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मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के लिए चक्कर लगा रहे हैं दिव्यांग आवेदक
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सरकारी सहायता की आस में समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंचे दिव्यांग बोधराज। संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। भले ही सरकार ने समाज के हर तबके के उत्थान के लिए तरह-तरह की योजनाएं विभिन्न विभागों के माध्यम से चलाई हो। इन विभागों की कार्यप्रणाली के कारण आम लोगों तक सरकार की योजनाओं का यथोचित लाभ नहीं पहुंच रहा है। लोगों को संबंधित विभाग के चक्कर लगाना मजबूरी बना हुआ है। चाहे वह किसी भी अवस्था से जूझ रहा हो।
ऐसा ही दृश्य सोमवार को जिला सचिवालय स्थित समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में देखने को मिला जहां करीब एक साल से स्कूटी के लिए आवेदन किए जाने के बावजूद एक दिव्यांग को अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए स्कूटी चक्कर लगाना पड़ रहा है। विभाग के जिला कार्यालय में पहुंचे पैरों से दिव्यांग हीरानगर के परांगली निवासी बोधराज ने बताया कि पैरों के न काम कर पाने के कारण वह कोई काम नहीं कर सकते हैं। इसी को देखते हुए उन्होंने करीब एक वर्ष पूर्व समाज कल्याण विभाग में सरकार द्वारा प्रदान की जा रही स्कूटी के लिए आवेदन किया था। ताकि वह इसके माध्यम से अपने रोजी रोटी के लिए कोई छोटा मोटा काम करेंगे। अभी तक विभाग की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिल पाई है। इससे वह काफी निराशा हैं।
उन्होंने कहा कि पैरों से पूरी तरह से दिव्यांग होने के कारण उन्हें अपने गांव से समाज कल्याण विभाग के जिला कार्यालय में आने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उम्मीद करते हैं कि विभाग के अधिकारी उनकी इस परेशानी को देखते हुए जल्द कोई रास्ता निकाल कर उनकी सहायता करेंगे। ताकि वह भी अपने लिए कोई कामकाज कर सके।
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इस संबंध में जिला के समाज कल्याण अधिकारी अब्दुल रहीम की माने तो पुर्नवास परिषद के माध्यम से चलाई जाने वाली इस योजना के तहत हर ऐसे दिव्यांग को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जानी है। जिनके शरीर का ऊपरी भाग पूरी तरह से स्वथ्य है। पहले आओ पहले पहले पाओ के आधार पर चल रही इस योजना का लाभ लेने के लिए जिला भर से 185 आवेदन विभाग के पास आए हैं। जिसमें बोधराज का आवेदन संख्या 147 है। सरकार जैसे-जैसे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध करा रही है आवेदन कर्ताओं को वितरित भी किया जा रहा है।
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ऐसा ही दृश्य सोमवार को जिला सचिवालय स्थित समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में देखने को मिला जहां करीब एक साल से स्कूटी के लिए आवेदन किए जाने के बावजूद एक दिव्यांग को अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए स्कूटी चक्कर लगाना पड़ रहा है। विभाग के जिला कार्यालय में पहुंचे पैरों से दिव्यांग हीरानगर के परांगली निवासी बोधराज ने बताया कि पैरों के न काम कर पाने के कारण वह कोई काम नहीं कर सकते हैं। इसी को देखते हुए उन्होंने करीब एक वर्ष पूर्व समाज कल्याण विभाग में सरकार द्वारा प्रदान की जा रही स्कूटी के लिए आवेदन किया था। ताकि वह इसके माध्यम से अपने रोजी रोटी के लिए कोई छोटा मोटा काम करेंगे। अभी तक विभाग की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिल पाई है। इससे वह काफी निराशा हैं।
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उन्होंने कहा कि पैरों से पूरी तरह से दिव्यांग होने के कारण उन्हें अपने गांव से समाज कल्याण विभाग के जिला कार्यालय में आने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उम्मीद करते हैं कि विभाग के अधिकारी उनकी इस परेशानी को देखते हुए जल्द कोई रास्ता निकाल कर उनकी सहायता करेंगे। ताकि वह भी अपने लिए कोई कामकाज कर सके।
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इस संबंध में जिला के समाज कल्याण अधिकारी अब्दुल रहीम की माने तो पुर्नवास परिषद के माध्यम से चलाई जाने वाली इस योजना के तहत हर ऐसे दिव्यांग को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जानी है। जिनके शरीर का ऊपरी भाग पूरी तरह से स्वथ्य है। पहले आओ पहले पहले पाओ के आधार पर चल रही इस योजना का लाभ लेने के लिए जिला भर से 185 आवेदन विभाग के पास आए हैं। जिसमें बोधराज का आवेदन संख्या 147 है। सरकार जैसे-जैसे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध करा रही है आवेदन कर्ताओं को वितरित भी किया जा रहा है।