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कलश यात्रा के साथ हुआ श्रीमद् भगवत कथा का शुभारंभ
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माता बाला सुंदरी के मंदिर में श्रीमद भागवत कथा के शुभारंभ पर होने वाले कलश पूजन में श्रद्धालुओं क
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। नगरी कस्बा स्थित माता बाला सुंदरी के प्रांगण में वार्षिक होने वाली श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है। मंगलवार को मंदिर परिसर से ढोल नगाड़ों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
कलश यात्रा शामिल में श्रद्धालुओं ने कस्बे का भ्रमण करते हुए ऐरवां स्थित पवित्र बावलियों पर पूजा अर्चना एवं मंत्रोच्चारण किया। इसके बाद कलशों में बावली का पवित्र जल भर भजन कीर्तन करते हुए वापस मंदिर परिसर में पहुंचे। जहां विधि विधान से पूजा करते हुए कलशों की स्थापना की गई।
पहले दिन की कथा सुनाते हुए जम्मू कश्मीर के प्रसिद्ध संत सुभाष शास्त्री जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम स्कंद का वर्णन किया। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि भगवान शिव ने शुकदेव बनकर सारे संसार को भागवत कथा सुनाई। भागवत कथा का श्रवण करने वाला कोई व्यक्ति दुखी नहीं होता। अपितु इस कथा के श्रवण से साधक को अच्छे और बुरे कर्मों का ज्ञान होता है।
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उन्होंने उपस्थित श्रद्धालु से कहा कि भगवान श्री कृष्ण के ज्ञान से परिपूर्ण श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से चारित्रिक और नैतिक विकास होगा। जोकि लोगों को सद्गति की ओर ले जाता है। यही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। कथावाचक ने उपस्थित श्रद्धालुओं को पूरे सप्ताह चलने वाली इस कथा के दौरान कोरोना के नियमों का पालन करने के लिए कहा।
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कलश यात्रा शामिल में श्रद्धालुओं ने कस्बे का भ्रमण करते हुए ऐरवां स्थित पवित्र बावलियों पर पूजा अर्चना एवं मंत्रोच्चारण किया। इसके बाद कलशों में बावली का पवित्र जल भर भजन कीर्तन करते हुए वापस मंदिर परिसर में पहुंचे। जहां विधि विधान से पूजा करते हुए कलशों की स्थापना की गई।
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पहले दिन की कथा सुनाते हुए जम्मू कश्मीर के प्रसिद्ध संत सुभाष शास्त्री जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम स्कंद का वर्णन किया। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि भगवान शिव ने शुकदेव बनकर सारे संसार को भागवत कथा सुनाई। भागवत कथा का श्रवण करने वाला कोई व्यक्ति दुखी नहीं होता। अपितु इस कथा के श्रवण से साधक को अच्छे और बुरे कर्मों का ज्ञान होता है।
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उन्होंने उपस्थित श्रद्धालु से कहा कि भगवान श्री कृष्ण के ज्ञान से परिपूर्ण श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से चारित्रिक और नैतिक विकास होगा। जोकि लोगों को सद्गति की ओर ले जाता है। यही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। कथावाचक ने उपस्थित श्रद्धालुओं को पूरे सप्ताह चलने वाली इस कथा के दौरान कोरोना के नियमों का पालन करने के लिए कहा।