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सरकार विरोधी रैली निकालकर किया भारत बंद का समर्थन, मढीन में प्रदर्शन
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भारत बंद के समर्थन में रैली निकालते मजदूर। - संवाद।
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से भारत बंद की घोषणा के समर्थन में सोमवार को उपमंडल के विभिन्न इलाकों में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए।
भवन निर्माण कामगार यूनियन के बैनर तले मजदूरों ने ठंगर मोड़ से सांझी मोड़ तक रैली निकालकर नए कृषि कानूनों का विरोध कर उन्हें रद्द करने की मांग की। यूनियन के अध्यक्ष कामरेड राजकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार एक-एक कर जन विरोधी नीतियों को लागू कर रही है। कई महीनों से किसान कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जिसमें कई किसान अपनी जान भी गंवा चुके हैं। लेकिन, सरकार अपने ही देश के किसानों की समस्या सुनने की बजाय अड़ियल रवैया अपनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि न सिर्फ किसानों के खिलाफ, बल्कि मजदूरों के खिलाफ भी सरकार ने इसी तरह के कई कानून बनाए हैं। जिससे मजदूरों का भविष्य असुरक्षित हो गया है। 40 से भी अधिक श्रम कानूनों में बदलाव किया गया है, जो पूरी तरह से मजदूरों के खिलाफ और चंद पूंजीपतियों के हक में हैं। समय रहते अगर मजदूर और किसानों ने मिलकर सरकार की नीतियों का विरोध नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ी के लिए गुलामी लगभग तय है।
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वहीं, दूसरी तरफ मढीन में भी किसान नेता शिवदेव सिंह के नेतृत्व में कई किसानों ने तहसील मुख्यालय के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक काले कानून रद्द नहीं होंगे, किसानों के समर्थन में इसी तरह संघर्ष जारी रहेगा।
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भवन निर्माण कामगार यूनियन के बैनर तले मजदूरों ने ठंगर मोड़ से सांझी मोड़ तक रैली निकालकर नए कृषि कानूनों का विरोध कर उन्हें रद्द करने की मांग की। यूनियन के अध्यक्ष कामरेड राजकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार एक-एक कर जन विरोधी नीतियों को लागू कर रही है। कई महीनों से किसान कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जिसमें कई किसान अपनी जान भी गंवा चुके हैं। लेकिन, सरकार अपने ही देश के किसानों की समस्या सुनने की बजाय अड़ियल रवैया अपनाए हुए है।
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उन्होंने कहा कि न सिर्फ किसानों के खिलाफ, बल्कि मजदूरों के खिलाफ भी सरकार ने इसी तरह के कई कानून बनाए हैं। जिससे मजदूरों का भविष्य असुरक्षित हो गया है। 40 से भी अधिक श्रम कानूनों में बदलाव किया गया है, जो पूरी तरह से मजदूरों के खिलाफ और चंद पूंजीपतियों के हक में हैं। समय रहते अगर मजदूर और किसानों ने मिलकर सरकार की नीतियों का विरोध नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ी के लिए गुलामी लगभग तय है।
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वहीं, दूसरी तरफ मढीन में भी किसान नेता शिवदेव सिंह के नेतृत्व में कई किसानों ने तहसील मुख्यालय के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक काले कानून रद्द नहीं होंगे, किसानों के समर्थन में इसी तरह संघर्ष जारी रहेगा।