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खेत में पहुंचा टाइगर और काम कर रहे किसान को जंगल में ले जाने लगा, फिर...
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 25 Nov 2017 05:21 PM IST
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डेमो इमेज
एक बाघ जंगल खेत में पहुंचा और वहां काम कर रहे लोगों पर अटैक कर दिया। इस दौरान वह एक किसान को घसीटकर जंगल की तरफ ले जाने लगा। तभी उसके पिता ने साहस दिखाया और अपने बेटे की जान बचाई। इस हमले में बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर की है। यहां खंडार रेंज से सटे तलावड़ा गांव में एक खेत में आ पहुंचा। वह वहां काम कर रहे किसानों पर अचानक हमला कर दिया। इस दौरान उसने गौरीशंकर को पकड़ लिया और फिर उसे घसीटकर जंगल में ले जाने लगा।
बाघ के हमले से वहां हडकम्प मच गया। इस दौरान गौरीशंकर का पिता प्रभुलाल गुर्जर आ गया और शोर मचाने लगा। आसपास खेतों में काम कर रहे अन्य लोग भी मौके पर आ गए। सबके शोर को सुनकर बाघ गौरीशंकर को छोड़कर जंगल में भाग गया। इस हमले में गौरीशंकर बुरी तरह से घायल हो गया। घायल गौरीशंकर को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जयपुर रैफर कर दिया।
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घटना राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर की है। यहां खंडार रेंज से सटे तलावड़ा गांव में एक खेत में आ पहुंचा। वह वहां काम कर रहे किसानों पर अचानक हमला कर दिया। इस दौरान उसने गौरीशंकर को पकड़ लिया और फिर उसे घसीटकर जंगल में ले जाने लगा।
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बाघ के हमले से वहां हडकम्प मच गया। इस दौरान गौरीशंकर का पिता प्रभुलाल गुर्जर आ गया और शोर मचाने लगा। आसपास खेतों में काम कर रहे अन्य लोग भी मौके पर आ गए। सबके शोर को सुनकर बाघ गौरीशंकर को छोड़कर जंगल में भाग गया। इस हमले में गौरीशंकर बुरी तरह से घायल हो गया। घायल गौरीशंकर को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जयपुर रैफर कर दिया।
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अधिकारियों ने लगाया मुआवजे का मरहम
रणथम्भोर नेशनल पार्क
- फोटो : demo pic
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर ग्रामीण भी एकत्र हो गए। वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और बाघ की पगमार्क के आधार पर खोजबीन की। बताया जा रहा है कि बाघ हमले के बाद वापस जंगल में भाग गया।
ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए वन अधिकारियों ने घायल किसान का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा की। आपको बता दें कि सवाईमाधोपुर में रणथंभौर नेशनल पार्क के आसपास कई गांव बसे हुए हैं और इनमें आए दिन बाघ और ग्रामीणों का आमना-सामना होने की घटनाएं बढ़ रही है। ये स्थिति बाघों और ग्रामीणों के लिए खतरनाक है। ज्यादातर मामलों में वन विभाग के अधिकारी महज मुआवजे का मरहम लगाकर इतिश्री कर लेते है। यहां से गांवों की शिफ्टिंग का काम ठप पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए वन अधिकारियों ने घायल किसान का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा की। आपको बता दें कि सवाईमाधोपुर में रणथंभौर नेशनल पार्क के आसपास कई गांव बसे हुए हैं और इनमें आए दिन बाघ और ग्रामीणों का आमना-सामना होने की घटनाएं बढ़ रही है। ये स्थिति बाघों और ग्रामीणों के लिए खतरनाक है। ज्यादातर मामलों में वन विभाग के अधिकारी महज मुआवजे का मरहम लगाकर इतिश्री कर लेते है। यहां से गांवों की शिफ्टिंग का काम ठप पड़ा हुआ है।