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जम्मू-कश्मीर: निजी स्कूलों के लिए दाखिला नीति पर सरकार को जवाब देने का अतिरिक्त समय

Wed, 20 Oct 2021 04:28 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 20 Oct 2021 04:28 PM IST
सार

पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष करने समेत अन्य प्रावधान करने की याचिका। दर्ज की गई याचिका में कहा गया कि कम आयु के बच्चों का पहली कक्षा में दाखिला कर लिया जाता है। निजी स्कूलों में प्रवेश नीति में सुधार करते हुए इसे तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए।

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jammu-kashmir: Additional time to reply to government on admission policy for private schools
बच्चों पर बढ़ रहा पढ़ाई का बोझ - फोटो : सांकेतिक चित्र

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने केंद्र व प्रदेश सरकार को निजी स्कूलों में दाखिला नीति से संबंधित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ अब मामले की नौ नवंबर को सुनवाई करेगी। जनहित याचिका में मौजूदा दाखिला नीति के तहत प्रवेश प्रक्रिया रोकने और पहली कक्षा में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु को छह वर्ष करने की मांग की गई है।

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श्रीनगर के बुचपोरा निवासी कैसर अहमद भट ने याचिका में कहा है कि देश समेत विश्व भर में पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम आयु छह वर्ष है, जबकि प्रदेश में निजी स्कूलों की ओर से कोई एक नीति नहीं अपनाई जा रही है। कम आयु के बच्चों का पहली कक्षा में दाखिला कर लिया जाता है। निजी स्कूलों में प्रवेश नीति में सुधार करते हुए इसे तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए। याची ने कहा कि निजी स्कूल प्रबंधक तमाम नियमों को ताक पर रखकर अपने कारोबार पर केंद्रित हैं, जिनके लिए सरकार को प्रवेश नीति बनाकर सख्ती से लागू करनी चाहिए।
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छोटी उम्र में पढ़ाई थोपने से तर्कशक्ति विकसित नहीं कर पाते बच्चे
जनहित याचिका में कहा गया है कि छोटी उम्र में बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार नहीं होते। स्कूल और अभिभावकों की ओर से उन पर पढ़ाई का बोझ लादने से कई गंभीर परिणाम होते हैं। सीखने की प्रक्रिया से बच्चे ठीक से जुड़ नहीं पाते। इससे बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है। बच्चों में तर्कशक्ति विकसित नहीं हो पाती।
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यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: शोपियां में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को किया ढेर, एक जवान के शहीद होने की सूचना

तीन साल की उम्र में इंटरव्यू खतरनाक
याचिका में कहा गया है कि निजी स्कूलों में दाखिले के लिए तीन साल के बच्चे का इंटरव्यू लिया जा रहा है। इस उम्र में बच्चे के मन में यदि विफल होने की भावना घर करती है तो इसके परिणाम कितने घातक हो सकते हैं, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। बच्चों के लिए यह बेहद पीड़ादायक और डरावना है। दाखिला नीति में ऐसे प्रावधान होने चाहिए कि निजी स्कूलों में दाखिले के लिए हर वर्ग के लोगों को सहजता हो।

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