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अधर में लटका है डोल खड्ड पुल निर्माण
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डोल खड्ड में पुल का निर्माण जल्द पूरा करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते स्थानीय। संवाद
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। जिला में रविवार की सुबह हुई बारिश के बाद नदी नालों में बहाव तेज हो गया। इस दौरान नालाें को पार कर अपने घरों को जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हटली गांव को जाने वाले लिंक मार्ग पर डोल खड्ड में आई बाढ़ ने लोगों को सबसे ज्यादा परेशान किया। खड्ड के तेज बहाव के कारण वहां एक कार फंस गई। जिसे लोंगों ने कड़ी मशक्कत कर किसी तरह से बाहर निकाला। इस दौरान स्थानीय लोगों ने उनकी इस वर्षों पुरानी समस्या के प्रति सरकार पर गंभीर न होने का आरोप लगाते हुए जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शन में शामिल मनोहर डोगरा ने बताया कि करीब छह साल पहले शुरू हुए पुल निर्माण कार्य को अंजाम देने वाली एजेंसी ने काम अधर में छोड़ दिया। पहले कुछ सालों तक तो लोगों को कभी फंड न होने की बात कह कर कभी अन्य समस्याएं बताकर लौटा दिया जाता था। इसके बाद कोरोना का बहाना बनाकर निर्माण पर रोक लगी रही है। अब किस कारण से पुल का निर्माण नही शुरू हो पा रहा है, यह उन्हें पता नही है। वहीं कृष्ण सिंह ने कहा कि उक्त निर्माण में सड़क निर्माण भी शामिल था। जिसे पहले पुल के साथ बनाए जाने की बात कह कर टाल दिया गया था। गत वर्ष लोगों द्वारा आवाज उठाने के बाद जिला विकास परिषद के उपचेयरमैन के प्रयास से सड़क पर फिल्टर यह कहते हुए डाला गया था कि सड़क के निर्माण की भी जल्द कोई राह निकाली जाएगी। इसके बाद न कोई अधिकारी और न ही राजनेता इधर कभी आया। मानसून के दस्तक के साथ शुरू हुई बारिश से सड़क पर डाला गया फिल्टर पूरी तरह से बह गया है। पुल का निर्माण तो पहले ही लटका था। अब फिल्टर के बह जाने के बाद सड़क भी खड्ड में तब्दील हो चुकी है। इसके कारण लोगों को आने जाने में परेशानी पेश आ रही है। प्रदर्शन में शामिल छत्र सिंह की माने तो करीब छह गांवों में रहने वाली दस हजार से ज्यादा की आबादी को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले इस मार्ग की सुधि न लिए जाने के लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्कूल भी खुल जाएंगे। तब अधूरे पुल और खस्ताहाल सड़क विद्यार्थियों की शिक्षा को प्रभावित करेंगे। क्योंकि खड्ड में जब बहाव तेज होता है तो उसे पार कर पाना संभव नही होता है। इसके कारण कई बार स्थानीय बच्चे स्कूल तक भी नही पहुंच पाते है। बारिश के दौरान अगर कोई बीमार हो जाए तो उसका समय से अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से क्षेत्र के लोगों की इस मुख्य समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की। प्रदर्शन में सेठी भगत, विजय सिंह, करतार चंद, देस राज, अमित कुमार, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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प्रदर्शन में शामिल मनोहर डोगरा ने बताया कि करीब छह साल पहले शुरू हुए पुल निर्माण कार्य को अंजाम देने वाली एजेंसी ने काम अधर में छोड़ दिया। पहले कुछ सालों तक तो लोगों को कभी फंड न होने की बात कह कर कभी अन्य समस्याएं बताकर लौटा दिया जाता था। इसके बाद कोरोना का बहाना बनाकर निर्माण पर रोक लगी रही है। अब किस कारण से पुल का निर्माण नही शुरू हो पा रहा है, यह उन्हें पता नही है। वहीं कृष्ण सिंह ने कहा कि उक्त निर्माण में सड़क निर्माण भी शामिल था। जिसे पहले पुल के साथ बनाए जाने की बात कह कर टाल दिया गया था। गत वर्ष लोगों द्वारा आवाज उठाने के बाद जिला विकास परिषद के उपचेयरमैन के प्रयास से सड़क पर फिल्टर यह कहते हुए डाला गया था कि सड़क के निर्माण की भी जल्द कोई राह निकाली जाएगी। इसके बाद न कोई अधिकारी और न ही राजनेता इधर कभी आया। मानसून के दस्तक के साथ शुरू हुई बारिश से सड़क पर डाला गया फिल्टर पूरी तरह से बह गया है। पुल का निर्माण तो पहले ही लटका था। अब फिल्टर के बह जाने के बाद सड़क भी खड्ड में तब्दील हो चुकी है। इसके कारण लोगों को आने जाने में परेशानी पेश आ रही है। प्रदर्शन में शामिल छत्र सिंह की माने तो करीब छह गांवों में रहने वाली दस हजार से ज्यादा की आबादी को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले इस मार्ग की सुधि न लिए जाने के लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्कूल भी खुल जाएंगे। तब अधूरे पुल और खस्ताहाल सड़क विद्यार्थियों की शिक्षा को प्रभावित करेंगे। क्योंकि खड्ड में जब बहाव तेज होता है तो उसे पार कर पाना संभव नही होता है। इसके कारण कई बार स्थानीय बच्चे स्कूल तक भी नही पहुंच पाते है। बारिश के दौरान अगर कोई बीमार हो जाए तो उसका समय से अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से क्षेत्र के लोगों की इस मुख्य समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की। प्रदर्शन में सेठी भगत, विजय सिंह, करतार चंद, देस राज, अमित कुमार, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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