-एक कक्षा में सौ-सौ विद्यार्थी बैठाए जाते हैं। 11वीं और 12वीं की कक्षाएं एक साथ लगाई जाती हैं। जिसमें 11वीं के बच्चों को 12वीं के पाठ्यक्रम का सुनने को मजबूर होना पड़ता है। आज मजबूरन उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा है।
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वीरवार सुबह साढ़े सात बजे के लगभग हायर सेकेंडरी स्कूल बसंतपुर के विद्यार्थी कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए सड़क पर उतर आए। स्कूल के सामने ही सड़क पर बैठे विद्यार्थियों ने जहां लखनपुर-बसोहली मार्ग को जाम कर दिया। वहीं, अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी भी की। शिक्षकों के समझाए जाने के बाद भी विद्यार्थी मुख्य शिक्षा अधिकारी के मौके पर पहुंचने की मांग पर अड़े रहे। मौके पर पहुंचीं डीडीसी सदस्य डॉ. श्वेता सिंह और स्थानीय सरपंच के आश्वासन पर भी विद्यार्थी धरना खत्म करने को तैयार नहीं हुए। इस दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
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विद्यार्थियों ने दो टूक कहा कि चार साल पहले हायर सेकेंडरी स्कूल का दर्जा दिए जाने के बाद भी सुविधाएं नहीं दी गई हैं। हालात यह हैं कि 400 विद्यार्थियों की इनरोलमेंट वाले इस स्कूल में कक्षाएं तीन कमरों में चल रही हैं तो वहीं उन्हें बारिश के दौरान खुले में बैठने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में बारिश होने पर विद्यार्थी स्कूल नहीं आते। पाठ्यक्रम पिछड़ चुका है और रोटेशन के आधार पर कक्षाएं लगाकर खानापूर्ति की जा रही है। कभी-कभी स्कूल प्रबंधन 11वीं और 12वीं की कक्षाएं एक ही कमरें में लगा देता है। विद्यार्थियों ने दो टूक कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।
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मौके पर पहुंचे सीईओ कठुआ प्रकाश लाल थापा ने बताया कि नई इमारत के लिए प्रक्रिया जारी है। मामला संज्ञान में था कि यह नया अपग्रेड हायर सेकेंडरी है और यहां कमरों की समस्या है। दो बार पहले भी यहां दौरा किया और नौ कनाल 14 मरले जमीन चिह्नित की जा चुकी है।जमीन अधिग्रहीत कर ली गई है। सप्ताह भर में टेंडर लगवाए जा रहे हैं। दस कमरों की इमारत तैयार कराई जाएगी। डीडीसी सदस्य और सरपंच से बात कर अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। रेंट पर इमारत मिलने के बाद व्यवस्था करने के संबंध में विद्यार्थियों से बात की जा रही है। लेकिन इसमें लोगों के सहयोग की जरूरत रहेगी। नई इमारत बनने में समय लगता है तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कक्षाएं लगाई जाएंगी। स्कूल में 385 विद्यार्थियों की अबतक कॉरिडोर में कक्षाएं लगाई जाती हैं।
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श्रेया देवी ने बताया कि वे दो साल से इस स्कूल में पढ़ रही हैं। नौंवी में दाखिला लिया था। और पहले शिक्षा जहां कोरोना काल के चलते प्रभावित रही वहीं अब इमारत न होने से कक्षाएं नहीं लग पाती हैं। कभी बड़ी कक्षाओं के साथ विद्यार्थियों को बैठा दिया जाता है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
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सेजल चौधरी ने बताया कि उन्हें सड़क पर उतरने को मजबूर किया गया है। बरसात के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं आते क्योंकि उन्हें पता है कि कक्षा लगेगी ही नहीं। बीते दिन भी बारिश के बीच बच्चे मैदान में छाता लेकर दिन भर खड़ रहे और कोई व्यवस्था नहीं थी। धूप हो तो भी हालात खराब होते हैं। उच्च अधिकारियों को स्कूल को अपग्रेड करने से पहले सोचना चाहिए था।
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विशाल सिंह ने कहा कि चार साल से इमारत निर्माण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। कई बार डीसी कार्यालय से लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी के पास भी गुहार लगाई जा चुकी है। 15 अगस्त से पहले स्कूल में पहुंचे अधिकारियों ने सप्ताह भर के भीतर काम शुरू होने का आश्वासन दिया था। अभी कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
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पल्लवी शर्मा ने कहा कि स्कूल की इमारत भी खस्ताहाल होती जा रही है। एक-एक कक्षा में सौ-सौ विद्यार्थी बैठाए जाते हैं। 11वीं और 12वीं की कक्षाएं एक साथ लगाई जाती हैं। जिसमें 11वीं के बच्चों को 12वीं के पाठ्यक्रम का सुनने को मजबूर होना पड़ता है। आज मजबूरन उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा है।