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अब जेल में नहीं चलेगा पेट दर्द का बहाना, सामने आएगी हकीकत
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 31 Aug 2017 02:34 PM IST
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अलवर जेल
- फोटो : amar ujala
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जेल में बंद कैदियों का अब पेट दर्द का बहाना नहीं चलने वाला है। इसके लिए जेल प्रशासन ने पूरी तरह कमर कस ली है और जल्द ही इस पर अमल भी होगा।
दरअसल, मामला अलवर जेल से जुड़ा है। यहां जेल में बंद कैदियों और बंदियों को पेट संबंधी बीमारी की जांच के लिए जेल से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए सरकार द्वारा अलवर केंद्रीय कारागृह को एक अल्ट्रासाउंड मशीन आवंटित की गई है। जिसके द्वारा पेट संबंधी सभी तरह की बीमारियों की जांच सुविधा केंद्रीय कारागृह में ही मिलेगी।
जेलर समुंदर सिंह ने बताया कि केंद्रीय कारागृह को एक अल्ट्रासाउंड मशीन मिली है जिसे जेल के अस्पताल में रखवा दिया गया है। अब बंदियों और कैदियों को पेट संबंधी बीमारी जैसे पथरी, अपेंडिक्स और संक्रमण जैसी बीमारियों की जांच के लिए बाहर नहीं ले जाना पड़ेगा। अब जेल में ही इन सभी से संबंधित चिकित्सकीय जांच हो जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने पर अस्पताल से बाहर प्राइवेट अल्ट्रासाउंड मशीन पर जांच कराई जाती थी या फिर जयपुर एसएमएस अस्पताल जाना पड़ता था, लेकिन अब अल्ट्रासाउंड मशीन मिलने से इस समस्या से निजात मिलेगी। गौरतलब है कि यहां केंद्रीय कारागृह के अस्पताल में तीन स्थायी डॉक्टर हैं।
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दरअसल, मामला अलवर जेल से जुड़ा है। यहां जेल में बंद कैदियों और बंदियों को पेट संबंधी बीमारी की जांच के लिए जेल से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसके लिए सरकार द्वारा अलवर केंद्रीय कारागृह को एक अल्ट्रासाउंड मशीन आवंटित की गई है। जिसके द्वारा पेट संबंधी सभी तरह की बीमारियों की जांच सुविधा केंद्रीय कारागृह में ही मिलेगी।
जेलर समुंदर सिंह ने बताया कि केंद्रीय कारागृह को एक अल्ट्रासाउंड मशीन मिली है जिसे जेल के अस्पताल में रखवा दिया गया है। अब बंदियों और कैदियों को पेट संबंधी बीमारी जैसे पथरी, अपेंडिक्स और संक्रमण जैसी बीमारियों की जांच के लिए बाहर नहीं ले जाना पड़ेगा। अब जेल में ही इन सभी से संबंधित चिकित्सकीय जांच हो जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने पर अस्पताल से बाहर प्राइवेट अल्ट्रासाउंड मशीन पर जांच कराई जाती थी या फिर जयपुर एसएमएस अस्पताल जाना पड़ता था, लेकिन अब अल्ट्रासाउंड मशीन मिलने से इस समस्या से निजात मिलेगी। गौरतलब है कि यहां केंद्रीय कारागृह के अस्पताल में तीन स्थायी डॉक्टर हैं।
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