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फंड आवंटन मामले में हाईकोर्ट पहुंचे बीडीसी अध्यक्ष
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कठुआ। फंड आवंटन मामले में बीडीसी अध्यक्षों की अनदेखी के खिलाफ बरनोटी ब्लॉक के बीडीसी अध्यक्ष ब्रजेश्वर सिंह इंदू ने अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने गुहार लगाई है कि थ्री टियर व्यवस्था लागू होने के बाद भी बीडीसी को पर्याप्त फंड जारी नहीं किए जा रहे हैं। मामला कई बार उठाए जाने के बाद भी जब राहत नहीं मिली तो कोर्ट से न्याय मांगा गया है।
बीडीसी अध्यक्ष ने बताया कि जम्मू कश्मीर में पंचायतों, बीडीसी और फिर डीडीसी के चुनाव हो जाने के बाद थ्री-टियर सिस्टम लागू हो गया है। लेकिन फंड आवंटन में जिस तरह से बीडीसी अध्यक्षों की अनदेखी की जा रही है। उसने उन्हें न्यायालय में आने के लिए मजबूर होना पड़ा। बीडीसी अध्यक्ष में बताया कि जिले में विकास की गति को तेज करने के नाम पर थ्री-टियर सिस्टम तो लागू हो गया है, लेकिन विकास के लिए आने वाले फंड में इस सिस्टम के दूसरे पायदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिस्टम का प्रथम चरण पंचायतों को 23 लाख 30 हजार रुपये और तीसरे चरण डीडीसी को 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
लेकिन दूसरे चरण बीडीसी को मात्र 25 लाख रुपये खर्च करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में उधमपुर के बाद दूसरा सबसे बड़ा बरनोटी ब्लॉक जिसकी 31 पंचायतें हैं। वहां के लिए उक्त फंड ऊंट के मुंह में जीरा है। क्योंकि इस फंड को खर्च करने के लिए उन्हें कम से कम 16 सरपंचों की सहमति लेनी होगी। ऐसे में 31 पंचायतों के 260 वार्डों में उक्त फंड का अगर समान रूप से बंटवारा किया जाए तो एक वार्ड के हिस्से में एक हजार रुपया भी नहीं आता है। इंदू ने कहा कि अपनी इस शिकायत को गत दिनों कठुआ दौरे पर आए मुख्य सचिव के समक्ष भी उठाया था, लेकिन वहां से भी कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। मजबूरन उन्हें न्यायालय का सहारा लेना पड़ा है।
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बीडीसी अध्यक्ष ने बताया कि जम्मू कश्मीर में पंचायतों, बीडीसी और फिर डीडीसी के चुनाव हो जाने के बाद थ्री-टियर सिस्टम लागू हो गया है। लेकिन फंड आवंटन में जिस तरह से बीडीसी अध्यक्षों की अनदेखी की जा रही है। उसने उन्हें न्यायालय में आने के लिए मजबूर होना पड़ा। बीडीसी अध्यक्ष में बताया कि जिले में विकास की गति को तेज करने के नाम पर थ्री-टियर सिस्टम तो लागू हो गया है, लेकिन विकास के लिए आने वाले फंड में इस सिस्टम के दूसरे पायदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिस्टम का प्रथम चरण पंचायतों को 23 लाख 30 हजार रुपये और तीसरे चरण डीडीसी को 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
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लेकिन दूसरे चरण बीडीसी को मात्र 25 लाख रुपये खर्च करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में उधमपुर के बाद दूसरा सबसे बड़ा बरनोटी ब्लॉक जिसकी 31 पंचायतें हैं। वहां के लिए उक्त फंड ऊंट के मुंह में जीरा है। क्योंकि इस फंड को खर्च करने के लिए उन्हें कम से कम 16 सरपंचों की सहमति लेनी होगी। ऐसे में 31 पंचायतों के 260 वार्डों में उक्त फंड का अगर समान रूप से बंटवारा किया जाए तो एक वार्ड के हिस्से में एक हजार रुपया भी नहीं आता है। इंदू ने कहा कि अपनी इस शिकायत को गत दिनों कठुआ दौरे पर आए मुख्य सचिव के समक्ष भी उठाया था, लेकिन वहां से भी कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। मजबूरन उन्हें न्यायालय का सहारा लेना पड़ा है।
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