मुख्य न्यायाधीश रमन्ना बोले: देश में जटिल और महंगा है न्याय, इसे सभी मिलकर आसान बनाएं
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आम जनता की गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा से ही शांति स्थापित हो सकती है। यह अदालतों का दायित्व बनता है कि वे अधिकारों की रक्षा कर अपने सांविधानिक दायित्वों का निर्वाह करें।
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देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने कहा कि भारत में न्याय प्रक्रिया बेहद जटिल और महंगी है। अदालत में आने वाले याचिकाकर्ता पहले से ही व्यापक मानसिक तनाव में होते हैं। न्याय नहीं मिलता तो वे दूसरे गैर कानूनी तरीकों की तरफ देखने लगते हैं। इसी से अराजकता फैलने लगती है। हमें मिलकर न्याय प्रक्रिया को आसान बनाना होगा। शनिवार को मुख्य न्यायाधीश श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के नए भवन की आधारशिला कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
विवाद के त्वरित निपटारे की व्यवस्था स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी
310 करोड़ की लागत से हाईकोर्ट का नया परिसर 1.7 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में बनकर तैयार होना है। उन्होंने कहा कि हमारा देश अदालतों को समावेशी और आम जनता के लिए आसान पहुंच वाली संस्था बनाने के मामले में बहुत पीछे है जबकि एक स्वस्थ लोकतंत्र में लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और गरिमा की मान्यता बेहद जरूरी है। विवाद के त्वरित निपटारे की व्यवस्था स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है।
अधिकारों की सुरक्षा से ही शांति स्थापित हो सकती
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आम जनता की गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा से ही शांति स्थापित हो सकती है। यह अदालतों का दायित्व बनता है कि वे अधिकारों की रक्षा कर अपने सांविधानिक दायित्वों का निर्वाह करें। मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट के प्रस्तावित नए भवन की परियोजना के लिए न्यायाधीश गीता मित्तल, न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायाधीश मागरे की भूमिका की सराहना की। कहा कि सभी ने इस नए परिसर की परिकल्पना के लिए विशेष प्रयास किए, जो अब साकार हो रहे हैं।
वर्चुअल अदालतें हैं विकल्प रिक्त पदों को भी भरना होगा
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने कहा कि न्यायपालिका को तकनीकी नवाचार की मदद से वर्चुअल अदालतों के विकल्प पर ज्यादा काम करना होगा। हालांकि देश के बहुत से इलाकों में यह संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद हम अदालतों को आधुनिक भारत की बढ़ती जरूरतों के हिसाब से विकसित नहीं कर पाए हैं। ज्यादातर अदालत परिसर जर्जर हालात में हैं, इन पर ध्यान देने की जरूरत है। जजों को पर्याप्त सुरक्षा और ढांचागत सुविधाएं देने के अलावा जिला स्तर पर न्यायपालिका में खाली पड़े 22 फीसदी पदों को जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए
जिला अदालतें हैं न्यायपालिका की नींव, लोक अदालतों से करें निपटारा
देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने जिला अदालतों को न्यायपालिका की बुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि जिला अदालतें न्याय के लिए आने वाले लोगों का पहला संपर्क होती हैं। ऐसे में लोक अदालत जैसे वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र से मामलों के निपटारे को प्राथमिकता देकर जिला अदालतें न्याय प्रक्रिया को आसान बनाएं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय और राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण सक्रियता से काम कर रहे हैं। अदालतों को चाहिए कि वे याचिकाकर्ता को इस आसान विकल्प को अपनाने के लिए तैयार करें। इससे एक तरफ लंबित मामलों की संख्या घटेगी, वहीं न्याय प्रक्रिया सभी तक आसानी से पहुंचेगी।
वकीलों की मदद के बिना अच्छा फैसला संभव नहीं
बेंच और बार दोनों को न्याय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए रमन्ना ने कहा कि वकीलों की मदद के बिना अच्छा फैसला नहीं दिया जा सकता। अधिवक्ताओं को पेशेवर मानकों और कानूनी नैतिकता के सिद्धांतों पर चलना होगा। उन्होंने आशा जताई कि इस महान देश में न्यायपालिका के स्तंभ को मिलकर मजबूत और जनहित के अनुकूल बनाया जाएगा।
मुद्दतों बाद जो आया हूं...
मुख्य न्यायाधीश ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा - मुद्दतों बाद जो आया हूं इस वादी में, इक नया हुस्न, नया रंग नजर आता है... इस शेर के बाद सीजेआई ने कहा कि धरती के स्वर्ग में कई बार आने का मौका मिला है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, मेहमाननवाजी और संस्कृति किसी को भी अपना मुरीद बना लेती है।