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काशी विश्वनाथ की तर्ज पर बनेगा कांथल का चौंरी शिव मंदिर
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कठुआ। बनी का ऐतिहासिक और प्राचीन चौंरी शिव मंदिर बनारस के काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर बनाया जाएगा। दस जून को बनी उपमंडल के कांथल में मंदिर के नवनिर्माण की आधारशिला रखी जाएगी और भूमि पूजन होगा। श्रीराम मंदिर को तैयार कर रहे सोमपुरा परिवार से संबंधित ललित सोमपुरा ने कांथल के चौंरी शिव मंदिर का नक्शा तैयार किया है। दो करोड़ दस लाख की लागत से तैयार होने वाला यह मंदिर जिले का पहला पूरी तरह से मार्बल से बना भव्य शिव मंदिर होगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास पांच सौ साल पुराना है। मंदिर का संबंध कैलाश मणिमहेश से है, जो चंबा जिला के भरमौर में स्थित है। मणिमहेश यात्रा में जिस रात को कुड का आयोजन होता है उसी रात चौंरी के शिव मंदिर में भी भव्य कुड और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। चांदल से छह किलोमीटर की दूरी पर सड़क संपर्क से जुड़ा यह मंदिर जिले में ऐतिहासिक नक्शे के आधार पर पहला मंदिर बनने जा रहा है।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक ललहाल ने बताया कि चौंरी का शिव मंदिर लगभग पांच सौ वर्ष पुराना है। मान्यता है कि कैलाश मणिमहेश को जाते समय भगवान शिव ने कुछ समय इस स्थान पर विश्राम किया था। कांथल पंचायत के लोगों के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण शुरू किया गया है। जरूरत पड़ने पर बनी उपमंडल के अन्य लोगों का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान से मार्बल दस जून से पहुंचना शुरू हो जाएगा। यह भव्य मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र है और इसे और बेहतर करने के प्रयास जारी रहेंगे।
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स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास पांच सौ साल पुराना है। मंदिर का संबंध कैलाश मणिमहेश से है, जो चंबा जिला के भरमौर में स्थित है। मणिमहेश यात्रा में जिस रात को कुड का आयोजन होता है उसी रात चौंरी के शिव मंदिर में भी भव्य कुड और भक्ति कार्यक्रम किए जाते हैं। चांदल से छह किलोमीटर की दूरी पर सड़क संपर्क से जुड़ा यह मंदिर जिले में ऐतिहासिक नक्शे के आधार पर पहला मंदिर बनने जा रहा है।
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मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक ललहाल ने बताया कि चौंरी का शिव मंदिर लगभग पांच सौ वर्ष पुराना है। मान्यता है कि कैलाश मणिमहेश को जाते समय भगवान शिव ने कुछ समय इस स्थान पर विश्राम किया था। कांथल पंचायत के लोगों के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण शुरू किया गया है। जरूरत पड़ने पर बनी उपमंडल के अन्य लोगों का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान से मार्बल दस जून से पहुंचना शुरू हो जाएगा। यह भव्य मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र है और इसे और बेहतर करने के प्रयास जारी रहेंगे।
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