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उज्ज परियोजना पर जम्मू-कश्मीर सरकार को सौंपी डीपीआर
Updated Sat, 30 Dec 2017 11:53 PM IST
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कठुआ। सार्वजनिक महत्व की बहुउद्देश्यीय उज्ज योजना को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। पिछले 16 साल से कागजों में अटकी इसकी फाइल फिलहाल राज्य सरकार तक पहुंच गई है। पिछले साल सिंधु जल संधि को लेकर हुए केंद्र की महत्वपूर्ण बैठक के बाद से ही केंद्रीय जल आयोग को इसकी डीपीआर में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद हाल ही में केंद्रीय जल आयोग ने डीपीआर राज्य सरकार को इवैल्यूएशन के लिए सौंप दी है।
यह परियोजना पिछले 16 सालों से आगे बढ़ने का इंतजार कर रही है। हैरानी की बात यह है कि ऐसा तब है जब वर्ष 2006 में केंद्रीय कैबिनेट उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना को राष्ट्रीय जल संसाधन परियोजना के रूप में मंजूरी देकर सिंचाई और पेयजल घटक की 90 फीसदी लागत को वहन करने पर भी राजी हो चुकी थी। महज 10 फीसदी लागत ही राज्य सरकार को अपने संसाधनों से खर्च करनी थी। बावजूद इसके वर्तमान और पिछली सरकारों द्वारा गंभीरता न दिखाए जाने से आज 200 मेगावाट बिजली का उत्पादन और 30 हजार हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई सपना ही रह गया। अब जाकर इस परियोजना के पूरा होने की एक किरण नजर आई है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कठुआ जिले की उज्ज दरिया पर वर्ष 2001 में बहुउद्देश्यीय परियोजना के रूप में विचार-विमर्श किया गया था। तदनुसार केंद्रीय जल आयोग के परामर्श से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन, 16 सोलह साल बीत जाने के बाद भी यह परियोजना डीपीआर स्टेज से बाहर नहीं निकल पाई। जानकारी के अनुसार विचार-विमर्श शुरू होने के 12 साल बाद यानी वर्ष 2013 के सितंबर माह में केंद्रीय जल आयोग को डीपीआर सौंप दी गई। इसके बाद जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के साथ मिलकर उक्त जगह का पर्यावरण प्रभाव आकलन और भूकंपीय मूल्यांकन शुरू हुआ। इसके साथ ही डीपीआर में देरी के कारण इसमें संशोधन और लागत अनुमानों में भी संशोधन को बढ़ाने का काम शुरू हुआ। फिलहाल यह डीपीआर एक बार फिर राज्य सरकार के पास पहुंच चुकी है। उम्मीद है कि जल्द इस परियोजना को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी। वर्ष 2016 में बजट सत्र के दौरान कठुआ विधायक राजीव जसरोटिया ने इस मामले को विधानसभा में उठाया था।
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2235 परिवार होंगे प्रभावित
सूत्रों की मानें तो उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना के परवान चढ़ने से एक बड़ा क्षेत्र जलमग्न होगा, जिसके कारण कई परिवारों के पलायन की भी स्थिति बनेगी। इसको लेकर कई बार आपत्तियां भी दर्ज करवाई जा चुकी हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति हर परियोजना के निर्माण के दौरान उत्पन्न होती है, जिसके बाद परिवारों को राहत एवं पुनर्वास योजना के तहत उचित मुआवजा भी दिया जाता है। इस योजना के परवान चढ़ने से लगभग 2235 परिवारों के प्रभावित होने का अनुमान है।
परियोजना का विवरण
परियोजना विवरण के अनुसार उज्ज बैराज के दाएं और बाएं किनारे से दो नहरें निकालने की योजना है। इससे दोनों ओर दस क्यूसेक पानी पेयजल के लिए उपलब्ध होगा। दाईं ओर की नहर कठुआ, हीरानगर के साथ ही सांबा जिलों के 5595 हेक्टेयर नहर कमान क्षेत्र के लिए सिंचाई व्यवस्था करेगी, जबकि बाईं नहर कठुआ जिले के अन्य भागों में 3053 हेक्टेयर नहर कमान क्षेत्र भूमि के लिए सिंचाई का मुख्य साधन बनेगी। वहीं, दाईं नहर से इसके अतिरिक्त खरीफ सीजन में सांबा से विजयपुर तक के 8095 हेक्टेयर क्षेत्र की भी सिंचाई संभव होगी। केंद्रीय जल आयोग द्वारा इवैल्यूशन के लिए भेजी गई डीपीआर में साफ है कि उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना से 200 मेगावॉट से अधिक बिजली उत्पादन और 30 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई उपलब्ध होगी।
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यह परियोजना पिछले 16 सालों से आगे बढ़ने का इंतजार कर रही है। हैरानी की बात यह है कि ऐसा तब है जब वर्ष 2006 में केंद्रीय कैबिनेट उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना को राष्ट्रीय जल संसाधन परियोजना के रूप में मंजूरी देकर सिंचाई और पेयजल घटक की 90 फीसदी लागत को वहन करने पर भी राजी हो चुकी थी। महज 10 फीसदी लागत ही राज्य सरकार को अपने संसाधनों से खर्च करनी थी। बावजूद इसके वर्तमान और पिछली सरकारों द्वारा गंभीरता न दिखाए जाने से आज 200 मेगावाट बिजली का उत्पादन और 30 हजार हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई सपना ही रह गया। अब जाकर इस परियोजना के पूरा होने की एक किरण नजर आई है।
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आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कठुआ जिले की उज्ज दरिया पर वर्ष 2001 में बहुउद्देश्यीय परियोजना के रूप में विचार-विमर्श किया गया था। तदनुसार केंद्रीय जल आयोग के परामर्श से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन, 16 सोलह साल बीत जाने के बाद भी यह परियोजना डीपीआर स्टेज से बाहर नहीं निकल पाई। जानकारी के अनुसार विचार-विमर्श शुरू होने के 12 साल बाद यानी वर्ष 2013 के सितंबर माह में केंद्रीय जल आयोग को डीपीआर सौंप दी गई। इसके बाद जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के साथ मिलकर उक्त जगह का पर्यावरण प्रभाव आकलन और भूकंपीय मूल्यांकन शुरू हुआ। इसके साथ ही डीपीआर में देरी के कारण इसमें संशोधन और लागत अनुमानों में भी संशोधन को बढ़ाने का काम शुरू हुआ। फिलहाल यह डीपीआर एक बार फिर राज्य सरकार के पास पहुंच चुकी है। उम्मीद है कि जल्द इस परियोजना को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी। वर्ष 2016 में बजट सत्र के दौरान कठुआ विधायक राजीव जसरोटिया ने इस मामले को विधानसभा में उठाया था।
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2235 परिवार होंगे प्रभावित
सूत्रों की मानें तो उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना के परवान चढ़ने से एक बड़ा क्षेत्र जलमग्न होगा, जिसके कारण कई परिवारों के पलायन की भी स्थिति बनेगी। इसको लेकर कई बार आपत्तियां भी दर्ज करवाई जा चुकी हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति हर परियोजना के निर्माण के दौरान उत्पन्न होती है, जिसके बाद परिवारों को राहत एवं पुनर्वास योजना के तहत उचित मुआवजा भी दिया जाता है। इस योजना के परवान चढ़ने से लगभग 2235 परिवारों के प्रभावित होने का अनुमान है।
परियोजना का विवरण
परियोजना विवरण के अनुसार उज्ज बैराज के दाएं और बाएं किनारे से दो नहरें निकालने की योजना है। इससे दोनों ओर दस क्यूसेक पानी पेयजल के लिए उपलब्ध होगा। दाईं ओर की नहर कठुआ, हीरानगर के साथ ही सांबा जिलों के 5595 हेक्टेयर नहर कमान क्षेत्र के लिए सिंचाई व्यवस्था करेगी, जबकि बाईं नहर कठुआ जिले के अन्य भागों में 3053 हेक्टेयर नहर कमान क्षेत्र भूमि के लिए सिंचाई का मुख्य साधन बनेगी। वहीं, दाईं नहर से इसके अतिरिक्त खरीफ सीजन में सांबा से विजयपुर तक के 8095 हेक्टेयर क्षेत्र की भी सिंचाई संभव होगी। केंद्रीय जल आयोग द्वारा इवैल्यूशन के लिए भेजी गई डीपीआर में साफ है कि उज्ज मल्टीपर्पज परियोजना से 200 मेगावॉट से अधिक बिजली उत्पादन और 30 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई उपलब्ध होगी।