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कश्मीर में ओलों, तो जम्मू में गोलों का डर

Sun, 24 Apr 2016 11:28 AM IST
Updated Sun, 24 Apr 2016 11:28 AM IST
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jammu and kashmir's farmer facing problem in apple and wheat crop

कुछ दिनों पहले ही घाटी के बागवानों पर मौसम का कहर टूटा। सेब के फूलों पर गिरे ओलों ने किसानों की पिछले साल हुई फसल की बर्बादी से बाहर निकलने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बादाम और अखरोट की फसल को भी ओलों ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 

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वहीं, सांबा के सीमावर्ती इलाके में रह रहे किसानों की गेहूं की फसल इस समय पक कर तैयार है, लेकिन पिछले दो हफ्ते के अंदर ही पाकिस्तान की तरफ से तीन बार गोलाबारी ने उन्हें डरा दिया है। इस डर के बीच वे जान की बाजी लगाकर तेजी से अपनी फसल को समेटने में जुट गए हैं।
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कुछ दिन पहले कश्मीर के कई हिस्सों में जमकर ओले गिरे। इससे सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस समय सेब के पेड़ में फूल आ चुके हैं। ओलों ने फूलों को काफी नुकसान पहुंचाया। बादाम और अखरोट की फसल को भी ओलों से नुकसान पहुंचा है। किसान पहले ही इसे लेकर डर रहे थे और वहीं हुआ है। शोपियां फल उत्पादन एसोसिएशन के प्रधान मीर मोहम्मद अमीन का कहना है कि इस साल सेब में जमकर फूल आए थे। 
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उम्मीद थी की फसल काफी अच्छी होगी। ऐसा होता तो पिछले साल हुए नुकसान की भरपाई होती,  लेकिन ओलों ने बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यदि आगे भी ऐसे ही ओले गिरे तो सेब की फसल को जबरदस्त नुकसान हो जाएगा। करीब 15 फीसदी तक पैदावार ओले गिरने से प्रभावित हुई है। इस समय करीब पांच लाख हेक्टेयर पर कश्मीर संभाग में सेब की फसल लगी हुई है। भविष्य में फिर ओले गिरते हैं तो नुकसान बढ़ जाएगा। 

गेहूं की तैयार फसल समेटने में जुटे किसान

jammu and kashmir's farmer facing problem in apple and wheat crop

सांबा में दस दिन के भीतर तीन बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करने की घटना से सीमांत किसान चिंतित हो उठे हैं। आलम यह है कि देर से गेहूं की कटाई करने वाले सीमावर्ती किसानों ने फसलों को समेटने का काम शुरू कर दिया है। किसानों को पाक गोलाबारी का डर तो है ही, मौसम के बदलते रुख पर भी भरोसा नहीं। क्योंकि पिछले साल पक कर तैयार हो चुकी फसल तक किसान नहीं काट पाए। बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। 

जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों की सीमा पर 70 हजार हेक्टेयर से अधिक का इलाका बार्डर के अधीन आता है। हर साल रबी और खरीफ सीजन की फसलों के लगने से लेकर पकने तक पाक गोलाबारी का साया रहता है। पिछले दस दिन में सांबा में तीन बार संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ। इसे लेकर तीनों जिलों के सीमावर्ती किसान परेशान हैं। 

आरएस पुरा सेक्टर में बासपुर गांव के चौधरी देव राज का कहना है कि पिछली बार गोलाबारी होने पर वह धान की फसल नहीं लगा पाए। इस बार भी सांबा में गोलाबारी शुरू हो गई है। बार्डर पर गोलाबारी जब एक तरफ शुरू होती है तो सारा क्षेत्र इससे प्रभावित होता है। इससे पहले की गोलाबारी हो, उन्होंने अपनी फसल की कटाई शुरू कर दी है। 

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