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J&K Year Ender 2024: जम्मू और कश्मीर में छह साल बाद मिली निर्वाचित सरकार, लेकिन स्टैट्हुड अभी भी अधूरा
Wed, 01 Jan 2025 11:43 AM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू, कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू, कश्मीर
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Wed, 01 Jan 2025 11:43 AM IST
सार
2024 में जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस को बहुमत मिला, लेकिन स्टैट्हुड की बहाली अभी भी लंबित रही।
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जम्मू कश्मीर सरकार
- फोटो : बासित जरगर
विस्तार
जम्मू और कश्मीर में 2024 में विधानसभा चुनावों के साथ ही छह साल बाद राज्य को निर्वाचित सरकार मिली, हालांकि राज्य का दर्जा अभी भी अधूरा रहा क्योंकि शासन की एक हाइब्रिड मॉडल ने लोकतांत्रिक शासन की पूरी बहाली में रुकावट डाली।
जम्मू और कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहे। ये चुनाव अनुच्छेद 370 की धारा को निरस्त करने के बाद पहले चुनाव थे, और जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पहले चुनाव थे। इसके साथ ही यह चुनाव उस वक्त हुए जब प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने चुनावों में भाग लिया।
यह चुनाव इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण था कि इसमें एक पार्टी ने अकेले बहुमत की ओर कदम बढ़ाया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 90 सदस्यीय विधानसभा में 42 सीटें जीत कर अपने अभियान को आगे बढ़ाया जिसमें जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने का मुद्दा प्रमुख था। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
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भाजपा जम्मू क्षेत्र में 43 सीटों में से 29 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन वह एक बार फिर कश्मीर घाटी में कोई सीट नहीं जीत पाई। कांग्रेस को जम्मू क्षेत्र में सुधार की उम्मीद थी। लेकिन उसे केवल छः सीटें मिलीं जिनमें से पांच कश्मीर घाटी से और एक मुस्लिम बहुल राजौरी से थी।
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जम्मू और कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहे। ये चुनाव अनुच्छेद 370 की धारा को निरस्त करने के बाद पहले चुनाव थे, और जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पहले चुनाव थे। इसके साथ ही यह चुनाव उस वक्त हुए जब प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने चुनावों में भाग लिया।
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यह चुनाव इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण था कि इसमें एक पार्टी ने अकेले बहुमत की ओर कदम बढ़ाया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 90 सदस्यीय विधानसभा में 42 सीटें जीत कर अपने अभियान को आगे बढ़ाया जिसमें जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने का मुद्दा प्रमुख था। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
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भाजपा जम्मू क्षेत्र में 43 सीटों में से 29 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन वह एक बार फिर कश्मीर घाटी में कोई सीट नहीं जीत पाई। कांग्रेस को जम्मू क्षेत्र में सुधार की उम्मीद थी। लेकिन उसे केवल छः सीटें मिलीं जिनमें से पांच कश्मीर घाटी से और एक मुस्लिम बहुल राजौरी से थी।
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पार्टी के प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती के राजनीतिक सफर की शुरुआत भी निराशाजनक रही और उन्हें बिजबेहरा में हार का सामना करना पड़ा। इन चुनावों में जम्मू और कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से अभूतपूर्व मतदान हुआ और कई पूर्व अलगाववादी नेताओं या उनके रिश्तेदारों ने भी चुनावों में भाग लिया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में स्टैट्हुड बहाली के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। यह चुनाव 1987 के बाद पहली बार तीन चरणों में संपन्न हुआ। चुनाव के परिणामों में कुछ चौंकाने वाली घटनाएं भी हुई जैसे महबूबा मुफ्ती का दूसरी बार लोकसभा चुनाव हारना।
उमर अब्दुल्ला और उनके कैबिनेट साथी अपनी शक्तियों को सीमित समझते हुए काम कर रहे हैं, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय लेने की शक्तियां हैं। हालांकि, जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति शांतिपूर्ण रही लेकिन आतंकवादियों ने जम्मू क्षेत्र के उधमपुर, कठुआ, पुंछ और राजौरी जिलों में कुछ हमले किए। जम्मू कश्मीर के गांदरबल जिले में गगनगीर में सुरंग निर्माण स्थल पर हुए हमले में सात लोग मारे गए, जिनमें छह प्रवासी श्रमिक और एक स्थानीय डॉक्टर शामिल थे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में स्टैट्हुड बहाली के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। यह चुनाव 1987 के बाद पहली बार तीन चरणों में संपन्न हुआ। चुनाव के परिणामों में कुछ चौंकाने वाली घटनाएं भी हुई जैसे महबूबा मुफ्ती का दूसरी बार लोकसभा चुनाव हारना।
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