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Kathua News: किराये की इमारतों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र

Tue, 25 Mar 2025 01:48 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Tue, 25 Mar 2025 01:48 AM IST
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Anganwadi centers running in rented buildings
हर साल साढ़े चार करोड़ सिर्फ किराये के रूप में हो रहा खर्च
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कठुआ। जिले के ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्र किराये के बोझ में दबते जा रहे हैं। एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के तहत चलाए जाने वाले केंद्रों का बड़ा हिस्सा किराये के रूप में खर्च हो जाता है। जिले के 95 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र के पास इमारत नहीं है।

जानकारी के मुताबिक जिले में आईसीडीएस के आठ प्रोजेक्ट के तहत कुल 1641 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं। इसमें से 1584 केंद्र किराये के मकानों से कार्यरत हैं। इसके लिए संबंधित विभाग को हर साल 4,57,20,000 रुपये की राशि सिर्फ किराये के रूप में देनी पड़ रही है। हर महीने 38.10 लाख की राशि किराये के रूप में दी जाती है। सिर्फ 20 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जो विभाग की ओर से बनाए गए केंद्रों से चलाए जा रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा बिलावर प्रोजेक्ट के तहत आठ केंद्र हैं।
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वहीं, हीरानगर, बनी और मल्हार के तीन-तीन, बसोहली, बरनोटी और डुग्गन के एक-एक, जबकि कठुआ का एक भी सेंटर के पास अपनी इमारत नहीं है। जिले के कुल आठ सेंटर अन्य सरकारी इमारतों जिसमें पंचायत घर और सामुदायिक भवनों से चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा हाल ही में जिला प्रशासन की मदद से कुल 29 आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है।
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शहर और ग्रामीण इलाके के केंद्रों के लिए अलग-अलग देना पड़ता है किराया

मौजूदा समय में कुल 1641 में से 132 सेंटर शहरी तो 1509 सेंटर ग्रामीण इलाकों में चल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों के लिए प्रत्येक सेंटर का किराया दो हजार निर्धारित किया है। वहीं शहरी केंद्रों के लिए राशि छह हजार तय है। हालांकि संबंधित विभाग की ओर से केंद्र स्थापित करने के लिए तय दिशा निर्देश है। इसके अनुसार, एक केंद्र के लिए 600 वर्ग फीट की भूमि सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
इसमें रसोई, स्टोर के साथ-साथ शौचालय सहित पीने की पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। मगर विरले केंद्रों में यह सारी सुविधा उपलब्ध हो पाती है। इसका मुख्य कारण किराये का मकान होता है। संवाद

योजना का उद्देश्य

आईसीडीएस योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों का उद्देश्य 0 से 6 वर्ष के बच्चों सहित गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण और स्वास्थ्य स्थिति में सुधार का खास ध्यान रखा जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन केंद्रों से सहायता प्राप्त लाभार्थियों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित कर लाभार्थियों की कुपोषण दर कम करना है।
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