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Kathua News: जीएमसी कठुआ के नॉन-गजेटेड कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री से की मुलाकात
Thu, 12 Mar 2026 01:33 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 12 Mar 2026 01:33 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जीएमसी कठुआ के नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू से मुलाकात कर लंबित मांगों को रखा है। मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए सबऑर्डिनेट सर्विसेज (नॉन-गजेटेड एवं क्लास-5/एमटीएस) के लिए भर्ती एवं सेवा नियमों को शीघ्र अंतिम रूप देकर अधिसूचित करने की मांग की।
मुलाकात के दौरान कर्मचारियों ने मंत्री को बताया कि अगस्त 2025 में विभाग द्वारा ड्राफ्ट भर्ती नियम जारी किए गए थे, लेकिन कई महीनों बाद भी अंतिम नियम अधिसूचित नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को लगभग छह वर्ष हो चुके हैं, लेकिन करीब 1500 नॉन-गजटेड कर्मचारी अब भी स्पष्ट सेवा नियमों के बिना काम कर रहे हैं। इससे पदोन्नति, वरिष्ठता निर्धारण, वेतनमान का युक्तिकरण और जम्मू व श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों के साथ वेतन समानता जैसे मुद्दे लंबित पड़े हैं। उन्होंने बताया कि नियमों की अनुपस्थिति के कारण जेकेएसएसबी के माध्यम से नियमित भर्ती की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है जिससे युवाओं के रोजगार अवसरों पर असर पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर्मचारियों ने मंत्री से आग्रह किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर नियमों को जल्द अधिसूचित करवाएं, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो सके और मेडिकल कॉलेजों का प्रशासनिक ढांचा मजबूत हो। इसके बाद मंत्री ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि मामले पर विचार किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. रंजीत शर्मा और नीरज मलागर ने किया। जबकि इस अवसर पर काजल, बीनू, साहिल, विशाल, सतीश, योगराज, रोहित भट, राजिंदर, अनुज, पवन और पंकज भी उपस्थित रहे।
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कठुआ। जीएमसी कठुआ के नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू से मुलाकात कर लंबित मांगों को रखा है। मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए सबऑर्डिनेट सर्विसेज (नॉन-गजेटेड एवं क्लास-5/एमटीएस) के लिए भर्ती एवं सेवा नियमों को शीघ्र अंतिम रूप देकर अधिसूचित करने की मांग की।
मुलाकात के दौरान कर्मचारियों ने मंत्री को बताया कि अगस्त 2025 में विभाग द्वारा ड्राफ्ट भर्ती नियम जारी किए गए थे, लेकिन कई महीनों बाद भी अंतिम नियम अधिसूचित नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को लगभग छह वर्ष हो चुके हैं, लेकिन करीब 1500 नॉन-गजटेड कर्मचारी अब भी स्पष्ट सेवा नियमों के बिना काम कर रहे हैं। इससे पदोन्नति, वरिष्ठता निर्धारण, वेतनमान का युक्तिकरण और जम्मू व श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों के साथ वेतन समानता जैसे मुद्दे लंबित पड़े हैं। उन्होंने बताया कि नियमों की अनुपस्थिति के कारण जेकेएसएसबी के माध्यम से नियमित भर्ती की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है जिससे युवाओं के रोजगार अवसरों पर असर पड़ रहा है।
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प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर्मचारियों ने मंत्री से आग्रह किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर नियमों को जल्द अधिसूचित करवाएं, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो सके और मेडिकल कॉलेजों का प्रशासनिक ढांचा मजबूत हो। इसके बाद मंत्री ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि मामले पर विचार किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. रंजीत शर्मा और नीरज मलागर ने किया। जबकि इस अवसर पर काजल, बीनू, साहिल, विशाल, सतीश, योगराज, रोहित भट, राजिंदर, अनुज, पवन और पंकज भी उपस्थित रहे।
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