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डेंगू के डंक के पीड़ित गोविंदसर वासियों ने किया प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन
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कठुआ। डेंगू के मामलों में हो रहे इजाफे के बाद स्वास्थ्य विभाग के इंतजामों से निराश गोविंदसर वासियों ने कड़ा रोष जताया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे वार्ड 3 के पंच बलविंदर कुमार ने कहा कि आज उनके पंचायत में डेंगू जैसी बीमारी पनप रही है, तो इसके लिए प्रशासन ही जिम्मेदार है। गांव की गलियों और नालियों की दशा इतनी दयनीय है कि यहां सफाई रह पाना संभव ही नहीं है। जिसका नतीजा है कि पूरे गांव में सभी परिवारों में दो से चार लोग तेज बुखार से तप रहे हैं। मजदूर तबके के इन परिवारों के पास अपना महंगा इलाज कराने के पैसे नहीं हैं। ऐसे में मजबूरन वह नीम हकीमों का सहारा ले रहे हैं, और प्रशासन गहरी नींद सोया है।
वहीं, प्रदर्शन में शामिल रवि कुमार ने कहा कि जीएमसी कठुआ में जाने वाले मरीजों को भी वहां निशुल्क इलाज नहीं मिलता। जांच के लिए पहले तो लोगों को अलग से शुल्क जमा करना पड़ता है। जिसकी रिपोर्ट भी उन्हें तीन दिन बाद मिलती है। अस्पताल के पास मरीजों को देने के लिए दवाई नहीं हैं। ऐसे में वहां इलाज की आस लेकर जाने वाले लोगों के लिए डॉक्टरों की लिखी हजारों की दवाएं ले पाना संभव नहीं होता।
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ग्रामीण पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य विभाग की एक डिस्पेंसरी सहित एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन, वहां स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर केवल कोरोना टीकाकरण हो रहा है। अगर इन केंद्रों को विभाग सक्षम करे तो गांव में बीमार हुए लोगों का इलाज वहीं संभव है। नेता गांव में सिर्फ वोट लेने आते हैं। इस समय कोई नेता भी नहीं दिखाई देता। उन्होंने प्रशासन से गांव के लोगों को गांव में ही उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे वार्ड 3 के पंच बलविंदर कुमार ने कहा कि आज उनके पंचायत में डेंगू जैसी बीमारी पनप रही है, तो इसके लिए प्रशासन ही जिम्मेदार है। गांव की गलियों और नालियों की दशा इतनी दयनीय है कि यहां सफाई रह पाना संभव ही नहीं है। जिसका नतीजा है कि पूरे गांव में सभी परिवारों में दो से चार लोग तेज बुखार से तप रहे हैं। मजदूर तबके के इन परिवारों के पास अपना महंगा इलाज कराने के पैसे नहीं हैं। ऐसे में मजबूरन वह नीम हकीमों का सहारा ले रहे हैं, और प्रशासन गहरी नींद सोया है।
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वहीं, प्रदर्शन में शामिल रवि कुमार ने कहा कि जीएमसी कठुआ में जाने वाले मरीजों को भी वहां निशुल्क इलाज नहीं मिलता। जांच के लिए पहले तो लोगों को अलग से शुल्क जमा करना पड़ता है। जिसकी रिपोर्ट भी उन्हें तीन दिन बाद मिलती है। अस्पताल के पास मरीजों को देने के लिए दवाई नहीं हैं। ऐसे में वहां इलाज की आस लेकर जाने वाले लोगों के लिए डॉक्टरों की लिखी हजारों की दवाएं ले पाना संभव नहीं होता।
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ग्रामीण पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य विभाग की एक डिस्पेंसरी सहित एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। लेकिन, वहां स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर केवल कोरोना टीकाकरण हो रहा है। अगर इन केंद्रों को विभाग सक्षम करे तो गांव में बीमार हुए लोगों का इलाज वहीं संभव है। नेता गांव में सिर्फ वोट लेने आते हैं। इस समय कोई नेता भी नहीं दिखाई देता। उन्होंने प्रशासन से गांव के लोगों को गांव में ही उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है।