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राम मंदिर का समर्थन ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है-सुरेश भैयाजी जोशी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 19 Nov 2017 05:45 PM IST
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सरकार्यवाह भैया जी जोशी
- फोटो : samvada.org
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाहक सुरेश भैयाजी जोशी ने राम मंदिर मुद्दे को राष्ट्रभक्ति से जोड़कर बयान दिया है।
सुरेश भैयाजी ने कहा है कि राम मंदिर का समर्थन ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए वर्तमान में श्रीश्री रविशंकर के नेतृत्व में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इसका समर्थन कर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया है। भैयाजी जोशी अजमेर में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के तहत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सभागार में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हर मुस्लिम को भी राम मंदिर बनवाने के लिए समर्थन कर अपनी राष्ट्रभक्ति प्रदर्शित करनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब बाबरी ढांचे को ढहाने के लिए हजारों की संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचे थें, तो रास्ते में उन्होंने किसी भी धर्म स्थल पर पत्थर नहीं फेंका ना किसी को नुकसान पहुंचाया था।
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सुरेश भैयाजी ने कहा है कि राम मंदिर का समर्थन ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए वर्तमान में श्रीश्री रविशंकर के नेतृत्व में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इसका समर्थन कर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया है। भैयाजी जोशी अजमेर में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के तहत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सभागार में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हर मुस्लिम को भी राम मंदिर बनवाने के लिए समर्थन कर अपनी राष्ट्रभक्ति प्रदर्शित करनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब बाबरी ढांचे को ढहाने के लिए हजारों की संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचे थें, तो रास्ते में उन्होंने किसी भी धर्म स्थल पर पत्थर नहीं फेंका ना किसी को नुकसान पहुंचाया था।
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समझना होगा कि राम राष्ट्रीयता के प्रतीक है
भैया जी जोशी के उद्बोधन को सुनते गणमान्य नागरिक
- फोटो : Amar Ujala
जोशी ने कहा कि कार सेवकों का उद्देश्य एक बाहरी आक्रमणकारी द्वारा स्थापित एक मस्जिद जो की मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी उसको हटाना था। उनका मकसद किसी भी प्रकार से इस्लाम का विरोध नहीं था।
उन्होंने कहा कि देश में निवास करने वाले मुस्लिम धर्म वालों को भी यह समझना होगा कि भगवान राम ही राष्ट्रीयता का प्रतीक है और रहेंगे। जोशी ने कहा कि आरएसएस राजनीति से जोड़कर कैसा देखा जा सकता है। इस संस्था के बारे में राजनीति से हटकर बात करनी चाहिए। भारतीय राष्ट्रवाद के साथ हिंदू शब्द जुड़ा है। हिंदू शब्द को संकीर्ण सांप्रदायिकता के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में निवास करने वाले मुस्लिम धर्म वालों को भी यह समझना होगा कि भगवान राम ही राष्ट्रीयता का प्रतीक है और रहेंगे। जोशी ने कहा कि आरएसएस राजनीति से जोड़कर कैसा देखा जा सकता है। इस संस्था के बारे में राजनीति से हटकर बात करनी चाहिए। भारतीय राष्ट्रवाद के साथ हिंदू शब्द जुड़ा है। हिंदू शब्द को संकीर्ण सांप्रदायिकता के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत को समझने के लिए....
पंडित दीनदयाल उपाध्याय
- फोटो : demo pic
भैयाजी जोशी ने कहा कि अगर भारत को समझना है तो संस्कृत को पढ़ना और समझना होगा। इसके बिना भारत को नहीं जाना जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां तो क्षेत्रीय पार्टियां अपने क्षेत्र विशेष व अपने उत्थान मात्र के लिए अपने राष्ट्रीय हित का बलिदान करने के लिए भी तैयार रहती है।
इस मौके पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। व्याख्यान कार्यक्रम के विषय वर्तमान संदर्भ में भू सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर प्रस्तावना रखते हुए पंडित दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष पूर्व सांसद एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेश चंद शर्मा ने कहा की वर्तमान में राष्ट्र की कोई परिभाषा नहीं है।
इस अवसर पर बोर्ड चेयरमैन बीएल चौधरी, महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनीता भदेल, जिला प्रमुख वंदना नोगिया, प्रोफेसर बी एल सारस्वत, सह सरकार्यवाहक मदन दास आदि उपस्थित थे।
इस मौके पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। व्याख्यान कार्यक्रम के विषय वर्तमान संदर्भ में भू सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर प्रस्तावना रखते हुए पंडित दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष पूर्व सांसद एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेश चंद शर्मा ने कहा की वर्तमान में राष्ट्र की कोई परिभाषा नहीं है।
इस अवसर पर बोर्ड चेयरमैन बीएल चौधरी, महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनीता भदेल, जिला प्रमुख वंदना नोगिया, प्रोफेसर बी एल सारस्वत, सह सरकार्यवाहक मदन दास आदि उपस्थित थे।