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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Advitiya Bal of Jammu also martyred in MiG-21 accident

IAF MiG Crash: मिग-21 हादसे में जम्मू के अद्वितीय बल भी शहीद, वर्ष 2018 में बने थे फ्लाइंग ऑफिसर

Fri, 29 Jul 2022 02:52 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 29 Jul 2022 02:52 PM IST
सार

आरएस पुरा निवासी अद्वितीय बल ने अपनी पढ़ाई सैनिक स्कूल नगरोटा से की। वर्ष 2014 में एनडीए की परीक्षा पास की थी। वह वर्ष 2018 में वह फ्लाइंग ऑफिसर बने थे।  इस हादसे में हिमाचल प्रदेश के पायलट की मौत हो गई।

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Advitiya Bal of Jammu also martyred in MiG-21 accident
Advitiya Bal Martyr in MiG Accident - फोटो : संवाद

विस्तार

राजस्थान के बाड़मेर जिले के बायतू इलाके में वीरवार रात वायुसेना के मिग-21 विमान के क्रैश होने से आरएस पुरा का लाल फ्लाइट लेफ्टिनेंट अद्वितीय बल (26)भी शहीद हो गया। हादसे में दो पायलट शहीद हुए हैं। घटना की खबर मिलते ही अद्वितीय के आरएस पुरा के गांव जिंदड़ मेहलू में मातम छा गया।

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बेटे की मौत की खबर से बदहवास मां प्रवीण बल को संभालना मुश्किल हो गया। विलाप में डूबी मां कहती रही ‘मेरा बच्चा चला गया, मुझे भी नहीं जीना’। परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रो कर बुरा हाल है। अद्वितीय बल का छोटा भाई हर्षित बल इंजीनियर है।
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इन दिनों वह सांबा में एक कंपनी में कार्यरत है। दादा व दादी पोते की तस्वीर हाथों में लेकर इस हादसे के चलते दुखी हैं। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को अद्वितीय बल का जन्मदिन था। उस दिन भी बात हुई थी और अगस्त के पहले सप्ताह छुट्टी पर आने केेे लिए कहा था, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
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बेटे की मिग-21 हादसे में जान चले जाने की जानकारी मिलने पर पिता सर्वण बल व भाई हर्षित का मामा दिल्ली के लिए रवाना हो गए। चाचा कर्ण बल ने बताया कि पिता सेना में कार्यरत थे। बेटा बचपन में अक्सर सेना में भर्ती होने के लिए कहता था। उसमें देशप्रेम कूट-कूट कर भरा था।

अद्वितीय के इस प्रकार चले जाने को परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटना बताया। बताया जा रहा है कि वायुसेना का यह विमान प्रशिक्षण उड़ान पर था और वीरवार रात 9.10 बजे यह हादसा हुआ। वायुसेना का दो सीटों वाला मिग-21 ट्रेनर विमान शाम राजस्थान के उतरलाई हवाई अड्डे से प्रशिक्षण उड़ान के लिए रवाना हुआ था और रात करीब 9.10 बजे बाड़मेर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

मेरी बात मान लेता तो टल जाता हादसा

आरएस पुरा। शहीद अद्वितीय बल की मां ने कहा - अद्वितीय अगर उसकी बात मान कर अपने अधिकारी से फोन पर मेरी बात करवा देता तो यह हादसा टल सकता था। मां प्रवीण कुमारी ने कहा कि तीन दिन पहले अद्वितीय बल का फोन आया था। उसने अद्वितीय को छुट्टी पर आने को कहा था। अद्वितीय ने कहा कि अभी ट्रेनिंग चल रही है। वो नहीं आ सकता है। उसने अद्वितीय से कहा था कि वो अपने कमांडिंग अफसर से बात कराए। वो उन्हें छुट्टी के लिए कहेंगी। शायद वे मान जाते, लेकिन अद्वितीय ने ऐसा नहीं किया। बिलखती मां ने कहा कि अगर अद्वितीय ने बात मान ली होती तो शायद यह हादसा टल जाता और उसका बेटा बच जाता। 

सैनिक स्कूल नगरोटा से की पढ़ाई, 2014 में एनडीए परीक्षा पास की

अद्वितीय ने सैनिक स्कूल नगरोटा में कक्षा छह में दाखिला लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2014 में एनडीए की परीक्षा पास की और वर्ष 2018 में अद्वितीय फ्लाइंग ऑफिसर बने। सैनिक स्कूल में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट अद्वितीय के मित्र रहे डॉ. पारूल शर्मा ने कहा कि अद्वितीय स्कूल में हमारे हाउस कैप्टन था। उसका हमेशा पढ़ाई पर ही ध्यान रहता था। खेलों में अधिक रुचि नहीं थी और धर्म के प्रति गहरी आस्था थी। पारूल ने कहा कि अद्वितीय से बातचीत होती रहती थी। लड़ाकू विमान मिग-21 क्रैश होने पर अद्वितीय के चले जाने का दुख है। उन्होंने इस दुख की घड़ी में अद्वितीय के परिजनों से संवेदनाएं व्यक्त की।

शहीद के चाचा बोले- बेड़े से बाहर हों ये विमान

अद्वितीय बल के चाचा कर्ण बल ने कहा कि पुराने मिग-21 विमान लगातार हादसे का शिकार हो रहे हैं। ये बहुत पुराने हो चुके हैं। वायुसेना को इसे अपने बेड़े से बाहर कर देना चाहिए। अद्वितीय की शहादत के लिए भी मिग-21 की पुरानी तकनीक ही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस पर फौरन फैसला लेना चाहिए। यह कितना असहनीय है कि एक छोटे से गांव से कड़ा संघर्ष कर वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने वाला होनहार आज इस तरह से शहीद हो गया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने भतीजे अद्वितीय पर गर्व है, जिसने क्षेत्र व परिवार का नाम रोशन किया, लेकिन इस तरह उसका चले जाना कभी नहीं भूल पाएगा।

बचपन में उड़ते जहाज देखता रहता था

भाई हर्षित ने रुंधे गले से कहा कि अद्वितीय जब छोटा था, आसमान में उड़ते जहाज देख कर कहता था कि वह भी एक दिन पायलट बन देश की सेवा करेगा। किसे मालूम था कि वही आकाश उसे निगल जाएगा। वहीं, गांव के शाम लाल गोरखा ने बताया कि अद्वितीय एक होनहार युवक था। बचपन से कड़ी मेहनत कर शिक्षा प्राप्त की। पायलट बनने की चाहत होने पर उस मुकाम तक भी पहुंचा, लेकिन दुखद घटना के चलते जान चली गई।

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