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बारिश नहीं होने से प्रभावित हो सकती है रबी की बुआई
Updated Mon, 13 Nov 2017 12:34 AM IST
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कठुआ।
खरीफ की फसल की कटाई के बाद अब किसानों ने रबी की फसल लगाने की तैयारी कर ली है, लेकिन बारिश नहीं होने से बुआई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आलम यह है कि बारिश न होने के कारण जहां फसलों को नुकसान होता है तो सरकार नुकसान के लिए किसानों को मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं देती।
जिला के एक लाख के अधिक किसान परिवार बिना पानी के हर साल लगभग 51 प्रतिशत फसल का नुकसान झेलते हैं। तीन लाख कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई व्यवस्था न होने के कारण किसानों को आसामन से बरसने वाली खुदा की रहमत रूपी बारिश पर ही निर्भर होना पड़ता है। यानि अगर किसी भी सीजन में बारिश कम हुई या नहीं हुई तो फसल बर्बाद होना पक्का है। ऐसे में किसानाें के लिए कृषि करना अब मुश्किल होता जा रहा है। किसानों का कहना है कि एक तो मौसम की मार तो पड़ती ही है उस पर विभाग भी किसानों की समस्याओं का समाधान करने में असमर्थ हैं। इस वर्ष रबी की फसल लगाने से पूर्व जरूरी बारिश की बूंदों का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
राजस्व विभाग से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि हर वर्ष पचास प्रतिशत से अधिक की फसल बिना सिंचाई के कारण और बारिश कम होेने के चलते बर्बाद हो जाती है। ऐसे में किसानों को बारिश पर ही निर्भर होना पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार कठुआ तहसील के सबसे अधिक भूमि पर सिंचाई नहीं हो पाती है। कठुआ में 78 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई के बिना किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। बिलावर में 57 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं डिंगा अंब तहसील में 13 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई नहीं हो पाती है। ऐसे ही पूरे जिला कठुआ की कुल 11 तहसीलों में 3,94,330 कनाल और 10 मरला भूमि पर सिंचाई के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है।
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तहसील असिंचित भूमि
(कनाल-मरला)
महानपुर 25864-11
बनी 26265-00
बसोहली 38120-19
बिलावर 57792-00
लोहाई-मल्हार 33680-00
रामकोट 54320-00
डिंगा अंब 13160-00
हीरानगर 50440-00
मढ़ीन 15736-00
कठुआ 78952-00
नगरी 00
कुल 394330-10
महज योजना बनाने से किसानों की आय दोगुनी नहीं की जा सकती
कठुआ। रविवार को आल जेएंडके किसान संगठन के सदस्यों ने गांव नंगल और जगेंई में बैठक कर किसानों की समस्याओं पर चर्चा की। इसके साथ ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार को कोसा। किसानों का नेतृत्व कर रहे घनश्याम शर्मा ने कहा कि भाजपा-पीडीपी सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करने में नाकाम हुई है। सरकार ने कृषि सिंचाई योजना बनाई, लेकिन जिला कठुआ में इसका कोई लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि जब एक जिला में बिना सिंचाई के 51 प्रतिशत फसल को पानी ही नहीं मिल रहा तो योजना का क्या लाभ। इस पर बरसात के दिनों में उज्ज और अन्य नालों के साथ लगी कृषि योग्य भूमि का कटाव हर वर्ष होता है और सरकार ने अभी तक एक भी किसानों को मुआवजा नहीं दिया। ऐसे में वह किसान किस प्रकार अपनी रोजी-रोटी चलाता होगा, सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल योजना बनाने से किसानों की आय दोगुनी नहीं की जा सकती। इसके लिए जमीनी स्तर पर योजना को लागू करना होगा। इलाके के हिसाब से योजना में संशोधन भी करना होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से बर्बाद हो रही फसलों का मुआवजा सरकार ने आज तक नहीं दिया। किसानों को पेंशन देने की मांग पर सरकार ने कोई गौर नहीं किया। ऐसे में मात्र आश्वासन और रैलियों में बड़े-बड़े दावों-वादों से किसानों को गुमराह करने की कोशिश सरकार न करे।
बदलता मौसम सेहत को पहुंचा रहा नुकसान
हीरानगर। बिन बारिश पड़ रही सर्दी बुजर्गों व बच्चों के लिए आफत बननी शुरू हो गई है, जिसका झोलाछाप डाक्टर खूब उठा रहे हैं। किसान गेहूं की फसल की बुआई के लिए बारिश को तरस रहे हैं और बच्चे व बजुर्ग बारिश न होने से ज़ुकाम व खांसी जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। गांवों और कस्बों में बैठे झोलाछाप डाक्टरों के लिए यह कमाई का सीजन है, जिसका वे भरपूर फायदा उठा रहे हैं। इन्हीं डाक्टरों से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष ठीक मौसम न होने के कारण खांसी व सर्दी के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सुबह-शाम के समय पड़ रही सूखी सर्दी इसका मुख्य कारण है। ब्यूरो
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खरीफ की फसल की कटाई के बाद अब किसानों ने रबी की फसल लगाने की तैयारी कर ली है, लेकिन बारिश नहीं होने से बुआई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आलम यह है कि बारिश न होने के कारण जहां फसलों को नुकसान होता है तो सरकार नुकसान के लिए किसानों को मुआवजे के नाम पर कुछ नहीं देती।
जिला के एक लाख के अधिक किसान परिवार बिना पानी के हर साल लगभग 51 प्रतिशत फसल का नुकसान झेलते हैं। तीन लाख कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई व्यवस्था न होने के कारण किसानों को आसामन से बरसने वाली खुदा की रहमत रूपी बारिश पर ही निर्भर होना पड़ता है। यानि अगर किसी भी सीजन में बारिश कम हुई या नहीं हुई तो फसल बर्बाद होना पक्का है। ऐसे में किसानाें के लिए कृषि करना अब मुश्किल होता जा रहा है। किसानों का कहना है कि एक तो मौसम की मार तो पड़ती ही है उस पर विभाग भी किसानों की समस्याओं का समाधान करने में असमर्थ हैं। इस वर्ष रबी की फसल लगाने से पूर्व जरूरी बारिश की बूंदों का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
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राजस्व विभाग से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि हर वर्ष पचास प्रतिशत से अधिक की फसल बिना सिंचाई के कारण और बारिश कम होेने के चलते बर्बाद हो जाती है। ऐसे में किसानों को बारिश पर ही निर्भर होना पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार कठुआ तहसील के सबसे अधिक भूमि पर सिंचाई नहीं हो पाती है। कठुआ में 78 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई के बिना किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। बिलावर में 57 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं डिंगा अंब तहसील में 13 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई नहीं हो पाती है। ऐसे ही पूरे जिला कठुआ की कुल 11 तहसीलों में 3,94,330 कनाल और 10 मरला भूमि पर सिंचाई के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है।
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तहसील असिंचित भूमि
(कनाल-मरला)
महानपुर 25864-11
बनी 26265-00
बसोहली 38120-19
बिलावर 57792-00
लोहाई-मल्हार 33680-00
रामकोट 54320-00
डिंगा अंब 13160-00
हीरानगर 50440-00
मढ़ीन 15736-00
कठुआ 78952-00
नगरी 00
कुल 394330-10
महज योजना बनाने से किसानों की आय दोगुनी नहीं की जा सकती
कठुआ। रविवार को आल जेएंडके किसान संगठन के सदस्यों ने गांव नंगल और जगेंई में बैठक कर किसानों की समस्याओं पर चर्चा की। इसके साथ ही सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार को कोसा। किसानों का नेतृत्व कर रहे घनश्याम शर्मा ने कहा कि भाजपा-पीडीपी सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करने में नाकाम हुई है। सरकार ने कृषि सिंचाई योजना बनाई, लेकिन जिला कठुआ में इसका कोई लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि जब एक जिला में बिना सिंचाई के 51 प्रतिशत फसल को पानी ही नहीं मिल रहा तो योजना का क्या लाभ। इस पर बरसात के दिनों में उज्ज और अन्य नालों के साथ लगी कृषि योग्य भूमि का कटाव हर वर्ष होता है और सरकार ने अभी तक एक भी किसानों को मुआवजा नहीं दिया। ऐसे में वह किसान किस प्रकार अपनी रोजी-रोटी चलाता होगा, सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल योजना बनाने से किसानों की आय दोगुनी नहीं की जा सकती। इसके लिए जमीनी स्तर पर योजना को लागू करना होगा। इलाके के हिसाब से योजना में संशोधन भी करना होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से बर्बाद हो रही फसलों का मुआवजा सरकार ने आज तक नहीं दिया। किसानों को पेंशन देने की मांग पर सरकार ने कोई गौर नहीं किया। ऐसे में मात्र आश्वासन और रैलियों में बड़े-बड़े दावों-वादों से किसानों को गुमराह करने की कोशिश सरकार न करे।
बदलता मौसम सेहत को पहुंचा रहा नुकसान
हीरानगर। बिन बारिश पड़ रही सर्दी बुजर्गों व बच्चों के लिए आफत बननी शुरू हो गई है, जिसका झोलाछाप डाक्टर खूब उठा रहे हैं। किसान गेहूं की फसल की बुआई के लिए बारिश को तरस रहे हैं और बच्चे व बजुर्ग बारिश न होने से ज़ुकाम व खांसी जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। गांवों और कस्बों में बैठे झोलाछाप डाक्टरों के लिए यह कमाई का सीजन है, जिसका वे भरपूर फायदा उठा रहे हैं। इन्हीं डाक्टरों से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष ठीक मौसम न होने के कारण खांसी व सर्दी के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सुबह-शाम के समय पड़ रही सूखी सर्दी इसका मुख्य कारण है। ब्यूरो