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ग्रामीण डाक सेवकों ने मांगों पर चर्चा की
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:13 AM IST
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कठुआ।
वेतन और पेंशन विसंगतियों को दूर करने की मांग सरकार द्वारा अभी तक पूरी न किए जाने पर वीरवार को आल इंडिया ग्रामीण डाक सेवक यूनियन की कठुआ इकाई द्वारा बैठक का आयोजन कर सरकार ने मांगों पूरी करने की गुहार लगाई गई। इसके साथ ही सदस्यों ने पीएमओ मंत्री को भी एक ज्ञापन सौंपा और सरकार तक उनकी मांगें पहुंचाने की मांग की।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रधान ओंकार सिंह और महासचिव हरि कृष्ण शर्मा ने कहा कि सरकार से उन्होंने सातवें वेतन आयोग को लागू करने के साथ साथ पेंशन देने की मांग की थी। लेकिन, इन मांगों को सरकार ने अभी तक पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि डाक सेवक चौबीस घ्ंाटे काम करते हैं। उनके लिए भी आठ घंटे का काम किया जाए, जिसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों और केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि वेतन में भारी विसंगतियां हैं। एक डाक सेवक को सात हजार तो दूसरे को अन्य सर्किल में बीस हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जो भेदभाव है और सरकार को इसे बंद करना होगा। उस पर विभाग द्वारा ग्रामीण डाक सेवकों को हर समय काम करने को कहा जाता है। उन्होंने कहा कि वह भी इंसान हैं और विश्राम उनका हक है। लेकिन, अभी तक समय में संशोधन नहीं किया गया। उन्होंने पीएमओं में मंत्री को दिल्ली में वित्त मंत्रालय के पास पड़ी उनकी फाइल को आगे बढ़ाने की मांग की, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो पाए।
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वेतन और पेंशन विसंगतियों को दूर करने की मांग सरकार द्वारा अभी तक पूरी न किए जाने पर वीरवार को आल इंडिया ग्रामीण डाक सेवक यूनियन की कठुआ इकाई द्वारा बैठक का आयोजन कर सरकार ने मांगों पूरी करने की गुहार लगाई गई। इसके साथ ही सदस्यों ने पीएमओ मंत्री को भी एक ज्ञापन सौंपा और सरकार तक उनकी मांगें पहुंचाने की मांग की।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रधान ओंकार सिंह और महासचिव हरि कृष्ण शर्मा ने कहा कि सरकार से उन्होंने सातवें वेतन आयोग को लागू करने के साथ साथ पेंशन देने की मांग की थी। लेकिन, इन मांगों को सरकार ने अभी तक पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि डाक सेवक चौबीस घ्ंाटे काम करते हैं। उनके लिए भी आठ घंटे का काम किया जाए, जिसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों और केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि वेतन में भारी विसंगतियां हैं। एक डाक सेवक को सात हजार तो दूसरे को अन्य सर्किल में बीस हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जो भेदभाव है और सरकार को इसे बंद करना होगा। उस पर विभाग द्वारा ग्रामीण डाक सेवकों को हर समय काम करने को कहा जाता है। उन्होंने कहा कि वह भी इंसान हैं और विश्राम उनका हक है। लेकिन, अभी तक समय में संशोधन नहीं किया गया। उन्होंने पीएमओं में मंत्री को दिल्ली में वित्त मंत्रालय के पास पड़ी उनकी फाइल को आगे बढ़ाने की मांग की, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो पाए।
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