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शक्ति क्षेत्र की सीमा में पहुंचते ही होता है ऊर्जा का संचार
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बसोहली। चंचलो माता के दरबार में हर भक्त पर कृपा बरसती है। शक्ति क्षेत्र की सीमा में पहुंचत ही भक्तों ऊर्जा का संचार होता है। मां चैंचलो पहाड़ पर परम दिव्य रूप में विराजमान हैं। माता कई लोगों की कुलदेवी भी हैं। इस देवीधाम का महत्व किसी शक्तिपीठ से कम नहीं है।
बसोहली से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ पर एक किले में मां चंचलो देवी का पौराणिक मंदिर है। किले का निर्माण राजा भूपत पाल ने 17वीं शताब्दी में करवाया था। मंदिर में माता के दो शेरों की प्रतिमाएं और शिवलिंग भी है। मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से कई देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
54 सीढ़ियां पार करने के बाद होते हैं मां के दर्शन
मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 54 सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। मंदिर तक सड़क भी है, जहां से वाहनों के जरिये पहुंचा जा सकता है। यहां पर दो पहिया और चार पहिया वाहन से पहुंचा जा सकता है। बसोहली से यह मंदिर करीब साढ़े चार किलोमीटर दूर है। इसके अलावा एक पुराना रास्ता भी है।
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मंदिर से दिखता है बसोहली कस्बा, अटल सेतु
मंदिर के पुजारी शिव कुमार पाधा के अनुसार चंचलो देवी का मंदिर काफी पुराना है। मां के प्रति लोगों की अपार आस्था है। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर से अटल सेतु, रंजीत सागर झील, टापू पर स्थित चामुंडा देवी मंदिर और बसोहली नगर का नजारा देखने को मिलता है।
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बसोहली से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ पर एक किले में मां चंचलो देवी का पौराणिक मंदिर है। किले का निर्माण राजा भूपत पाल ने 17वीं शताब्दी में करवाया था। मंदिर में माता के दो शेरों की प्रतिमाएं और शिवलिंग भी है। मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से कई देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
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54 सीढ़ियां पार करने के बाद होते हैं मां के दर्शन
मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 54 सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। मंदिर तक सड़क भी है, जहां से वाहनों के जरिये पहुंचा जा सकता है। यहां पर दो पहिया और चार पहिया वाहन से पहुंचा जा सकता है। बसोहली से यह मंदिर करीब साढ़े चार किलोमीटर दूर है। इसके अलावा एक पुराना रास्ता भी है।
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मंदिर से दिखता है बसोहली कस्बा, अटल सेतु
मंदिर के पुजारी शिव कुमार पाधा के अनुसार चंचलो देवी का मंदिर काफी पुराना है। मां के प्रति लोगों की अपार आस्था है। पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर से अटल सेतु, रंजीत सागर झील, टापू पर स्थित चामुंडा देवी मंदिर और बसोहली नगर का नजारा देखने को मिलता है।