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बारिश नहीं होने से खेती बर्बाद होने का खतरा
Updated Thu, 30 Nov 2017 01:22 AM IST
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कठुआ। जिले में बारिश से होने वाली सिंचाई पर निर्भर लगभग 67 फीसदी कृषि योग्य भूमि इस बार भी सूखे की चपेट में है। पिछले 85 दिन से बारिश न होने से किसान परेशान हैं। बारिश न होने के कारण गेहूं की बुआई का समय भी निकल गया है। सरसों, चने और तोरिया की फसल अब लगानी नामुमकिन हो चुकी है। कृषि विभाग ने जहां किसानों के लिए बीज मंगवा लिए हैं वहीं बारिश न होने से किसान बीज खरीदने भी नहीं पहुंच रहे हैं। जिन किसानों ने बारिश की संभावना को देखते ही बीज खरीदे उनका पहले ही नुकसान हो चुका है। कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वय डा. अमरीश वैद की मानें तो अब किसानों के पास बारिश होने की संभावना में मात्र लेट वैराइटी में लगने वाली गेहूं ही एक विकल्प बचा है। पंद्रह दिसंबर तक जिला के बारिश से सिंचाई पर निर्भर भूमि वाले किसान राज 3077, राज 3765 और पीबीडूब्लू 175 लगा सकते। बीते साल भी सौ दिन का आंकड़ा पार करने के बाद दिसंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश हुई थी। ऐसे में बुआई हुई फसल सिर्फ भूसे के ही काम आ सकी थी। लगातार दो सीजन में फसल खराब होने से किसानों की कमर टूटती जा रही है।
दो सितंबर को हुई थी बारिश
सितंबर और अक्तूबर की ही तरह नवंबर महीना भी बारिश की संभावनाओं से कोसों दूर है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले सप्ताह में भी बारिश की संभावना शून्य है। ऐसे में जहां सीधे तौर पर रबी की खेती की समय पर होने वाली बुआई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है वहीं खेती का यह सीजन भी पिछले साल की तरह चौपट होने की कगार पर है। दो सितंबर को जिला में रिकार्ड हुई आखिरी बारिश थी।
पिछले साल से भी कम हुई इस साल बारिश
वर्ष 2016 के दौरान जहां साल भर में 1541 एमएम बारिश रिकार्ड की गई थी वहीं वर्ष 2017 में अबतक बारिश का पैमाना 1000 एमएम को भी पार नहीं कर पाया है। ऐसे में साफ है कि धरती प्यासी है और फसल की उर्वरता पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। मौसम में हो रहा इस तरह का बदलाव सूखे की ओर ले जाता दिख रहा है। इस साल जनवरी में जहां 1.5एमएम बारिश रिकार्ड की गई वहीं फरवरी में 4.6, मार्च में 49.2 एमएम बारिश हुई। अप्रैल का महीना सूखा गुजरा तो मई में 52 एमएम बारिश हुई। जून में 135.2, जुलाई में 281.8 और अगस्त में 463.8 एमएम बारिश होने से किसानों को इस साल के आखिरी महीनों में भी बारिश की जरूरत अनुसार अच्छी संभावनाएं नजर आ रही थीं। लेकिन सितंबर, अक्तूबर और नवंबर का महीना सूखा निकल गया।
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दो सितंबर को हुई थी बारिश
सितंबर और अक्तूबर की ही तरह नवंबर महीना भी बारिश की संभावनाओं से कोसों दूर है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले सप्ताह में भी बारिश की संभावना शून्य है। ऐसे में जहां सीधे तौर पर रबी की खेती की समय पर होने वाली बुआई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है वहीं खेती का यह सीजन भी पिछले साल की तरह चौपट होने की कगार पर है। दो सितंबर को जिला में रिकार्ड हुई आखिरी बारिश थी।
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पिछले साल से भी कम हुई इस साल बारिश
वर्ष 2016 के दौरान जहां साल भर में 1541 एमएम बारिश रिकार्ड की गई थी वहीं वर्ष 2017 में अबतक बारिश का पैमाना 1000 एमएम को भी पार नहीं कर पाया है। ऐसे में साफ है कि धरती प्यासी है और फसल की उर्वरता पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। मौसम में हो रहा इस तरह का बदलाव सूखे की ओर ले जाता दिख रहा है। इस साल जनवरी में जहां 1.5एमएम बारिश रिकार्ड की गई वहीं फरवरी में 4.6, मार्च में 49.2 एमएम बारिश हुई। अप्रैल का महीना सूखा गुजरा तो मई में 52 एमएम बारिश हुई। जून में 135.2, जुलाई में 281.8 और अगस्त में 463.8 एमएम बारिश होने से किसानों को इस साल के आखिरी महीनों में भी बारिश की जरूरत अनुसार अच्छी संभावनाएं नजर आ रही थीं। लेकिन सितंबर, अक्तूबर और नवंबर का महीना सूखा निकल गया।
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