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पंचायती चुनाव के बाद सक्रिए हुए नेता
Updated Thu, 28 Dec 2017 01:33 AM IST
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हीरानगर।
15 फरवरी से पंचायत चुनाव करवाने की घोषणा के बाद क्षेत्र में सियासी सक्रियता बढ़ गई है। मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए नेताओं ने जनसंपर्क बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं, जिन समस्याओं का लोग लंबे समय से सामना कर रहे हैं, एक बार फिर उनका समाधान करवाने के लिए वादों की झड़ी लगनी शुरू हो गई है।
हीरानगर सब डिवीजन में कुल 48 पंचायतें हैं। सभी पंचायतों में क्षेत्रीय नेता सरकार के फैसले के बाद हरकत में आ गए हैं। ये नेता अपने-अपने क्षेत्र की पंचायतों के विकास का दम भर रहे हैं। वहीं पहले यह चुनाव जीत चुके नेता अपनी पिछली गलतियों को सुधारने की बात करके जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सल्लन पंचायत के नितिन शर्मा, पथवाल के सुरेश शर्मा, कूटा के अमन कुमार, छन्न अरोड़ियां के पुरुषोत्तम लाल, सहसवां के राजेश सिंह आदि ने बताया कि पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद जो नेता कभी अपने क्षेत्र की जनता के बीच नजर नहीं आते थे, वही आज उसके हर सुख-दुख में शरीक होने लगे हैं। वे लोगों के घर पहुंचकर उनके साथ समय बिता रहे हैं और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, जनता ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। फिलहाल मौन ही उसका सबसे बड़ा हथियार है। मौन रहकर वह हर आने वाले नेता को सुन रही है और उन्हें अपनी उम्मीदों की कसौटी पर परख रही है। लोगों ने कहा कि कौन सही है और कौन गलत, इसका फैसला समय आने पर हो जाएगा। वैसे पंचायत चुनाव को लेकर इस बार युवाओं में जबरदस्त रुझान देखने को मिल रहा है। इसकी एक वजह यह है कि बड़ी संख्या में युवाओं के पास रोजगार नहीं है, इसलिए वे पंचायत चुनाव को लेकर बड़े आशान्वित नजर आ रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि शायद इस चुनाव से उनकी बेरोजगारी की समस्या का कुछ समाधान हो सकेगा।
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15 फरवरी से पंचायत चुनाव करवाने की घोषणा के बाद क्षेत्र में सियासी सक्रियता बढ़ गई है। मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए नेताओं ने जनसंपर्क बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं, जिन समस्याओं का लोग लंबे समय से सामना कर रहे हैं, एक बार फिर उनका समाधान करवाने के लिए वादों की झड़ी लगनी शुरू हो गई है।
हीरानगर सब डिवीजन में कुल 48 पंचायतें हैं। सभी पंचायतों में क्षेत्रीय नेता सरकार के फैसले के बाद हरकत में आ गए हैं। ये नेता अपने-अपने क्षेत्र की पंचायतों के विकास का दम भर रहे हैं। वहीं पहले यह चुनाव जीत चुके नेता अपनी पिछली गलतियों को सुधारने की बात करके जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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सल्लन पंचायत के नितिन शर्मा, पथवाल के सुरेश शर्मा, कूटा के अमन कुमार, छन्न अरोड़ियां के पुरुषोत्तम लाल, सहसवां के राजेश सिंह आदि ने बताया कि पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद जो नेता कभी अपने क्षेत्र की जनता के बीच नजर नहीं आते थे, वही आज उसके हर सुख-दुख में शरीक होने लगे हैं। वे लोगों के घर पहुंचकर उनके साथ समय बिता रहे हैं और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, जनता ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। फिलहाल मौन ही उसका सबसे बड़ा हथियार है। मौन रहकर वह हर आने वाले नेता को सुन रही है और उन्हें अपनी उम्मीदों की कसौटी पर परख रही है। लोगों ने कहा कि कौन सही है और कौन गलत, इसका फैसला समय आने पर हो जाएगा। वैसे पंचायत चुनाव को लेकर इस बार युवाओं में जबरदस्त रुझान देखने को मिल रहा है। इसकी एक वजह यह है कि बड़ी संख्या में युवाओं के पास रोजगार नहीं है, इसलिए वे पंचायत चुनाव को लेकर बड़े आशान्वित नजर आ रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि शायद इस चुनाव से उनकी बेरोजगारी की समस्या का कुछ समाधान हो सकेगा।
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