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हर हर महादेव के जयघोष से गूंजा कैलाश कुंड
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कठुआ। कठुआ और भद्रवाह की सीमा पर स्थित पवित्र कैलाश कुंड की वार्षिक यात्रा मंगलवार को संपन्न हो गई है। समुद्र तल से 14 हजार सात सौ फीट की ऊंचाई पर पवित्र डल में स्नान और पारंपरिक अनुष्ठान के बाद यात्रा लौट आई है।
मुख्य यात्रा भद्रवाह के गाठा से शुरू हुई थी। इसमें उधमपुर के डुडू बसंतगढ़ और बनी सब डिवीजन के कई इलाकों से भी सीमित संख्या में भक्त सम्मिलित हुए। सोमवार सुबह छड़ी के साथ कैलाश कुंड पर पहुंचे भक्तों ने भगवान वासुकी नाग के दर्शन किए। इसके बाद यात्रा अपने पहले पड़ाव की ओर लौट आई।
यात्रा के पवित्र डल पर पहुंचने के साथ ही पहाड़ बम बम भोले और भगवान वासुकी नाग के जयकारों से गूंज उठे।
तीन दिवसीय यह पवित्र तीर्थयात्रा 4 अगस्त को शुरू हुई, जिसमें पुजारियों का एक समूह गाठा स्थित प्राचीन वासुकी नाग मंदिर से पवित्र छड़ी के साथ कैलाश कुंड की यात्रा पर रवाना हुआ। यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों से दर्जन भर पवित्र छड़ियों के साथ छोटे समूहों में भक्त शामिल हुए। स्थानीय मान्यता के अनुसार कैलाश कुंड को भगवान शिव का मूल निवास माना गया है, जिसे उन्होंने वासुकी नाग को दे दिया। और, खुद हिमाचल प्रदेश के भरमौर के मणिमहेश स्थित कैलाश पर्वत पर रहने चले गए।
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मुख्य यात्रा भद्रवाह के गाठा से शुरू हुई थी। इसमें उधमपुर के डुडू बसंतगढ़ और बनी सब डिवीजन के कई इलाकों से भी सीमित संख्या में भक्त सम्मिलित हुए। सोमवार सुबह छड़ी के साथ कैलाश कुंड पर पहुंचे भक्तों ने भगवान वासुकी नाग के दर्शन किए। इसके बाद यात्रा अपने पहले पड़ाव की ओर लौट आई।
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यात्रा के पवित्र डल पर पहुंचने के साथ ही पहाड़ बम बम भोले और भगवान वासुकी नाग के जयकारों से गूंज उठे।
तीन दिवसीय यह पवित्र तीर्थयात्रा 4 अगस्त को शुरू हुई, जिसमें पुजारियों का एक समूह गाठा स्थित प्राचीन वासुकी नाग मंदिर से पवित्र छड़ी के साथ कैलाश कुंड की यात्रा पर रवाना हुआ। यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों से दर्जन भर पवित्र छड़ियों के साथ छोटे समूहों में भक्त शामिल हुए। स्थानीय मान्यता के अनुसार कैलाश कुंड को भगवान शिव का मूल निवास माना गया है, जिसे उन्होंने वासुकी नाग को दे दिया। और, खुद हिमाचल प्रदेश के भरमौर के मणिमहेश स्थित कैलाश पर्वत पर रहने चले गए।
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