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Kathua News: तबाही के मुहाने पर उज्ज के किनारे बसे दर्जनों गांव

Thu, 26 Jun 2025 12:40 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Thu, 26 Jun 2025 12:40 AM IST
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Dozens of villages on the banks of Ujj are on the brink of destruction
उज्ज दरिया में बढ़ते जलस्तर से दहशत में लोग, कटाव भी शुरू। संवाद - फोटो : kathua
उज्ज दरिया के बरसात में उफान पर रहने से कई गांवों को नुकसान पहुंचने का खतरा
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बाढ़ नियंत्रण को लेकर हर साल किए जाने वाले इंतजाम बरसात में फौरी मदद तक ही सीमित

संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। उज्ज के तट पर बसे दर्जनों गांवों तबाही के मुहाने पर खड़े हैं। बाढ़ नियंत्रण को लेकर हर साल किए जाने वाले इंतजाम बरसात में फौरी मदद तक ही सीमित रहते हैं। उज्ज दरिया के बरसात में उफान पर रहने से कई गांवों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। सरकारी मदद के नाम पर उन्हें समय पर सूचित करना और घरों से कहीं और शिफ्ट कर खाना आदि उपलब्ध करवाना शामिल है। मगर जमीनों को बचाने के लिए कुछ जगह पर क्रेट बांधकर जुगाड़ से ही काम चलाया जा रहा है।
पूर्व में की जाने वाली तैयारियों की बात करें तो पिछले कई साल से इन इलाकों को नुकसान को बचाने के लिए सरकार को भेजे गए लगभग 300 करोड़ के प्रोजेक्ट सिर्फ फाइलों में धूल फांक रहे हैं। पिछले तीन साल से सरकार दरियाओं के किनारे बसे लोगों को बचाने के लिए 50-50 लाख की राशि जारी कर रही है। इससे बरसात में होने वाले नुकसान की भरपाई भी नहीं हो पाती। ऐसा तब है, जब राज्य में मानसून दस्तक देने की कगार पर है।
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सूत्रों के अनुसार कठुआ शहर के एक हिस्से को सहार खड्ड की बाढ़ से बचाने सहित अन्य कई गांव को मंडराने वाले खतरे को टालने के लिए 75 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा गया है। इसी तरह से माहीचक में भी सहार खड्ड से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए 75 करोड़ की अतिरिक्त डीपीआर मंजूरी के लिए भेजी गई है। बोहड़ा से सैदपुर तक 30 किलोमीटर के दायरे में रिहायशी इलाके और उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसी तरह चंग घाटी के लिए 14 करोड़, तंगदेवपुरा के साथ लगते सलालपुर, चक छिब्बा व हरियाचक आदि गांव की उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए साढ़े 14 करोड़ और इसी तरह कोटपुन्नू के इलाकों को बचाने के लिए 15 करोड़ की योजनाएं मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इनकी अनुमानित लागत साल दर साल बढ़ती जा रही है। मगर सरकार ने किसी भी परियोजना को मंजूरी नहीं दी है।
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बाढ़ से हर क्षेत्र है प्रभावित


बाढ़ से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़क संपर्क का कटना और बिजली समस्या आती है। निचले क्षेत्रों में भूमि कटाव मुख्य परेशानी पेश आती है। वर्ष 2014 में चंग क्षेत्र में अस्थायी डैम बह गया था। उज्ज के साथ वाले क्षेत्रों में भी बड़े क्षेत्रफल में भूमि कटाव हुआ था। खोख्याल और नगरी क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। बिलावर के बेरल के साथ-साथ उज्ज दरिया छब्बे चक, कोट पुन्नू जैसे इलाकों में कहर बरपाता है। हर साल उज्ज दरिया खतरे के निशान से ऊपर बहता है।
इस बार भी विभाग ने कुछ एक स्थानों पर इंतजामों का प्रयास किया, लेकिन विभाग खुद भी मानता है कि ढाई लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज करने वाले उज्ज में यह इंतजाम तिनके की तरह बिखर जाएंगे। पिछले कई साल से इन इलाकों को नुकसान को बचाने के लिए सरकार को भेजे गए लगभग 300 करोड़ के प्रोजेक्ट भी मंजूर नहीं हुए हैं। कुल मिलाकर लगभग 12 परियोजनाओं पर सरकारी मुहर नहीं लगने से हजारों लोगों की जिंदगी इस बार भी दांव पर है।

जखोल से लेकर पंडोरी तक बड़े पैमाने पर हुआ अवैध खनन

उज्ज दरिया में बड़े पैमाने पर अवैध खनन ने भी आसपास के इलाकों में दरिया के बहाव को बदल दिया है। कई इलाकों में जहां पिछले कई दशकों से दरिया गांव के दूर बहता था अब वही गांव के बीच पहुंच जाता है। जखोल से लेकर पंडोरी तक बड़े पैमाने पर हुआ अवैध खनन जहां लोगों की जान को जोखिम में डाल रहा है। कई इलाकों में यह अवैध खेल अभी भी जारी है।
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