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भक्तों की उपासना पर कैसा प्रतिबंध !
Updated Fri, 15 Dec 2017 01:21 AM IST
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जम्मू। पवित्र अमरनाथ गुफा को शांति क्षेत्र घोषित करने के साथ बाबा बर्फानी के समक्ष मंत्रोच्चार, जयकारे और घंटियां न बजाने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर साधु समाज, हिंदुत्व और सनातन धर्म से जुड़े संगठनों ने तीखी प्रक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि भक्तों की उपासना पर किसी तरह से कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे आदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहित हुई हैं।
वैष्णो साधु समाज के प्रधान व श्री राम मंदिर पुरानी मंडी के महंत महामंडलेश्वर रामेश्वर दास ने कहा कि जब देश द्रोह, झूठ, चोरी, छल, मानवता का संहार करने जैसे कृत्यों में कोई आदेश लागू नहीं होता है तो भला भगवान के द्वार पर उपासना करने से ऐसे आदेश क्यों दिए जा रहे हैं। इसका साधु समाज कड़ा विरोध करता है। सनातन धर्म इसे कभी स्वीकार नहीं करता है। गलत मानसिकता परंपराओं से खिलवाड़ किया जा रहा है। सनातन धर्म सभा के प्रधान बोधराज शर्मा का कहना है कि हिंदू सनातन धर्म सबसे पुराना धर्म है। मंत्रोच्चारण, हवन, जयघोष आदि से पर्यावरण शुद्ध होता है। ऐसे में अमरनाथ गुफा को शांति क्षेत्र घोषित करने का क्या तुक है। एनजीटी को ऐसे आदेश लागू करने का कोई अधिकार नहीं है। लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए न्यायपालिका को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर आदेश लागू करने चाहिए। साधु समाज के प्रधान व श्री रणवीरेश्वर मंदिर के महंत ऋषि वन का कहना है कि भगवान के द्वार पर ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए प्रयास को समझा जा सकता है, लेकिन भक्तों की उपासना पर आप कैसे प्रतिबंध लगा सकते हैं। वह श्रद्धा और मन से प्रभु के दर्शन के लिए जाता है। भक्तों के मुख से निकलने वाले जयघोष को नहीं रोका जा सकता है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण और संविधान से हटकर अनाप शाप बोलने वाले नेताओं के बोलने पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। पीरखो मंदिर के महंत रविनाथ ने कहा कि एनजीटी के आदेश से हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। भगवान के दरबार में जयघोष लगाने पर प्रतिबंध गलत है। भगवान के समक्ष अगर मंत्रोच्चारण नहीं किया जाएगा तो कहां किया जाए। शिव सेना (बाला साहेब ठाकरे) के प्रदेश प्रधान डिंपी कोहली का कहना है कि एनजीटी लगातार हिंदुओं के तीर्थ स्थलों को लेकर ऐसे आदेश जारी कर रहा है। यह एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। पवित्र गुफा में शिवलिंग को अधिक देर तक विराजमान रखने के लिए वैज्ञानिक उपाय किए जाने चाहिए न कि भक्तों की आस्था पर सीधे प्रतिबंध लगाया जाए। शिव सेना ऐसे आदेश का विरोध करती है। जयघोष और मंत्रोच्चार से किसी तरह से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सहमंत्री अजय मन्हास का कहना है कि एनजीटी एक साजिश के तहत हिंदुओं के तीर्थ स्थलों पर ऐसे विवादास्पद आदेश लागू कर रहा है। इससे देशभर से माहौल खराब होगा। क्या हर तरह से प्रदूषण के लिए सिर्फ हिंदू समाज जिम्मेदार है।
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वैष्णो साधु समाज के प्रधान व श्री राम मंदिर पुरानी मंडी के महंत महामंडलेश्वर रामेश्वर दास ने कहा कि जब देश द्रोह, झूठ, चोरी, छल, मानवता का संहार करने जैसे कृत्यों में कोई आदेश लागू नहीं होता है तो भला भगवान के द्वार पर उपासना करने से ऐसे आदेश क्यों दिए जा रहे हैं। इसका साधु समाज कड़ा विरोध करता है। सनातन धर्म इसे कभी स्वीकार नहीं करता है। गलत मानसिकता परंपराओं से खिलवाड़ किया जा रहा है। सनातन धर्म सभा के प्रधान बोधराज शर्मा का कहना है कि हिंदू सनातन धर्म सबसे पुराना धर्म है। मंत्रोच्चारण, हवन, जयघोष आदि से पर्यावरण शुद्ध होता है। ऐसे में अमरनाथ गुफा को शांति क्षेत्र घोषित करने का क्या तुक है। एनजीटी को ऐसे आदेश लागू करने का कोई अधिकार नहीं है। लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए न्यायपालिका को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर आदेश लागू करने चाहिए। साधु समाज के प्रधान व श्री रणवीरेश्वर मंदिर के महंत ऋषि वन का कहना है कि भगवान के द्वार पर ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए प्रयास को समझा जा सकता है, लेकिन भक्तों की उपासना पर आप कैसे प्रतिबंध लगा सकते हैं। वह श्रद्धा और मन से प्रभु के दर्शन के लिए जाता है। भक्तों के मुख से निकलने वाले जयघोष को नहीं रोका जा सकता है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण और संविधान से हटकर अनाप शाप बोलने वाले नेताओं के बोलने पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। पीरखो मंदिर के महंत रविनाथ ने कहा कि एनजीटी के आदेश से हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। भगवान के दरबार में जयघोष लगाने पर प्रतिबंध गलत है। भगवान के समक्ष अगर मंत्रोच्चारण नहीं किया जाएगा तो कहां किया जाए। शिव सेना (बाला साहेब ठाकरे) के प्रदेश प्रधान डिंपी कोहली का कहना है कि एनजीटी लगातार हिंदुओं के तीर्थ स्थलों को लेकर ऐसे आदेश जारी कर रहा है। यह एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। पवित्र गुफा में शिवलिंग को अधिक देर तक विराजमान रखने के लिए वैज्ञानिक उपाय किए जाने चाहिए न कि भक्तों की आस्था पर सीधे प्रतिबंध लगाया जाए। शिव सेना ऐसे आदेश का विरोध करती है। जयघोष और मंत्रोच्चार से किसी तरह से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सहमंत्री अजय मन्हास का कहना है कि एनजीटी एक साजिश के तहत हिंदुओं के तीर्थ स्थलों पर ऐसे विवादास्पद आदेश लागू कर रहा है। इससे देशभर से माहौल खराब होगा। क्या हर तरह से प्रदूषण के लिए सिर्फ हिंदू समाज जिम्मेदार है।
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