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Kathua News: मेघनाद के छल पर हनुमान पड़े भारी, संजीवनी ला मूर्छित लक्ष्मण की लौटाई सांसें
Wed, 25 Oct 2023 12:13 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 25 Oct 2023 12:13 AM IST
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विश्व प्रसिद्ध बसोहली रामलीला को देखने के लिए पहुंचे करीब पांच हजार दर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी
बसोहली। विश्व प्रसिद्ध बसोहली रामलीला को देखने के लिए पांच हजार से ज्यादा दर्शक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेघनाद के छल पर हनुमान के भारी पड़ने और संजीवनी ला कर लक्ष्मण को जिंदा करने के दृश्यों के मंचन का लुत्फ उठाया।
मेघनाद ने मायावी युद्ध के जरिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। यह दृश्य लोगों के दिल को छू गया। वहीं, लक्ष्मण को स्वस्थ करने के लिए हनुमान सुषेण वैध को लंका से चारपाई समेत उठा लाए। इसके बाद वैध लक्ष्मण के स्वास्थ्य की जांच कर हनुमान से मंदराचल पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं। हनुमान को संजीवनी बूटी की पहचान नहीं होने पर वह पूरा पर्वत उठाकर ले आते हैं। हनुमान द्वारा आकाश मार्ग से संजीवनी बूटी लाने से पूर्व रामलीला मैदान में हनुमान जी से आशीर्वाद ग्रहण करने के दृश्य का भव्य मंचन किया गया।
रावण अपने भाई विभीषण को दरबार से निकाल देता है। समुद्र की पूजा के बाद सेतु का निर्माण नील द्वारा किया जाता है।सेतु बनने के बाद राम की सेना लंका में प्रवेश कर जाती है। राम की ओर से संधि करने के लिए बालि का पुत्र अंगद लंका में रावण के दरबार पहुंचता है। यहां अंगद रावण को समझने का भरपूर प्रयास करता है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं होती है। इस पर अंगद ने कहा कि अगर कोई मेरा पैर धरती से उखाड़ देगा तो प्रभु राम आज ही सेना लेकर लौट जाएंगे। सभी दरबारियों ने जोर लगाया, लेकिन कोई पैर को हिला नहीं सका। अंगद वापस राम के पास आ गए और सारा वृत्तांत सुनाया। लंका में रावण ने अपने सेनापतियों को हर प्रवेश द्वार पर सेवा के साथ तैनात कर जरूरी जिम्मेदारियां सौंपी। मेघनाद ने युद्ध के दौरान शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया, जिससे राम व सेना मायूस हो गई। विभीषण के परामर्श पर हनुमान सुषेण वेद को चारपाई समेत उठाकर लाते हैं। सुषेण वैध राम को बताते हैं कि लक्ष्मण को गहरा घाव लगा है। इन्हें बचाने का एक ही उपाय है। मंदराचल पर्वत से संजीवनी बूटी अगर सूर्य उदय से पूर्व लाई जाए तो प्राण बच सकते हैं। हनुमान जब संजीवनी बूटी का पहाड़ लेकर आ रहे होते हैं तो रास्ते में भरत ने बाण मारकर उन्हें घायल कर दिया। जब उन्हें पता लगा कि यह राम सेवक हनुमान है और लक्ष्मण के प्राण संकट में है, तो उन्होंने हनुमान को गति देने के लिए दिव्य बाण के जरिए समय पूर्व वहां पहुंचा दिया।
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150 मीटर की ऊंचाई पर बांधा जाता है लोहे का रस्सा
हनुमान द्वारा आकाश मार्ग से संजीवनी बूटी लाने का जो दृश्य मंचित किया गया उसके लिए बसोहली किले के एक हिस्से पर लोहे के गार्डर से लोहे का रस्सा बांधा जाता है। रामलीला मैदान से उसकी लंबाई और ऊंचाई करीब डेढ़ सौ मीटर की रहती है। पार्षद अनिल वसोतरा बताते हैं कि यह सीन मंचित करने से पूर्व सभी प्रबंध पुख्ता किए जाते हैं। इस रस्सी के सहारे हनुमान रामलीला मैदान में एक हाथ में पहाड़ और दूसरे हाथ में रस्सी से आगे बढ़ते हैं। जब संजीवनी बूटी का पहाड़ लाते वक्त हनुमान आकाश मार्ग से आते हैं तो पूरा मैदान जय श्री राम और बजरंगबली के नारों से गूंज उठता है। सुषेण वैद्य हनुमान लाई गई संजीवनी बूटी का लेप बनाकर लक्ष्मण के घाव पर लगाते हैं उसके बाद लक्ष्मण ठीक हो जाते हैं।
तारिक जावेद ने निभाया सुषेण वैध का किरदार
विश्व प्रसिद्ध बसोहली की रामलीला आपसी भाईचारे और सौहार्द की मिसाल है। साउंड सिस्टम संभालने के साथ-साथ तारीक जावेद सुषेण वैध के किरदार में मूर्छित लक्ष्मण के घाव संजीवनी बूटी का लेप लगाकर जान फूंक देते हैं। तारीख ने बताया कि यह किरदार बहुत ही आकर्षित करता है। मुझे हर किरदार अदा करने में मजा आता है, लेकिन साउंड सिस्टम संभालने के कारण मैं केवल एक ही रोल कर पाता हूं। उन्होंने सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह मैं रामलीला में अपनी सेवाएं दे रहा हूं वैसे अन्य लोग भी सामने आए और मिलकर काम करें। धार्मिक सौहार्द और भाईचारे के लिए काम करें।
सीता माता की सेवा को अपना परम सौभाग्य मानते हैं मुदस्सिर
रामलीला में मुस्लिम समुदाय के मुदस्सिर सीता के किरदार शुरू होने से लेकर खत्म होने तक उनके साथ रहते हैं। उनकी सेवा करते हैं। मंचन खत्म होने के बाद सीता को घर तक छोड़ने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। बताते हैं कि उन्हें यह कार्य करने में बड़ा आनंद आता है। वह सदैव माता सीता के चरणों में ही रहकर सेवा करना चाहते हैं और इसे भी अपना परम सौभाग्य मानते हैं। पेशे में जलशक्ति विभाग के जेई अनूप शर्मा रामलीला में किरदार अदा करने वाले सभी कलाकारों को तैयार करते हैं। नवरात्र के दौरान वह अपनी ड्यूटी भी निभाते हैं। दिन में ड्यूटी निभाने के बाद रात के समय वह रामलीला में अपनी सेवाएं देते हैं और कलाकारों को तैयार करते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बसोहली। विश्व प्रसिद्ध बसोहली रामलीला को देखने के लिए पांच हजार से ज्यादा दर्शक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेघनाद के छल पर हनुमान के भारी पड़ने और संजीवनी ला कर लक्ष्मण को जिंदा करने के दृश्यों के मंचन का लुत्फ उठाया।
मेघनाद ने मायावी युद्ध के जरिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। यह दृश्य लोगों के दिल को छू गया। वहीं, लक्ष्मण को स्वस्थ करने के लिए हनुमान सुषेण वैध को लंका से चारपाई समेत उठा लाए। इसके बाद वैध लक्ष्मण के स्वास्थ्य की जांच कर हनुमान से मंदराचल पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं। हनुमान को संजीवनी बूटी की पहचान नहीं होने पर वह पूरा पर्वत उठाकर ले आते हैं। हनुमान द्वारा आकाश मार्ग से संजीवनी बूटी लाने से पूर्व रामलीला मैदान में हनुमान जी से आशीर्वाद ग्रहण करने के दृश्य का भव्य मंचन किया गया।
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रावण अपने भाई विभीषण को दरबार से निकाल देता है। समुद्र की पूजा के बाद सेतु का निर्माण नील द्वारा किया जाता है।सेतु बनने के बाद राम की सेना लंका में प्रवेश कर जाती है। राम की ओर से संधि करने के लिए बालि का पुत्र अंगद लंका में रावण के दरबार पहुंचता है। यहां अंगद रावण को समझने का भरपूर प्रयास करता है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं होती है। इस पर अंगद ने कहा कि अगर कोई मेरा पैर धरती से उखाड़ देगा तो प्रभु राम आज ही सेना लेकर लौट जाएंगे। सभी दरबारियों ने जोर लगाया, लेकिन कोई पैर को हिला नहीं सका। अंगद वापस राम के पास आ गए और सारा वृत्तांत सुनाया। लंका में रावण ने अपने सेनापतियों को हर प्रवेश द्वार पर सेवा के साथ तैनात कर जरूरी जिम्मेदारियां सौंपी। मेघनाद ने युद्ध के दौरान शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया, जिससे राम व सेना मायूस हो गई। विभीषण के परामर्श पर हनुमान सुषेण वेद को चारपाई समेत उठाकर लाते हैं। सुषेण वैध राम को बताते हैं कि लक्ष्मण को गहरा घाव लगा है। इन्हें बचाने का एक ही उपाय है। मंदराचल पर्वत से संजीवनी बूटी अगर सूर्य उदय से पूर्व लाई जाए तो प्राण बच सकते हैं। हनुमान जब संजीवनी बूटी का पहाड़ लेकर आ रहे होते हैं तो रास्ते में भरत ने बाण मारकर उन्हें घायल कर दिया। जब उन्हें पता लगा कि यह राम सेवक हनुमान है और लक्ष्मण के प्राण संकट में है, तो उन्होंने हनुमान को गति देने के लिए दिव्य बाण के जरिए समय पूर्व वहां पहुंचा दिया।
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150 मीटर की ऊंचाई पर बांधा जाता है लोहे का रस्सा
हनुमान द्वारा आकाश मार्ग से संजीवनी बूटी लाने का जो दृश्य मंचित किया गया उसके लिए बसोहली किले के एक हिस्से पर लोहे के गार्डर से लोहे का रस्सा बांधा जाता है। रामलीला मैदान से उसकी लंबाई और ऊंचाई करीब डेढ़ सौ मीटर की रहती है। पार्षद अनिल वसोतरा बताते हैं कि यह सीन मंचित करने से पूर्व सभी प्रबंध पुख्ता किए जाते हैं। इस रस्सी के सहारे हनुमान रामलीला मैदान में एक हाथ में पहाड़ और दूसरे हाथ में रस्सी से आगे बढ़ते हैं। जब संजीवनी बूटी का पहाड़ लाते वक्त हनुमान आकाश मार्ग से आते हैं तो पूरा मैदान जय श्री राम और बजरंगबली के नारों से गूंज उठता है। सुषेण वैद्य हनुमान लाई गई संजीवनी बूटी का लेप बनाकर लक्ष्मण के घाव पर लगाते हैं उसके बाद लक्ष्मण ठीक हो जाते हैं।
तारिक जावेद ने निभाया सुषेण वैध का किरदार
विश्व प्रसिद्ध बसोहली की रामलीला आपसी भाईचारे और सौहार्द की मिसाल है। साउंड सिस्टम संभालने के साथ-साथ तारीक जावेद सुषेण वैध के किरदार में मूर्छित लक्ष्मण के घाव संजीवनी बूटी का लेप लगाकर जान फूंक देते हैं। तारीख ने बताया कि यह किरदार बहुत ही आकर्षित करता है। मुझे हर किरदार अदा करने में मजा आता है, लेकिन साउंड सिस्टम संभालने के कारण मैं केवल एक ही रोल कर पाता हूं। उन्होंने सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह मैं रामलीला में अपनी सेवाएं दे रहा हूं वैसे अन्य लोग भी सामने आए और मिलकर काम करें। धार्मिक सौहार्द और भाईचारे के लिए काम करें।
सीता माता की सेवा को अपना परम सौभाग्य मानते हैं मुदस्सिर
रामलीला में मुस्लिम समुदाय के मुदस्सिर सीता के किरदार शुरू होने से लेकर खत्म होने तक उनके साथ रहते हैं। उनकी सेवा करते हैं। मंचन खत्म होने के बाद सीता को घर तक छोड़ने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। बताते हैं कि उन्हें यह कार्य करने में बड़ा आनंद आता है। वह सदैव माता सीता के चरणों में ही रहकर सेवा करना चाहते हैं और इसे भी अपना परम सौभाग्य मानते हैं। पेशे में जलशक्ति विभाग के जेई अनूप शर्मा रामलीला में किरदार अदा करने वाले सभी कलाकारों को तैयार करते हैं। नवरात्र के दौरान वह अपनी ड्यूटी भी निभाते हैं। दिन में ड्यूटी निभाने के बाद रात के समय वह रामलीला में अपनी सेवाएं देते हैं और कलाकारों को तैयार करते हैं।