बसोहली। बसोहली से करीब चार किलोमीटर दूर एक पहाड़ पर बसा चंचलो देवी मंदिर पौराणिक होने के साथ प्रमुख भी हैं। यह मंदिर एक किले में स्थित है, जिसे राजा भूपत पाल ने 17वीं शताब्दी में बनवाया था। बाकी निर्माण कार्य इस मंदिर के पुजारियों ने कराया।
मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 54 सीढ़ियों का रास्ता पार करना पड़ता है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क भी है, जहां से वाहनों से पहुंचा जा सकता है। मंदिर के पुजारी शिव कुमार पाधा बताते हैं कि पहाड़ों पर स्थित चंचलो देवी का मंदिर राजाओं के समय का है। इसके लिए धीरे-धीरे भक्तों की श्रद्धा उमड़ी, और आज यह देवी स्थान एक बड़ा तीर्थ बन गया है। मंदिर पहाड़ की चोटी पर इतनी ऊंचाई पर स्थित है कि यहां से अटल सेतु, रंजीत सागर झील, झील के मध्य टापू पर स्थित चामुंडा देवी मंदिर और पूरे बसोहली नगर का मनमोहक दृश्य साफ देखा जा सकता है। चंचलो माता को कई लोग कुलदेवी के रूप में भी पूजते हैं।