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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Charges framed against 8 including Hurriyat leader for selling MBBS seats in Pakistan

टेरर फंडिंग: पाकिस्तान की एमबीबीएस सीटें बेचने में हुर्रियत नेता समेत 8 पर आरोप तय, आतंकवाद बढ़ाने के लिए किया पैंसों का इस्तेमाल 

Wed, 11 May 2022 06:46 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 11 May 2022 06:46 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की एमबीबीएस सीटों को आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए बेचने के संबंध में विशेष कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें कई मामलों में आरोप तय किए गए। जांच में पता चला है कि पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में एमबीबीएस और विभिन्न कॉलेजों में अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में जम्मू-कश्मीर के निवासियों के दाखिले की व्यवस्था के लिए कुछ शैक्षिक परामर्शदाताओं के साथ आरोपियों की मिलीभगत थी।

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Charges framed against 8 including Hurriyat leader for selling MBBS seats in Pakistan
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्रीनगर की एक विशेष अदालत ने प्रमुख हुर्रियत नेता समेत आठ लोगों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की एमबीबीएस सीटों को आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए बेचने के संबंध में आरोप तय किए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत श्रीनगर के विशेष न्यायाधीश मनजीत सिंह मन्हास ने हुर्रियत नेता और साल्वेशन मूवमेंट के अध्यक्ष मोहम्मद अकबर भट उर्फ  जफर अकबर भट तथा कश्मीर के सात अन्य लोगों के खिलाफ  गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए।

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मामले में पांच महीने तक 11 बार सुनवाई हुई

अदालत ने बचाव पक्ष और एसआईए की दलीलें सुनने के बाद आरोप तय किए। एसआईए का प्रतिनिधित्व एक विशेष लोक अभियोजक ने किया। मामले में पांच महीने तक 11 बार सुनवाई हुई। उन्होंने कहा कि छात्रों के अभिभावकों से इस तरह के दाखिले के एवज में बड़ी राशि प्राप्त हुई थी और इसे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने के लिए लगाया गया।

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आरोपियों के घरों और अन्य जगहों पर तलाशी ली

जांच के दौरान एसआईए के अधिकारियों ने अदालत से वारंट हासिल करने के बाद आरोपियों के घरों और अन्य जगहों पर तलाशी ली। इस दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री का विश्लेषण किया गया और यह पाया गया कि एमबीबीएस सहित पाकिस्तान में विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला कराने के लिए आरोपी व्यक्तियों के खातों में रकम का भुगतान हुआ था।

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जुलाई 2020 को किया गया था मामला दर्ज 

27 जुलाई 2020 को गैर कानूनी काम करने वालों के खिलाफ  मामला दर्ज किया गया था। पाकिस्तान के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में एमबीबीएस और विभिन्न कॉलेजों में अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में जम्मू-कश्मीर के निवासियों के दाखिले की व्यवस्था के लिए कुछ शैक्षिक परामर्शदाताओं के साथ आरोपियों की मिलीभगत थी।

इनके खिलाफ आरोप तय

अकबर भट के अलावा मामले में अन्य आरोपी फ ातिमा शाह, अल्ताफ  अहमद भट व मंजूर अहमद शाह (दोनों वर्तमान में पाकिस्तान में), काजी यासिर (फ रार), मोहम्मद अब्दुल्ला शाह, साबजार अहमद शेख और मोहम्मद इकबाल मीर हैं। मीर को जमानत पर रिहा कर दिया गया क्योंकि वह एक लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं।

आतंकी के आश्रित को देते थे तरजीह

एसआईए ने जांच में पाया कि हुर्रियत की सिफारिश में उस अभ्यर्थी को तरजीह देने की बात की जाती थी, जिसके घर से पिता या कोई अन्य आतंकी सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया है। इसके जरिए आतंकियों का मनोबल बनाए रखना मकसद था। हुर्रियत की ओर से सिफारिशी पत्र और अन्य मान्य यात्रा दस्तावेज तैयार करवाए जाते थे।

हुर्रियत के दफ्तर में टेस्ट का झांसा

एसआईए के अनुसार पाकिस्तान में हुर्रियत कांफ्रेंस के दफ्तर में नेशनल टैलेंट सर्च का नाम देकर एक परीक्षा ली जाती थी। यह दर्शाने के लिए कि अभ्यर्थी इस परीक्षा के बाद सीधे एमबीबीएस सीट प्राप्त करने वाले हैं। इस परीक्षा को पाकिस्तान में रह रहे आरोपियों के रिश्तेदार और 1990 में हथियारों की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान गए लोग आयोजित करते थे। यह एक तरह का झांसा था, जिसमें फंसा कर अभ्यर्थी के परिवार से मोटी रकम ली जाती थी।

आतंकवाद के वित्तपोषण में होता था पैसे का इस्तेमाल

अभ्यर्थियों के परिवारों से इस तरह से अर्जित धन इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन देने के लिए किया गया था। जांच के दौरान इस बात के पुख्ता सबूत सामने आए कि इस तरह से प्राप्त धन को अवैध और आतंकवादी गतिविधियों के लिए आतंकवादियों, पथराव करने वालों और ओजीडब्ल्यू को दिया गया।

ऐसी डिग्रियों को अब भारत में मान्यता नहीं

हाल ही में भारत सरकार ने अधिसूचना जारी कर  पाकिस्तान से प्राप्त पेशेवर डिग्री जैसे एमबीबीएस और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों को भारत में मान्यता नहीं दिए जाने की घोषणा की है। 

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