{"_id":"616338588ebc3ed32a7b750b","slug":"agriculture-law-kathua-news-jmu2455143139","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब सरकारी खरीद केंद्रों पर बिचौलिए नही बेच पाएंगे आनाज, जिला कृषि विभाग ने शुरू किया किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब सरकारी खरीद केंद्रों पर बिचौलिए नही बेच पाएंगे आनाज, जिला कृषि विभाग ने शुरू किया किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया
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कठुआ। जिले में बंटाई पर लेकर खेती करने वाले किसान व बिचौलिये इस बार सरकारी खरीद केंद्रों पर धान नहीं बेच पाएंगे। क्योंकि, केंद्र सरकार ने खरीद केंद्रों पर धान बेचने के लिए किसानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है।
केंद्र सरकार किसानों के लिए लाए तीन नए कृषि कानूनों को सही साबित करने का अपनी तरफ से भरसक प्रयास कर रही है। बेशक, देश में कई जगहों पर किसान कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, सरकार सब कुछ अनसुना और अनदेखा कर देश में कानूनों को लागू करने की ओर अग्रसर है।
इसी क्रम में घोषित किया गया है कि अब देश के किसानों को सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी फसल बेचने के लिए पंजीकरण कराना होगा। इन पंजीकृत किसानों से सरकार सीधे अनाज खरीदेगी, और सीधे उनके खाते में फसल का भुगतान करेगी। लेकिन, इन नए निर्देशों से जिले में बंटाई पर खेती करने वाले किसानों में मायूसी देखी जा रही है।
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नई व्यवस्था से बंटाई पर खेती करने वाले होंगे प्रभावित
कृषि क्षेत्र में जम्मू कश्मीर के अब तक सबसे अग्रणी रहे कठुआ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका चलाने का मुख्य साधन खेती ही है। इनमें ऐसे भी लोग हैं जो किसानों से जमीन बंटाई पर लेकर खेती करते हैं। इसके जरिए उनका परिवार चलता है। नई व्यवस्था में ऐसे किसानों का अनाज सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं खरीदा जा सकेगा। ऐसे में उनका प्रभावित होना तय है।
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धान खरीद के लिए शुरू हुई पंजीकरण की प्रकिया
धान की खरीद के लिए खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट पर किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए किसान के पास जितनी कृषि योग्य जमीन है, उसकी नकल लगाकर जानकारी देनी होगी। साथ ही किसान को अपना आधार कार्ड और बैंक खाता नंबर सरकार के बनाए ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करानी होगी। इस प्रक्रिया से किसान को अपनी फसल बेचने के बाद तीन दिन के भीतर ही पैसा भी प्राप्त हो जाएगा। इस नई व्यवस्था से फसलों की खरीद में बिचौलिये खत्म हो जाएंगे। फसलों की खरीद में धांधली रोकने के लिए सरकार ने गाइड लाइन बदली है।
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प्रशासन को बनाना चाहिए सिंगल विंडो सिस्टम
धान कटाई के सीजन में आए इन आदेशों से किसान पशोपेश में है। एक तरफ खेत में तैयार हो चुकी फसल की कटाई की चिंता है। वहीं, फसल को बेचने के लिए किसान दस्तावेजी प्रकिया को पूरा करने के लिए राजस्व विभाग और कृषि विभाग का चक्कर लगा रहा है। नई व्यवस्था इतनी जटिल है कि जागरूक किसान भी इससे परेशान हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सीधी सादी जिंदगी गुजारने वाले किसानों के लिए तो यह पूरा सिरदर्द है। अगर किसानों का पंजीकरण अनिवार्य है तो इसके लिए प्रशासन को सिंगल विंडो सिस्टम अपनाना चाहिए।
- मोहिंदर सिंह, किसान नेता
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तीन सौ किसानों ने कराया पंजीकरण
जिले में गत वर्ष रिकार्ड 2.41 लाख कुंतल धान हुए थे। इस बार इससे भी अधिक खरीद होने का अनुमान है। क्योंकि सरकार ने पिछली बार के 1888 और 1868 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाकर इस बार 1960 और 1940 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है। खरीद के लिए जिले में कुल आठ मंडियां नगरी, भजवाल पल्ली, मढ़ीन, छन्न अरोड़ियां, कुंदे चक और डुंगाडा में खोल दी गई हैं। वहीं, अब तक लगभग तीन सौ किसान अपना पंजीकरण करा चुके हैं। शेष की प्रकिया जारी है।
- राजू महाजन, जिला कृषि अधिकारी, कठुआ
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केंद्र सरकार किसानों के लिए लाए तीन नए कृषि कानूनों को सही साबित करने का अपनी तरफ से भरसक प्रयास कर रही है। बेशक, देश में कई जगहों पर किसान कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, सरकार सब कुछ अनसुना और अनदेखा कर देश में कानूनों को लागू करने की ओर अग्रसर है।
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इसी क्रम में घोषित किया गया है कि अब देश के किसानों को सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी फसल बेचने के लिए पंजीकरण कराना होगा। इन पंजीकृत किसानों से सरकार सीधे अनाज खरीदेगी, और सीधे उनके खाते में फसल का भुगतान करेगी। लेकिन, इन नए निर्देशों से जिले में बंटाई पर खेती करने वाले किसानों में मायूसी देखी जा रही है।
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नई व्यवस्था से बंटाई पर खेती करने वाले होंगे प्रभावित
कृषि क्षेत्र में जम्मू कश्मीर के अब तक सबसे अग्रणी रहे कठुआ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका चलाने का मुख्य साधन खेती ही है। इनमें ऐसे भी लोग हैं जो किसानों से जमीन बंटाई पर लेकर खेती करते हैं। इसके जरिए उनका परिवार चलता है। नई व्यवस्था में ऐसे किसानों का अनाज सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं खरीदा जा सकेगा। ऐसे में उनका प्रभावित होना तय है।
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धान खरीद के लिए शुरू हुई पंजीकरण की प्रकिया
धान की खरीद के लिए खाद्य व रसद विभाग की वेबसाइट पर किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए किसान के पास जितनी कृषि योग्य जमीन है, उसकी नकल लगाकर जानकारी देनी होगी। साथ ही किसान को अपना आधार कार्ड और बैंक खाता नंबर सरकार के बनाए ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करानी होगी। इस प्रक्रिया से किसान को अपनी फसल बेचने के बाद तीन दिन के भीतर ही पैसा भी प्राप्त हो जाएगा। इस नई व्यवस्था से फसलों की खरीद में बिचौलिये खत्म हो जाएंगे। फसलों की खरीद में धांधली रोकने के लिए सरकार ने गाइड लाइन बदली है।
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प्रशासन को बनाना चाहिए सिंगल विंडो सिस्टम
धान कटाई के सीजन में आए इन आदेशों से किसान पशोपेश में है। एक तरफ खेत में तैयार हो चुकी फसल की कटाई की चिंता है। वहीं, फसल को बेचने के लिए किसान दस्तावेजी प्रकिया को पूरा करने के लिए राजस्व विभाग और कृषि विभाग का चक्कर लगा रहा है। नई व्यवस्था इतनी जटिल है कि जागरूक किसान भी इससे परेशान हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सीधी सादी जिंदगी गुजारने वाले किसानों के लिए तो यह पूरा सिरदर्द है। अगर किसानों का पंजीकरण अनिवार्य है तो इसके लिए प्रशासन को सिंगल विंडो सिस्टम अपनाना चाहिए।
- मोहिंदर सिंह, किसान नेता
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तीन सौ किसानों ने कराया पंजीकरण
जिले में गत वर्ष रिकार्ड 2.41 लाख कुंतल धान हुए थे। इस बार इससे भी अधिक खरीद होने का अनुमान है। क्योंकि सरकार ने पिछली बार के 1888 और 1868 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाकर इस बार 1960 और 1940 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है। खरीद के लिए जिले में कुल आठ मंडियां नगरी, भजवाल पल्ली, मढ़ीन, छन्न अरोड़ियां, कुंदे चक और डुंगाडा में खोल दी गई हैं। वहीं, अब तक लगभग तीन सौ किसान अपना पंजीकरण करा चुके हैं। शेष की प्रकिया जारी है।
- राजू महाजन, जिला कृषि अधिकारी, कठुआ