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लखीमपुर में किसानों की मौत पर जताया रोष
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हीरानगर में अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते किसान, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। बिजली बिल माफ करने और बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर मढ़ीन में किसानों का धरना सोमवार को भी जारी रहा। लखीमपुर हादसे पर भी किसानों ने रोष व्यक्त कर सरकार से मांग की है कि गाड़ी से किसानों को कुचलने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
किसान नेता शिवदेव सिंह ने कहा कि यहां किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उन्हें सहायता देने की बजाय उनकी मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं। किसानों को बिजली के मोटे बिल भेजे गए हैं, जिन्हें भरने में किसान पूरी तरह से असमर्थ हैं। लेकिन, उन्हें विद्युत विभाग परेशान कर रहा है। किसानों को पुलिस थानों में बुलाया जा रहा है। बिल न भरने पर मामले दर्ज कराने की धमकियां दी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने की बजाय किसानों पर दबाव बना रही है। 2014 और 2019 में बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा अब तक किसानों को नहीं मिला है। सरपंच राकेश चौधरी ने कहा कि किसान पहले ही कर्ज में डूबे हुए हैं। उन्हें आर्थिक सहायता देने की बजाय डराया धमकाया जा रहा है। किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बिजली बिल और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए कर्जे को माफ किया जाना चाहिए।
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इसी दौरान किसानों ने लखीमपुर में हुए हादसे में किसानों की मौत पर शोक व्यक्त कर उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा। केंद्र सरकार से मांग की है कि किसानों को गाड़ियों के नीचे कुचलने वाले लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। इस मौके पर धर्मपाल कुंडल, गरीब दास, कुलदीप कुमार, प्रदीप कुमार, आदि मौजूद रहे।
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किसान नेता शिवदेव सिंह ने कहा कि यहां किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उन्हें सहायता देने की बजाय उनकी मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं। किसानों को बिजली के मोटे बिल भेजे गए हैं, जिन्हें भरने में किसान पूरी तरह से असमर्थ हैं। लेकिन, उन्हें विद्युत विभाग परेशान कर रहा है। किसानों को पुलिस थानों में बुलाया जा रहा है। बिल न भरने पर मामले दर्ज कराने की धमकियां दी जा रही हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने की बजाय किसानों पर दबाव बना रही है। 2014 और 2019 में बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा अब तक किसानों को नहीं मिला है। सरपंच राकेश चौधरी ने कहा कि किसान पहले ही कर्ज में डूबे हुए हैं। उन्हें आर्थिक सहायता देने की बजाय डराया धमकाया जा रहा है। किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बिजली बिल और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए कर्जे को माफ किया जाना चाहिए।
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इसी दौरान किसानों ने लखीमपुर में हुए हादसे में किसानों की मौत पर शोक व्यक्त कर उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा। केंद्र सरकार से मांग की है कि किसानों को गाड़ियों के नीचे कुचलने वाले लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। इस मौके पर धर्मपाल कुंडल, गरीब दास, कुलदीप कुमार, प्रदीप कुमार, आदि मौजूद रहे।