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गो संरक्षण, संवर्द्धन के लिए संकल्प लेने पर जोर
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बसोहली। चूड़ामणि संस्कृत संस्थान में गोपाष्टमी पर्व पर हवन एवं गो पूजन किया गया। इस दौरान संरक्षण और संवर्द्धन के लिए संकल्प लेने पर जोर दिया।
संस्थान के प्राचार्य अभिषेक कुमार उपाध्याय ने कहा कि गंगा, गायत्री, गीता, गोवर्धन एवं गोविंद की तरह भारतीय संस्कृति में गो पूजन का विधान है। सभी मंगल अवसरों पर गाय एवं कन्या पूजन का विधान वेदों में वर्णित है।
पृथ्वी पर मनुष्य के अलावा बहुत से जानवर निवास करते हैं। लेकिन हम सभी को माता तो नहीं कह सकते। गाय के ऐसे बहुत से गुण हैं, जो माता से मिलते हैं। जैसे उनके दूध के सेवन से मनुष्य का शरीर स्वस्थ होता है। गोबर और गोमूत्र खेती के लिए पोषक एवं शरीर के लिए रोग नाशक और रक्तशोधक भी होते हैं। गाय की महिमा वैदिक वैज्ञानिक एवं पौराणिक उदाहरणों के माध्यम से जोड़ते हुए उस पर प्रकाश डाला।
आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अभीष्ट सिद्धि एवं सौभाग्य सभी चाहने वालों को गोपाष्टमी के दिन विधि विधान से गो पूजन कर उनके संरक्षण और संवर्धन हेतु संकल्प लेना चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के आचार्य महेंद्र उपाध्याय, सौरभ शर्मा, बटुक और अन्य उपस्थित रहे।
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संस्थान के प्राचार्य अभिषेक कुमार उपाध्याय ने कहा कि गंगा, गायत्री, गीता, गोवर्धन एवं गोविंद की तरह भारतीय संस्कृति में गो पूजन का विधान है। सभी मंगल अवसरों पर गाय एवं कन्या पूजन का विधान वेदों में वर्णित है।
पृथ्वी पर मनुष्य के अलावा बहुत से जानवर निवास करते हैं। लेकिन हम सभी को माता तो नहीं कह सकते। गाय के ऐसे बहुत से गुण हैं, जो माता से मिलते हैं। जैसे उनके दूध के सेवन से मनुष्य का शरीर स्वस्थ होता है। गोबर और गोमूत्र खेती के लिए पोषक एवं शरीर के लिए रोग नाशक और रक्तशोधक भी होते हैं। गाय की महिमा वैदिक वैज्ञानिक एवं पौराणिक उदाहरणों के माध्यम से जोड़ते हुए उस पर प्रकाश डाला।
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आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अभीष्ट सिद्धि एवं सौभाग्य सभी चाहने वालों को गोपाष्टमी के दिन विधि विधान से गो पूजन कर उनके संरक्षण और संवर्धन हेतु संकल्प लेना चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के आचार्य महेंद्र उपाध्याय, सौरभ शर्मा, बटुक और अन्य उपस्थित रहे।
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