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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   mayawati and BSP status in jammu

माया ने डाले दलित और पिछड़ा वोट बैंक पर डोरे

Thu, 03 Apr 2014 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Thu, 03 Apr 2014 10:55 AM IST
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mayawati and BSP status in jammu

बसपा सुप्रीमो मायावती जम्मू कश्मीर के दलित और पिछड़ा वोट बैंक पर डोरे डाल रही हैं। बसपा का जम्मू कश्मीर में कोई खास जनाधार नहीं रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश से बाहर मिलने वाले वोट से ही उसे राष्ट्रीय दल का दर्जा हासिल है।

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लिहाजा जम्मू कश्मीर भी बसपा के लिए महत्वपूर्ण है। रियासत में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के अलावा राष्ट्रीय पार्टियों में कांग्रेस और भाजपा का मजबूत जनाधार है। अब बसपा लगातार चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर एक ताकत के रूप में उभरने की कोशिश में जुटी है।
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बसपा के लिए जम्मू कश्मीर में 1996 का विधानसभा चुनाव लाभदायक रहा जब उसके चार प्रत्याशी जीतकर आए थे। विधानसभा में चार विधायकों की मौजूदगी ने बसपा के विस्तार की संभावना को बल दिया। तब सात सीटों पर इसके प्रत्याशी दूसरे नम्बर पर आए थे।
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पार्टी सुप्रीमो को आभास होगा कि जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव में उन्हें शायद ही कोई बड़ी सफलता मिल पाए लेकिन अभी की गई मेहनत अगले विधानसभा के लिए आधार बना सकती है।

विधानसभा चुनाव में बसपा की उन ग्यारह सीटों पर ज्यादा जोर लगाएगी जहां से उनके प्रत्याशी या तो सफल रहे या फिर दूसरे स्थान पर कब्जा किया।

पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा को पूरी रियायत में 3.10 प्रतिशत मत मिले थे। यह पैंथर्स पार्टी को मिले 2.81 प्रतिशत वोट से अधिक थे। बसपा ने रियासत में सीपीआई, लोजपा और सपा से अधिक वोट प्रतिशत हासिल किए।

2009 के चुनाव में कांग्रेस को 24.67, नेशनल कांफ्रेंस को 19.11, पीडीपी को 20.05 और भाजपा को 18.61 प्रतिशत वोट मिले। निर्दलीय और अन्य पार्टियों के खाते में 10.34 प्रतिशत वोट थे। बसपा इस बात पर संतोष कर सकती है कि सपा और लोजपा जैसे उसके प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले वह बेहतर प्रदर्शन में सफल रही थी।

पिछले चुनाव में बसपा को जम्मू में कुल 49988, उधमपुर में 21445 वोट मिले। बसपा इन सीटों पर पचास हजार की मत संख्या पार नहीं कर सकी। कश्मीर में प्रदर्शन और खराब था। बसपा को अनंतनाग में सिर्फ 2676, श्रीनगर में 2409 और बारामूला में 4391 वोट मिले पाए थे।


मंगलवार को जम्मू की चुनावी सभा में मायावती ने बैलेंस आफ पावर की बात कही। राष्ट्रीय स्तर पर भी बसपा सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाने की मंशा रखती है। बसपा सुप्रीमो का प्रयास है कि अगामी विधानसभा चुनाव तक जम्मू कश्मीर में भी ऐसी स्थिति बनाने में सफलता हासिल कर सके। इस रणनीति को सफल बनाने के लिए दलित, पिछड़ा, धार्मिक अल्पसंख्यक और अन्य कमजोर वर्ग को एकजुट करने का प्रयास है।

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