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कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर किया प्रदर्शन
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सरकार कर्मचारियों की लंबित मांगों को पूरा किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते लो-पेड इंपलाइज फ
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ लो पेड इंप्लाइज फेडरेशन ने कड़ा रोष जताया है। शुक्रवार को फेडरेशन के बैनर तले जमा हुए दर्जनों सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए गुस्से का इजहार किया, और कर्मचारियों की लंबित मांगों को पूरा किए जाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे फेडरेशन के प्रधान काबला सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद देश में महंगाई चरम पर है। इसके चलते लोगों का बजट खराब हो गया है। वहीं, सरकार लगातार कर्मचारियों का दोहन करने पर लगी हुई है। जम्मू कश्मीर में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जनवरी 2020 से रोका गया है, जोकि पूरी तरह से गलत है। जब सभी गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं, तो ऐसे में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोका जाना किसी भी तरह से न्याय संगत नहीं है। पूरे देश में कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता के नाम पर एक हजार रुपये दिए जाते हैं। लेकिन, जम्मू कश्मीर के कर्मचारियों को मात्र तीन सौ रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों को मकान का किराया, छुट्टी यात्रा रियायत जैसी सुविधाएं दिए जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हजारों कर्मचारी विभिन्न विभागों में अस्थायी हैं। उनको न तो पक्का किया जा रहा है और न ही उनका बकाया वेतन जारी किया जा रहा है। ऐसे में इन कर्मचारियों का जीवन यापन तक ठीक से नहीं हो पा रहा। विभिन्न विभागों में 20 साल की सेवाएं देने के बावजूद इन कर्मचारियों के हाथ आज भी खाली हैं। इसी तरह गांव में काम करने वाले विलेज गार्ड को जम्मू कश्मीर में मात्र 15 सौ रुपये दिए जा रहे है। जबकि, देश के अन्य राज्यों में उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है।
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काबला सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद सरकार ने बड़े जोर शोर से कहा था कि अब जम्मू कश्मीर को देश के अन्य राज्यों के समान सहूलियत मिलेगी। आज तक इस पर गौर नहीं किया गया। उल्टा कर्मचारियों का लगातार दोहन किया जा रहा है। इसका फेडरेशन विरोध करती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द कर्मचारियों की मांगों को पूरा किया जाए। अन्यथा आने वाले दिनों में इसके खिलाफ कर्मचारी संगठन एकजुट हो सकते हैं। वह स्थिति किसी भी हाल में अच्छी नहीं होगी।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे फेडरेशन के प्रधान काबला सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद देश में महंगाई चरम पर है। इसके चलते लोगों का बजट खराब हो गया है। वहीं, सरकार लगातार कर्मचारियों का दोहन करने पर लगी हुई है। जम्मू कश्मीर में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जनवरी 2020 से रोका गया है, जोकि पूरी तरह से गलत है। जब सभी गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं, तो ऐसे में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोका जाना किसी भी तरह से न्याय संगत नहीं है। पूरे देश में कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता के नाम पर एक हजार रुपये दिए जाते हैं। लेकिन, जम्मू कश्मीर के कर्मचारियों को मात्र तीन सौ रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों को मकान का किराया, छुट्टी यात्रा रियायत जैसी सुविधाएं दिए जाने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हजारों कर्मचारी विभिन्न विभागों में अस्थायी हैं। उनको न तो पक्का किया जा रहा है और न ही उनका बकाया वेतन जारी किया जा रहा है। ऐसे में इन कर्मचारियों का जीवन यापन तक ठीक से नहीं हो पा रहा। विभिन्न विभागों में 20 साल की सेवाएं देने के बावजूद इन कर्मचारियों के हाथ आज भी खाली हैं। इसी तरह गांव में काम करने वाले विलेज गार्ड को जम्मू कश्मीर में मात्र 15 सौ रुपये दिए जा रहे है। जबकि, देश के अन्य राज्यों में उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है।
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काबला सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद सरकार ने बड़े जोर शोर से कहा था कि अब जम्मू कश्मीर को देश के अन्य राज्यों के समान सहूलियत मिलेगी। आज तक इस पर गौर नहीं किया गया। उल्टा कर्मचारियों का लगातार दोहन किया जा रहा है। इसका फेडरेशन विरोध करती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द कर्मचारियों की मांगों को पूरा किया जाए। अन्यथा आने वाले दिनों में इसके खिलाफ कर्मचारी संगठन एकजुट हो सकते हैं। वह स्थिति किसी भी हाल में अच्छी नहीं होगी।