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जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग की
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जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर शहर में रोष रैली निकालते पैंथर्स कार्यकर्
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। अनुछेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ पर जिले में विभिन्न संगठनों ने रोष रैली निकालते हुए जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिए जाने की मांग की है। पैंथर्स पार्टी के साथ रोष प्रदर्शन में डेमोक्रेटिक पीस मूवमेंट, इंटरनेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी, महिला अधिकार संगठन और जन जागृति मंच के सदस्य भी शामिल रहे।
उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने की प्रक्रिया को गैर संवैधानिक बताया और शहर के कॉलेज मार्ग पर रोष रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने नारे और बैनर के माध्यम से अपनी बात रखने का प्रयास किया, जिसमें राज्य का दर्जा वापस दिए जाने, रोजगार के अधिकार जम्मू कश्मीर के मूल नागरिकों को दिए जाने की मांग रखी गई।
रोष रैली में शामिल पैंथर्स पार्टी के जिला अध्यक्ष रॉबिन शर्मा ने कहा कि दो सौ वर्ष पुराने राज्य को केंद्र सरकार ने तानाशाही रवैए से खत्म कर दिया। लोकतंत्र में जो फैसला लिया जाता है, उसमें लोगों को विश्वास में लिया जाता है। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया। जम्मू कश्मीर राज्य था तो लोगों के पास रोजगार था। यहां टोल प्लाजा स्थापित कर सीमा कर नहीं वसूले जा रहे थे। जम्मू के लोगों का कश्मीर के साथ बराबरी को लेकर मतभेद था। लेकिन, यह कोई नहीं चाहता था कि जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीना जाता।
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रॉबिन शर्मा ने कहा कि प्रदेश बनने के बाद तानाशाही, बेरोजगारी हावी हुई, तो केंद्र ने लोकतंत्र की हत्या की। जानबूझ क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इंटरनेट एक साल बंद रखा गया। क्या यह लोकतंत्र था? हर व्यक्ति को इसके लिए आवाज उठानी होगी। लोगों को अपने मताधिकार का सही प्रयोग कर इसका जवाब देना होगा। जम्मू कश्मीर में अपराध का पैमाना भी दो साल में बेहद बढ़ चुका है। आज जम्मू कश्मीर और यहां के बाशिंदों से उनकी पहचान छीन ली गई है।
वहीं, आईडीपी के आई डी खजूरिया ने कहा कि 5 अगस्त 2019 की बरसी काले दिवस के रूप में मनाई जा रही है। राज्य का दर्जा छीनकर यहां के लोगों के साथ धोखा किया गया है। पिछले दो साल में कई काले कानून लागू कर दिए गए हैं। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी और बेरोजगार युवा आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर की राजधानी कौन सी बनाई जाएगी? यह भी अब मुद्दा बन चुका है। अफसरशाही से लोगों की आवाज को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि जम्मू कश्मीर में फौरी चुनाव कराए जाएं, और जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाए।
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उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने की प्रक्रिया को गैर संवैधानिक बताया और शहर के कॉलेज मार्ग पर रोष रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने नारे और बैनर के माध्यम से अपनी बात रखने का प्रयास किया, जिसमें राज्य का दर्जा वापस दिए जाने, रोजगार के अधिकार जम्मू कश्मीर के मूल नागरिकों को दिए जाने की मांग रखी गई।
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रोष रैली में शामिल पैंथर्स पार्टी के जिला अध्यक्ष रॉबिन शर्मा ने कहा कि दो सौ वर्ष पुराने राज्य को केंद्र सरकार ने तानाशाही रवैए से खत्म कर दिया। लोकतंत्र में जो फैसला लिया जाता है, उसमें लोगों को विश्वास में लिया जाता है। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया। जम्मू कश्मीर राज्य था तो लोगों के पास रोजगार था। यहां टोल प्लाजा स्थापित कर सीमा कर नहीं वसूले जा रहे थे। जम्मू के लोगों का कश्मीर के साथ बराबरी को लेकर मतभेद था। लेकिन, यह कोई नहीं चाहता था कि जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीना जाता।
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रॉबिन शर्मा ने कहा कि प्रदेश बनने के बाद तानाशाही, बेरोजगारी हावी हुई, तो केंद्र ने लोकतंत्र की हत्या की। जानबूझ क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इंटरनेट एक साल बंद रखा गया। क्या यह लोकतंत्र था? हर व्यक्ति को इसके लिए आवाज उठानी होगी। लोगों को अपने मताधिकार का सही प्रयोग कर इसका जवाब देना होगा। जम्मू कश्मीर में अपराध का पैमाना भी दो साल में बेहद बढ़ चुका है। आज जम्मू कश्मीर और यहां के बाशिंदों से उनकी पहचान छीन ली गई है।
वहीं, आईडीपी के आई डी खजूरिया ने कहा कि 5 अगस्त 2019 की बरसी काले दिवस के रूप में मनाई जा रही है। राज्य का दर्जा छीनकर यहां के लोगों के साथ धोखा किया गया है। पिछले दो साल में कई काले कानून लागू कर दिए गए हैं। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी और बेरोजगार युवा आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर की राजधानी कौन सी बनाई जाएगी? यह भी अब मुद्दा बन चुका है। अफसरशाही से लोगों की आवाज को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि जम्मू कश्मीर में फौरी चुनाव कराए जाएं, और जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाए।