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Kathua News: प्री-लोक अदालत में निपटेंगे चेक बाउंस और श्रम विवाद के मामले
Tue, 22 Apr 2025 02:07 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 22 Apr 2025 02:07 AM IST
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कठुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कठुआ इस साल की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन से पहले प्री-लोक अदालत का आयोजन करने जा रहा है। यह आयोजन 28 अप्रैल 2025 से 9 मई 2025 तक होगा, जबकि राष्ट्रीय लोक अदालत 10 मई 2025 को निर्धारित है।
सत्र जिला न्यायालय परिसर के एडीआर केंद्र में आयोजित किए जा रहे हैं ताकि वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के माध्यम से मामलों का सौहार्दपूर्ण निपटान और अंतिम निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
प्री-लोक अदालत में विचार किए जाने वाले मामलों में चेक बाउंस विवाद (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट), बैंक रिकवरी, श्रम विवाद, और पानी के बिल शामिल हैं। लंबित मामलों में आपराधिक संयोज्य अपराध, चेक बाउंस मामले, बैंक रिकवरी मामले, एमएसीटी मामले, वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण मामले, भूमि अधिग्रहण मामले, श्रम चालान, सिविल मामले और ट्रैफिक चालान शामिल हैं।
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अपील की गई है कि इच्छुक व्यक्ति, विभाग या संगठन, जो अपने विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान चाहते हैं, डीएलएसए कार्यालय से संपर्क करने और अपने मामलों के विवरण जैसे केस शीर्षक, केस संख्या, सुनवाई की तारीख और अदालत का नाम साझा करने की सलाह दी गई है। इन मामलों को लोक अदालत की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
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सत्र जिला न्यायालय परिसर के एडीआर केंद्र में आयोजित किए जा रहे हैं ताकि वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के माध्यम से मामलों का सौहार्दपूर्ण निपटान और अंतिम निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
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प्री-लोक अदालत में विचार किए जाने वाले मामलों में चेक बाउंस विवाद (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट), बैंक रिकवरी, श्रम विवाद, और पानी के बिल शामिल हैं। लंबित मामलों में आपराधिक संयोज्य अपराध, चेक बाउंस मामले, बैंक रिकवरी मामले, एमएसीटी मामले, वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण मामले, भूमि अधिग्रहण मामले, श्रम चालान, सिविल मामले और ट्रैफिक चालान शामिल हैं।
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अपील की गई है कि इच्छुक व्यक्ति, विभाग या संगठन, जो अपने विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान चाहते हैं, डीएलएसए कार्यालय से संपर्क करने और अपने मामलों के विवरण जैसे केस शीर्षक, केस संख्या, सुनवाई की तारीख और अदालत का नाम साझा करने की सलाह दी गई है। इन मामलों को लोक अदालत की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।