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'सुपर एमिटर्स' पर बड़ा खुलासा: पंजाब में तीन लाख पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए चाहिए 15 सेंटर्स

Sat, 22 Aug 2026 11:07 AM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 22 Aug 2026 11:07 AM IST
सार

पंजाब में करीब 3 लाख ऐसे वाहन हैं जो स्क्रैपिंग के लिए योग्य हो सकते हैं। एक हालिया अध्ययन के ये आंकड़े राज्य स्तर पर नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत को दिखाता है। सर्वे में यह भी सामने आया कि 10 से 15 साल पुराने वाहन अभी भी अलग-अलग श्रेणियों में सड़कों पर चल रहे हैं। खासकर तीन-पहिया और वाणिज्यिक वाहनों में।

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Punjab Needs 15 Scrappage Facilities for 3 Lakh Vehicles to Tackle Super Emitters Says Study
Vehicle Air Pollution - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

थिंक-टैंक 'सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी' (CSTEP) द्वारा हाल ही में 'इंडिया क्लीन एयर समिट 2026' में जारी अध्ययन 'पाथवेज फॉर क्लीन ट्रांसपोर्टेशन इन पंजाब' के अनुसार, पंजाब में लगभग 3 लाख वाहन स्क्रैपिंग के योग्य हो चुके हैं।
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अध्ययन में खुलासा हुआ है कि राज्य के कुल वाहनों में से मात्र 11 से 28 प्रतिशत वाहन ही 'सुपर एमिटर्स' (SEs) यानी सामान्य से कई गुना अधिक प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की श्रेणी में आते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये कम संख्या वाले सुपर एमिटर्स पंजाब के कुल परिवहन उत्सर्जन का 70 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा पैदा करते हैं।
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पंजाब में वाहन स्क्रैपिंग के लिए कितने इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की जरूरत है?

3 लाख योग्य वाहनों का सुरक्षित निपटारा करने के लिए पंजाब को 15 क्रियाशील पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं (RVSFs) की आवश्यकता है:
  • मौजूदा स्थिति: वर्तमान में पंजाब में केवल 5 RVSFs ही संचालित हैं।
  • अतिरिक्त जरूरत: मांग को पूरा करने के लिए 10 और नए स्क्रैपिंग सेंटर स्थापित करने होंगे। जिसके लिए लगभग 140 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी।
  • रिमोट सेंसिंग यूनिट्स: औद्योगिक गलियारों और प्रमुख प्रवेश/निकास बिंदुओं पर रिमोट सेंसिंग यूनिट्स लगाकर उन्हें वाहन पोर्टल से जोड़ने से पीएम 2.5 (PM2.5) के स्तर में भारी कमी लाई जा सकती है। हर एक रिमोट सेंसिंग यूनिट्स को लगाने की लागत प्रति 2 करोड़ रुपये होगी।

Punjab Needs 15 Scrappage Facilities for 3 Lakh Vehicles to Tackle Super Emitters Says Study
Trucks - फोटो : Amar Ujala

भारी वाणिज्यिक वाहनों (HCVs) का प्रदूषण में कितना बड़ा योगदान है?

CSTEP में एयर क्वालिटी पॉलिसी की प्रमुख स्वागता डे के अनुसार, पंजाब ने ऑटो रिक्शा और यात्री वाहनों के विद्युतीकरण में अच्छी प्रगति की है। लेकिन पुराने भारी वाणिज्यिक वाहन (HCVs) अत्यधिक प्रदूषण फैला रहे हैं:
  • प्रदूषण का अनुपात: भारी वाणिज्यिक वाहन (HCVs) पंजाब के कुल वाहन बेड़े का महज 1.6 प्रतिशत हैं। लेकिन वे सालाना 2,102 टन पीएम 2.5 का उत्सर्जन करते हैं।
  • दोपहिया वाहनों की स्थिति: इसके विपरीत, दोपहिया वाहन राज्य के बेड़े का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। लेकिन वे प्रति वर्ष केवल 228 टन पीएम 2.5 उत्सर्जित करते हैं।
  • रेट्रोफिटिंग लागत: BS-IV भारी वाणिज्यिक वाहनों को रेट्रोफिट (अपग्रेड) करने की लागत प्रति वाहन लगभग 50,000 रुपये आंकी गई है।
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राज्य स्तर पर कड़े नियमों और नीतियों से क्या सुधार संभव है?

पटियाला, लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, मोगा और होशियारपुर में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि सड़कों पर चलने वाले 89 प्रतिशत वाहन पंजाब में ही पंजीकृत हैं।
  • लक्षित नीतियां: अध्ययन में कहा गया है कि पूरे बेड़े पर एक समान नियम लागू करने के बजाय केवल अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों (SEs) को चिन्हित कर कड़े निरीक्षण, स्क्रैपेज और रेट्रोफिटिंग पर ध्यान देना चाहिए।
  • क्षेत्रीय दृष्टिकोण: जिलों के बीच वाहनों की आवाजाही को देखते हुए केवल शहर-केंद्रित योजनाओं के बजाय राज्य-स्तरीय कड़े नियम, लो-मिशन जोन और 10 से 15 साल पुराने वाणिज्यिक वाहनों की कड़ाई से निगरानी से ही पंजाब के हवा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आ सकता है।
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