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जिले में शुरू हुआ धान की रोपाई का काम
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कठुआ के निचले इलाके में धान की रोपाई करते किसान। संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। पिछले दो सालों में संभाग में सबसे ज्यादा धान उत्पादन का रिकार्ड बनाने वाले जिला में एक बार फिर से धान की रोपाई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। पहले दौर की रोपाई के काम में जिला के अंधड क्षेत्र के किसान पूरी मुस्तैदी से लगे हुए है। इससे गेहूं की कटाई के बाद वीरान दिखने वाले खेतों में एक बार फिर रौनक दिखने लगी है।
शहर से सटे चंगे दा बाग, भागथली, कीड़ियां गंडयाल, चन्नग्रां, खोल्याल, जखबड़ और नगरी से सटे इलाके में किसान भीषण गर्मी की परवाह छोड़ कर भरी दोपहर मेें धान की रोपाई कर रहे हैं। इन इलाकों के किसान अबकी बार समय से पहले होने वाली बारिश की संभावना को देखते हुए काफी उत्साहित हैं और बारिश शुरू होने से पहले रोपाई का काम पूर करने में लगे हैं। रोपाई के इस काम को पूरा करने में किसानों की सबसे बड़ी समस्या मजदूरों का अभाव आ रहा है। इलाके में ज्यादातर छोटे किसान है जो कि धान की खेती के लिए पारंपरिक रोपाई को ही प्राथमिकता देते है।
इस बारे में किसान राजवीर सिंह की माने तो जिला में करीब 28 हजार 908 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। इससे करीब 30 हजार किसान जुड़े है। पिछले कुछ वर्षों में इन किसानों ने कड़ी मेहनत कर धान के उत्पादन को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया है। जिसकी नतीजा रहा कि वर्ष 2020 के बाद से उत्पादन काफी तेजी से बढ़ा। उन्होंने बताया कि धान की फसल के सिंचाई का सबसे महत्वपूर्ण किरदार है लेकिन इसे प्रभावी बनाने वाली कूलों की सिंचाई विभाग द्वारा न मरम्मत की जाती है और न ही सफाई के लिए कोई प्रावधान रखा गया है। गत वर्ष बारिश के कारण सैकड़ों किसानों को हजारों कुंतल धान बारिश की भेंट चढ़ गया था। जिसका उन्हें कोई मुआवजा भी नही मिला है। मजबूर किसानों ने अब एक फिर इलाके में बासमती धान लगाने की शुरूआत इस आस में कर दी है कि फसल तैयार होने के बाद वह उसे निजी डीलरों को बेच पाएंगे।
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जिले में धान का उत्पादन पिछले दो सालों से मानक के अनुरूप ही हो रहा है, जिसे अब और ज्यादा बढ़ाने की संभावना फिलहाल नहीं है। लेकिन किसान के उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए विभाग हर संभव यत्न कर रहा है। जिसमें किसानों को उन्नत बीच उपलब्ध कराने के साथ फसल के उपचार की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा आवश्यकता के अनुरूप किसानों को खाद व दवाएं उपलब्ध कराने लिए विभाग लगातार काम कर रहा है।
राजू महाजन, जिला क़ृषि अधिकारी( एक्सटेंशन)
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शहर से सटे चंगे दा बाग, भागथली, कीड़ियां गंडयाल, चन्नग्रां, खोल्याल, जखबड़ और नगरी से सटे इलाके में किसान भीषण गर्मी की परवाह छोड़ कर भरी दोपहर मेें धान की रोपाई कर रहे हैं। इन इलाकों के किसान अबकी बार समय से पहले होने वाली बारिश की संभावना को देखते हुए काफी उत्साहित हैं और बारिश शुरू होने से पहले रोपाई का काम पूर करने में लगे हैं। रोपाई के इस काम को पूरा करने में किसानों की सबसे बड़ी समस्या मजदूरों का अभाव आ रहा है। इलाके में ज्यादातर छोटे किसान है जो कि धान की खेती के लिए पारंपरिक रोपाई को ही प्राथमिकता देते है।
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इस बारे में किसान राजवीर सिंह की माने तो जिला में करीब 28 हजार 908 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। इससे करीब 30 हजार किसान जुड़े है। पिछले कुछ वर्षों में इन किसानों ने कड़ी मेहनत कर धान के उत्पादन को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया है। जिसकी नतीजा रहा कि वर्ष 2020 के बाद से उत्पादन काफी तेजी से बढ़ा। उन्होंने बताया कि धान की फसल के सिंचाई का सबसे महत्वपूर्ण किरदार है लेकिन इसे प्रभावी बनाने वाली कूलों की सिंचाई विभाग द्वारा न मरम्मत की जाती है और न ही सफाई के लिए कोई प्रावधान रखा गया है। गत वर्ष बारिश के कारण सैकड़ों किसानों को हजारों कुंतल धान बारिश की भेंट चढ़ गया था। जिसका उन्हें कोई मुआवजा भी नही मिला है। मजबूर किसानों ने अब एक फिर इलाके में बासमती धान लगाने की शुरूआत इस आस में कर दी है कि फसल तैयार होने के बाद वह उसे निजी डीलरों को बेच पाएंगे।
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जिले में धान का उत्पादन पिछले दो सालों से मानक के अनुरूप ही हो रहा है, जिसे अब और ज्यादा बढ़ाने की संभावना फिलहाल नहीं है। लेकिन किसान के उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए विभाग हर संभव यत्न कर रहा है। जिसमें किसानों को उन्नत बीच उपलब्ध कराने के साथ फसल के उपचार की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा आवश्यकता के अनुरूप किसानों को खाद व दवाएं उपलब्ध कराने लिए विभाग लगातार काम कर रहा है।
राजू महाजन, जिला क़ृषि अधिकारी( एक्सटेंशन)