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चूहों द्वारा नवजात को कुतरने के मामले में सरकारी अस्पताल के दो नर्स एपीओ
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 13 Jun 2017 05:06 PM IST
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पीड़ित नवजात के चुहों द्वारा कुतरे गए हाथ
- फोटो : amar ujala
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राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक सरकारी अस्पताल में चार दिन के नवजात को चूहों द्वारा कुतरने की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने दोनों नर्सों को एपीओ कर दिया है। अस्पताल प्रशासन ने माना है कि ड्यूटी के दौरान दो मेल नर्सों ने लापरवाही बरती है।
शिशु को चूहों द्वारा कुतरने की घटना सुर्खियों में आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। दबाव के बाद एमबी अस्पताल में बने जनाना वार्ड में लगे दो मेल नर्सों विपुल और ललित को एपीओ कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने माना है कि ये घटना ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के कारण घटी। गौरतलब है कि बांसवाड़ा के एमजी अस्पताल के पीएनसी वार्ड में सोमवार सुबह अचानक बिजली गुल हो गई। इस दौरान वहां भर्ती एक नवजात रोने लगा। जब नर्सिंगकर्मियों ने लाइट आने के बाद देखा कि बच्चा क्यों रो रहा है तो सबके होश फाख्ता हो गए।
नवजात के हाथ से खून निकल रहा था उसे जगह-जगह चूहों ने काट लिया था। यह नवजात बांसवाड़ा के चंदूजी का गढ़ा निवासी महिला प्रियंका का है। फिलहाल नवजात को बेहतर उपचार के लिए पीएनसी वार्ड में रखा गया है।
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वहीं इस घटना के बाद वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों के परिजन दिनभर अपने बच्चों के पास ही रहे। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने का प्रयास करते दिखाई दिए लेकिन मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई कर डाली।
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शिशु को चूहों द्वारा कुतरने की घटना सुर्खियों में आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। दबाव के बाद एमबी अस्पताल में बने जनाना वार्ड में लगे दो मेल नर्सों विपुल और ललित को एपीओ कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन ने माना है कि ये घटना ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के कारण घटी। गौरतलब है कि बांसवाड़ा के एमजी अस्पताल के पीएनसी वार्ड में सोमवार सुबह अचानक बिजली गुल हो गई। इस दौरान वहां भर्ती एक नवजात रोने लगा। जब नर्सिंगकर्मियों ने लाइट आने के बाद देखा कि बच्चा क्यों रो रहा है तो सबके होश फाख्ता हो गए।
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नवजात के हाथ से खून निकल रहा था उसे जगह-जगह चूहों ने काट लिया था। यह नवजात बांसवाड़ा के चंदूजी का गढ़ा निवासी महिला प्रियंका का है। फिलहाल नवजात को बेहतर उपचार के लिए पीएनसी वार्ड में रखा गया है।
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वहीं इस घटना के बाद वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों के परिजन दिनभर अपने बच्चों के पास ही रहे। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने का प्रयास करते दिखाई दिए लेकिन मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई कर डाली।