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भगवान राम को अपना आदर्श मानते हैं रामलीला के रावण
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बसोहली रामलीला मे रावण का रोल अदा करने वाले चंद्रशेखर बसोत्रा, फाइल फोटो।
- फोटो : KATHUA
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बसोहली। उपमंडल की ऐतिहासिक रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले चंद्रशेखर बसोत्रा अपने संवाद व दमदार अभिनय से लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं। उनका असर कुछ ऐसा है कि सीता हरण के दृश्यों को देखने के लिए दूरदराज इलाकों के अलावा बाहरी राज्यों से भी लोग बसोहली पहुंचते हैं।
चंद्रशेखर बसोत्रा ने बताया कि यह किरदार निभाकर उनका जीवन धन्य हो जाता है। जब भी हर वर्ष भगवान राम के बाण से रावण का वध होता है तो उन्हें मोक्ष की प्राप्ति जैसा अनुभव होता है। उन्होंने कहा, 16 वर्ष की आयु में जब मैं 11वीं कक्षा में पढ़ता था तब से रावण का किरदार निभाना शुरू किया है। आज इस किरदार को करते हुए 45 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि सीता हरण से लेकर राम से युद्ध करने से पूर्व तक रावण भगवान राम और माता सीता का मन ही मन आशीर्वाद लेने के लिए विनती करता है। अब वह रावण का किरदार छोड़ रहे हैं। इसके बाद नए कलाकारों को मौका दिया जा रहा है। रामलीला में रावण का किरदार सबसे कठिन है। रावण की वजह से ही श्री राम धरती पर अवतरित हुए थे।
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चंद्रशेखर ने कहा कि बसोहली की रामलीला तुलसीदास की लिखी हुई रामचरितमानस पर आधारित है। रामलीला मंचन के दौरान उनकी ठहाका लगाकर हंसी और दहाड़ती आवाज को सुनकर दर्शक बिना ताली बजाए रह नहीं पाते। उन्होंने बताया कि बेशक वह रावण का अभिनय कर रहे हैं, परंतु उनके दिल में श्री राम बसते हैं। अपने जीवन में वह भगवान राम को ही अपना आदर्श मानते हैं।
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चंद्रशेखर बसोत्रा ने बताया कि यह किरदार निभाकर उनका जीवन धन्य हो जाता है। जब भी हर वर्ष भगवान राम के बाण से रावण का वध होता है तो उन्हें मोक्ष की प्राप्ति जैसा अनुभव होता है। उन्होंने कहा, 16 वर्ष की आयु में जब मैं 11वीं कक्षा में पढ़ता था तब से रावण का किरदार निभाना शुरू किया है। आज इस किरदार को करते हुए 45 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि सीता हरण से लेकर राम से युद्ध करने से पूर्व तक रावण भगवान राम और माता सीता का मन ही मन आशीर्वाद लेने के लिए विनती करता है। अब वह रावण का किरदार छोड़ रहे हैं। इसके बाद नए कलाकारों को मौका दिया जा रहा है। रामलीला में रावण का किरदार सबसे कठिन है। रावण की वजह से ही श्री राम धरती पर अवतरित हुए थे।
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चंद्रशेखर ने कहा कि बसोहली की रामलीला तुलसीदास की लिखी हुई रामचरितमानस पर आधारित है। रामलीला मंचन के दौरान उनकी ठहाका लगाकर हंसी और दहाड़ती आवाज को सुनकर दर्शक बिना ताली बजाए रह नहीं पाते। उन्होंने बताया कि बेशक वह रावण का अभिनय कर रहे हैं, परंतु उनके दिल में श्री राम बसते हैं। अपने जीवन में वह भगवान राम को ही अपना आदर्श मानते हैं।