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सुध नहीं लेने पर मढ़ीन में फूटा किसानों का गुस्सा
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मांगों को लेकर मढ़ीन में धरना प्रर्दशन करते किसान। अमर उजाला
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। बारिश के कारण बर्बाद हुई धान की फसल का मुआवजा नहीं मिलने पर किसानों के सब्र का बांध फूट गया। उन्होंने सोमवार को मढ़ीन तहसील मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, जल्द मुआवजा देने और बीमा करने वाली रिलायंस कंपनी की जांच करने की भी मांग उठाई।
किसान नेता शिवदेव सिंह ने बताया कि किसानों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। इस बार बारिश में धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से कोई सुध लेने नहीं आया। बर्बाद फसल का जल्द मुआवजा मिले, जिसके लिए प्रदर्शन कर सरकार और प्रशासन को चेताया है।
नेंका नेता धर्मपाल कुंडल ने कहा केंद्र सरकार किसानों के साथ भद्दा मजाक कर रही है। एक ओर आय दोगुनी करने का वादा कर रही है और दूसरी ओर बर्बाद फसलों का मुआवजा नहीं मिल रहा है। पिछले तीन साल तक रिलायंस बीमा कंपनी ने किसानों के खातों से नियमित रूप से किस्तें काटीं, लेकिन अभी तक किसी को भी मुआवजा नहीं मिला है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने एक मांग पत्र तहसीलदार जितेंद्र सिंह को सौंपा और चेतावनी दी कि अगर मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा। प्रदर्शन में मक्खनी बंद्राल, घनश्याम शर्मा, प्रेम कुमार व रतन चंद आदि मौजूद रहे।
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किसान नेता शिवदेव सिंह ने बताया कि किसानों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। इस बार बारिश में धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से कोई सुध लेने नहीं आया। बर्बाद फसल का जल्द मुआवजा मिले, जिसके लिए प्रदर्शन कर सरकार और प्रशासन को चेताया है।
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नेंका नेता धर्मपाल कुंडल ने कहा केंद्र सरकार किसानों के साथ भद्दा मजाक कर रही है। एक ओर आय दोगुनी करने का वादा कर रही है और दूसरी ओर बर्बाद फसलों का मुआवजा नहीं मिल रहा है। पिछले तीन साल तक रिलायंस बीमा कंपनी ने किसानों के खातों से नियमित रूप से किस्तें काटीं, लेकिन अभी तक किसी को भी मुआवजा नहीं मिला है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने एक मांग पत्र तहसीलदार जितेंद्र सिंह को सौंपा और चेतावनी दी कि अगर मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा। प्रदर्शन में मक्खनी बंद्राल, घनश्याम शर्मा, प्रेम कुमार व रतन चंद आदि मौजूद रहे।